90+ तन्हा, तन्हाई शायरी 2 लाइन - Alone Status - Tanha, Tanhayi Status



दोस्तों हिंदी उर्दू शायरी के इस Post की  Topic "Tanha, Tanhayiyan Shayari" हैं. इसमें आप पढ़ सकते हैं  तन्हा, तन्हाई शायरी 2 लाइन,  तन्हा, तन्हाई शायरी in Urdu, Tanha, Tanhayiyan Status, Alone Status,  तन्हा, तन्हाई शायरी 4 लाइन,  पर बनी बेजोड़ शानदार  तन्हा, तन्हाई शायरी को, मित्रो आशा करता हूँ कि यह पोस्ट आप सभी शायरी के चाहने वालो को बेहद पसंद आएगी.

Tanha-Tanhayi-Shayari
Tanha, Tanhayi Shayari 

आईये शुरुआत करते हैं "तन्हा, तन्हाई और तन्हाईयाँ शब्द पर बनी शायरी के के इस  कलेक्शन की और पढ़ते हैं  "Tanha, Tanhayiyan Shayari" को और अपने  करते हैं  व्हाट्सएप्प और अन्य सोशल मिडिया पर.. 

1
अपनी तन्हाई में खलल यूँ डालूँ सारी रात,
खुद ही दर पे दस्तक दूँ और खुद ही पूछूं कौन?

2
तन्हाई की आग में कहीं जल ही न जाऊँ
के अब तो कोई मेरे आशियाने को बचाले


3
मैं हूँ दिल है तन्हाई है 
तुम भी होते अच्छा होता 
फ़िराक़ गोरखपुरी

4
कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता 
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता 
ख़्तर शीरानी

5
तन्हाईयां मेरीं याद करती हैं सदा जिन्हें,
ज़रूरत उनको भी हो मेरी ये ज़रूरी तो नहीं

6
कौन भूला पाया हैं, तेरी यादों के जख़ीरे को, 
दिल की धड़कन, तन्हाईयों की रुह होती है

7
जब शक्ल कोई तन्हा कमरे में सँवरती है,
आईना ही जाने क्या उस पर गुजरती है

8
फुर्सत में याद करना हो तो मत करना,
हम तन्हा ज़रूर है, मगर फिज़ूल नही


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9
तेरी याद ने मेरा बुरा हाल कर दिया,
तन्हा मेरा जीना मुहाल कर दिया

10
हो जाओ गर तनहा कभी तो मेरा नाम याद रखना,
मुझे याद हैं सितम तेरे, तू मेरा प्यार याद रखना

11
अपने ही ज़ख्म खुद ही खरोंचता रहता हूँ,
जब भी तन्हा होता हूँ, तुम्हे ही सोचता रहता हूँ

12
अब तो उन की याद भी आती नहीं 
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ 
फ़िराक़ गोरखपुरी

   तन्हाई शायरी in Urdu   

13
दिल दबा जाता है कितना आज ग़म के बार से 
कैसी तन्हाई टपकती है दर ओ दीवार से 
अकबर हैदराबादी

14
कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है 
तिरे दम भर के मिल जाने को हम भी क्या समझते हैं 
फ़िराक़ गोरखपुरी

15
किस क़दर बद-नामियाँ हैं मेरे साथ 
क्या बताऊँ किस क़दर तन्हा हूँ मैं 
अनवर शऊर

16
मेरी तन्हाई को मेरा शौक न समझना, 
बहुत प्यार से दिया है ये तोहफा किसी ने

17
कितना तनहा सा लगता है जब बादल हो बारिश न हो, 
आँखें हो कोई ख्वाब न हो और अपना हो पर पास न हो

18
पुकारा जब मुझे तन्हाई ने तो याद आया 
कि अपने साथ बहुत मुख़्तसर रहा हूँ मैं 
फ़ारिग़ बुख़ारी

19
दरवाज़े पर पहरा देने 
तन्हाई का भूत खड़ा है 
मोहम्मद अल्वी

20
उसके दिल मे थोडी सी जगह माँगी थी मुसाफिर की तरह
उसने तो तन्हाईयो का पूरा शहर ही मेरे ऩाम कर दिया

