Monday, 23 April 2018

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी - Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी - Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री रहे लौह पुरूष  “सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी” (Sardar Vallabhbhai Patel Biography) के बारे में.

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एक झलक सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी पर :

Sardar Vallabhbhai Patel जी का जन्म गुजरात में स्थित नाडियाड में 31 अक्टूबर, 1875 को हुआ. इनके पिता जी का नाम झवेरभाई पटेल था और माता जी का नाम लाड़बाई था. ये अपने माता पिता की चौथी संतान थे. और ये पट्टीदार जाति के एक समृद्ध ज़मींदार परिवार से थे.

भाई व बहन :
वल्लभभाई पाँच भाई व एक बहन थे। भाइयों के नाम सोभाभाई, नरसिंहभाई, विट्ठलभाई, वल्लभभाई और काशीभाई थे. बहन डाबीहा सबसे छोटी थी.


शिक्षा :
सरदार पटेल जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा करमसद में प्राथमिक विद्यालय से की और उसके बाद पेटलाद स्थित उच्च विद्यालय में अपना दाखिला लिया और वह से भी अपने आगे की शिक्षा ली. और उन्होंने मुख्यतः अपनी शिक्षा स्वाध्याय से की.

विवाह :
जब Vallabhbhai Patel जी की उम्र 16 वर्ष की हुयी तब इनके माता पिता ने इनका  विवाह करा दिया. इनकी पत्नी का नाम झावेरबा था.

अधिवक्ता कार्यालय की स्थापना :
 मैट्रिक की परीक्षा 22 वर्ष की उम्र में पूरी की. इसी के साथ  ज़िला अधिवक्ता की परीक्षा को भी उत्तीर्ण किया और उन्हें इसी के बाद अनुमति मिल गयी वकालत करने की एक अधिवक्ता के रूप में. और सन 1900 में उन्होंने गोधरा मे स्वतंत्र ज़िला अधिवक्ता कार्यालय की स्थापना की. और दो वर्षो तक कार्य किया उसके बाद खेड़ा ज़िले में स्थित बोरसद चले गए.

व्यावसायिक शुरुआत :
सरदार पटेल अपने वकालत के कार