21
काग़ज तन्हा है, कलम मौन है
दिल भी कह रहा है, तू कौन है

   Alone Status   

22
देख लिया जमाना निचोड़कर,
बूँद बूँद टपकी हूँ तन्हा तन्हा होकर

23
वो जो तन्हा कर गये तो मै तन्हा हूँ आज तक,
इन्तहा मै ने भी कर दी इक ज़रा सी बात पर

24
चल दिया वो सब को तन्हा छोड़ कर,
काश वो दुनिया में रहता देर तक

25
क्या टुटा है अंदर अंदर क्यों चेहरा कुम्हलाया हैं,
तन्हा तन्हा रोने वाले कौन तुम्हे याद आया है

26
रख लो दिल में संभाल कर, थोड़ी सी यादें मेरी,
रह जाओग जब तन्हा, बहुत काम आयेंगे हम

27
इससे ज्यादा कुछ नहीं हो पायेगा,
तू वहां जी लेगा तन्हा मैं यहाँ मर जाऊंगा अकेला

28
जान-ए-तन्हा पे गुजर जायें हजारो सदमें, 
आँख से अश्क रवाँ हों ये ज़रूरी तो नहीं

29
और तो सब ठीक है लेकिन, कभी-कभी यूँ ही,
चलता फिरता शहर अचानक तन्हा लगता है

30
वही तनहाई सी छाने लगी है, फिर तेरी याद सताने लगी है,
तू भी तन्हा है, मैं भी तन्हा हूँ, ज़िंदगी मुफ्त में जाने लगी है


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31
आईना लेके जो भी आए हैं, हम भी उनका जमीर देखेंगे,
सब हैं तन्हा, सभी में खालीपन, आप किस किस की पीर देखेंगे

32
सच ही कहा था किसी ने तन्हा जीना सीख,
मोहब्बत कितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ जाती है

33
खुद ही तन्हाईयो का बोझ उठाना होगा,
चल मेरे दिल तुझे मरना होगा

34
अपने साए से चौंक जाते हैं 
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा 
गुलज़ार

35
ग़म ओ नशात की हर रहगुज़र में तन्हा हूँ 
मुझे ख़बर है मैं अपने सफ़र में तन्हा हूँ 
मख़मूर सईदी

36
इतने घने बादल के पीछे 
कितना तन्हा होगा चाँद 
परवीन शाकिर

37
इस तरह हम सुकून को महफूज़ कर लेते हैं, 
जब भी तन्हा होते हैं तुम्हें महसूस कर लेते हैं


38
हिचकियाँ रात दर्द तन्हाई 
आ भी जाओ तसल्लियाँ दे दो 
नासिर जौनपुरी

39
लोगों ने छीन ली है मेरी तन्हाई तक, 
इश्क आ पहुँचा है इलज़ाम से रुसवाई तक

   Tanha, Tanhayiyan Status   

40
उनकी याद का दरिया और तन्हा दिल की कश्ती,
दूररररर...  फलक तक सिर्फ यादें ना ज़मीन ना कोई बस्ती

41
तुम तन्हा इश्क़ क्या करोगे,
चलो आधा आधा कर लेते हैं 

42
कभी तिनके, कभी पत्ते, कभी खुशबू उड़ा लाई,
हमारे घर तो आँधी भी कभी तनहा नहीं आई

43
मैंने कब कहा कीमत समझो तुम मेरी,
हमें बिकना ही होता तो यूँ तन्हा ना होते

44
रोते है तन्हा देखकर मुझको वो रास्ते..
जिन पे तेरे बग़ैर मै गुजरा कभी ना था

45
भीड़ के ख़ौफ़ से फिर घर की तरफ़ लौट आया 
घर से जब शहर में तन्हाई के डर से निकला 
अलीम मसरूर

46
अब तो उनकी याद भी आती नही,
कितनी तन्हा हो गयी तन्हाईयाँ

   Alone Status   

47
जनवरी से तुम्हे खुशिया मिली क्या यारो,
में तो अब भी तन्हा हु दिसंबर की तरह

   तन्हा, तन्हाई शायरी 4 लाइन   

48
किसी का हाथ कैसे थाम लूँ,
वो तन्हा मिल गया तो क्या कहूँगा

49
मुसाफ़िर ही मुसाफ़िर हर तरफ़ हैं,
मगर हर शख़्स तन्हा जा रहा है

50
काश कि तुम समझ सकते मोहब्बत के उसूलों को,
किसी के जीने की वजह बनने के बाद.
उन्हें तन्हा छोडा नहीं करते

51
जो दूसरों को तन्हा करते है,
वो खुद भी बहुत तन्हा हो जाते है

52
मशरूफ रहने का अंदाज़ तुम्हें तनहा ना कर दे ग़ालिब,
रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं

53
सबको ख़ुशी देकर में तन्हा ही रहे जाऊंगा,
शूभे का सूरज हूं ढलते ढलते ढल जाऊंगा

54
भीड़ तन्हाइयों का मेला है, 
आदमी आदमी अकेला है
सबा अकबराबादी

   तन्हाई शायरी in Urdu   

55
देख कभी आ कर ये ला-महदूद फ़ज़ा 
तू भी मेरी तन्हाई में शामिल हो 
ज़ेब ग़ौरी

56
काव काव-ए-सख़्त-जानी हाए-तन्हाई न पूछ, 
सुब्ह करना शाम का लाना है जू-ए-शीर का 
मिर्ज़ा ग़ालिब

57
मैं अपने साथ रहता हूँ हमेशा, 
अकेला हूँ मगर तन्हा नहीं हूँ 



58
चाँदनी बन के बरसने लगती हैं  
तेरी यादें मुझ पर, 
बड़ा ही दिलकश मेरी 
तनहाइयों का मंज़र होता है

59
माना कि दूरियां कुछ बढ़ सी गयी हैं लेकिन,
तेरे हिस्से का वक्त आज भी तन्हा ही गुजरता है

60
मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको,
ऐ ज़िन्दगी मुझे रोज़ रोज़ तमाशा न बनाया कर

61
ना ढूंढ मेरा किरदार दुनिया के भीड़ में,
वफ़ादार तो हमेशा तन्हा ही मिलते हैँ

62
बच्चे मेरी उँगली थामे, धीरे धीरे चलते थे,
फिर वो आगे दौड़ गए, मैं तन्हा पीछे छूट गया

63
कोई क्या जाने कि है रोज़-ए-क़यामत क्या चीज़ 
दूसरा नाम है मेरी शब-ए-तन्हाई का 
जलील मानिकपूरी

64
हक की लड़ाई तन्हा ही लड़नी होती है,
सैलाब उमड़ता है जीत जाने के बाद

65
भते हुए ख्वाबों से कह दो अब आया ना करे,
हम तन्हा तसल्ली से रहते है बेकार उलझाया ना करे 

66
तन्हा राते बेमिसाल हे , तेरे जाने के बाद,
तु घुट घुट कर मत रोना , मेरे गुजर जाने के बाद

67
मेरी हर रात तन्हा मेरी हर बात तन्हा,
तुम्हे होगी मिलने की ख़ुशी मै करके मुलाकात तन्हा

68
तनहा रहना तो मुहब्बत वालों की एक रस्म है,
अगर फूल सिर्फ खुशी के लिए होते तो जनाजे पे ना डाले जाते

69
डूब कर सूरज ने मुझे और भी तन्हा कर दिया,
साया भी अलग हो गया मेरे अपनो की तरह

70
कितने चेहरे कितनी शक्लें फिर भी तन्हाई वही, 
कौन ले आया मुझे इन आईनों के दरमियाँ 
महमूद शाम

71
कौन कहता है तन्हाईयां अच्छी नही होती,
बहुत हँसीं मौका देती है खुद से मिलने का

72
दरिया की वुसअतों से उसे नापते नहीं 
तन्हाई कितनी गहरी है इक जाम भर के देख 
दिल मंसूरी

73
मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें 
ये लीजे आप का घर आ गया है हात छोड़ें 
जावेद सबा

74
ये भी शायद इक अदा है ज़िंदगी की यारों,
जिसको साथी मिल गया वो तन्हा हो गया

75
जब से देखा है चाँद को तन्हा,
खुद से भी कोई शिकायत ना रही


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76
सुनो हवाओ, चिरागों को छोड़ दो तन्हा,
जो जल रहे है, उन्हें और क्या आज़माना

77
किसके साथ चलू और किसका हो जाऊ,
इससे बहेतर है की अकेला रहू और तन्हा हो जा

78
वो उम्र भर तो साथ निभा ना सका मेरा लेकिन, 
याद बनकर उसने मुझे कभी तन्हा ना छोड़ा

79
जब भी होती हूं तन्हा हमेशा वह साथ होता है, 
मोहब्बत होती है जिससे उसका दिल में ख्याल होता है

80
जिंदगी भी कितनी अजीब है,
मुस्कुराओ तो लोग जलते है,
तन्हा रहो तो सवाल करते है

81
खामोश तुम्हारी नजरों ने एक काम गजब का कर डाला,
पहले थे हम दिल से तन्हा अब खुद से ही तन्हा कर डाला

   Tanha, Tanhayiyan Status   

82
तेरी कसमों से ले तेरी वादों तक
हर झूठ को हम सच बनाते रहे
हम पागल थे तेरे प्यार में
जो तन्हा ही वफा निभाते रहे

83
मैं बैठा हूँ तन्हा लेकर तुम्हारे निशां,
छुप के बैठा है जाने मेरा चाँद कहाँ

आ जाओ रूबरू कर दो मेहरबानी,
देखो ना ईद मना रहा है सारा जहाँ

84
मै तन्हा नहीं हूं तेरी यादें हर पल ही मेरे साथ है,
खवाबो में ही सही तेरे हाथों में मेरा हाथ है

85
आपके साथ उम्र भर चलना था मुझे,
प्यार बहुत प्यार करना था तुम्हें,
पर वक्त ने हालात बदल डाले, 
आज मैं तन्हा और तुम्हारे बिन, 
जिंदगी का- हर सफर तन्हा

   तन्हा, तन्हाई शायरी 4 लाइन   

86
कोई ये कैसे बताए कि, वो तन्हा क्यूँ है?
वो जो अपना था वही, और किसी का क्यूँ है?

यही दुनिया है तो फ़िर, ऐसी ये दुनिया क्यूँ है?
यही होता है तो आख़िर, यही होता क्यूँ है?
कैफ़ी आज़मी

87
जिंदगी के ज़हर को यूँ हँस के पी रहे हैं,
तेरे प्यार बिना यूँ ही ज़िन्दगी जी रहे हैं,

तन्हाइयों से तो अब डर नहीं लगता हमें,
तेरे जाने के बाद यूँ ही तन्हा जी रहे हैं

Zindagi Ke Zehar Ko Yu Has Ke Pi Rahe Hai,
Tere Pyar Bina Yu Hi Zindagi Jee Rahe Hai,

Tanhayiyo Se To Ab Darr Nahi Lagta Hamein,
Tere Jaane Ke Baad Yu Hi Tanha Jee Rahe Hai




88
जब जब याद करोगी अपनी तन्हाईयो को,
एक जलता चराग सा नज़र आऊगा मैं,

राह से रहगुज़र बन के भी गुजर जाओगी,
एक मिल का पत्थर सा खड़ा नज़र आऊगा मैं

89
तेरे होने पर खुद को तनहा समझू,
मैं बेवफा हूँ या तुझको बेवफा समझू,

ज़ख्म भी देते हो मलहम भी लगाते हो,
ये तेरी आदत हैं या इसे तेरी अदा समझू

90
रात की तन्हाईयो का जोर बहुत है, 
यहाँ आशिको की मुरादे और उनके,
आहो का शोर बहुत है,
ऐ चाँद मत सुना दास्ताने उनकी,
के हमारा दिल कमजोर बहुत है

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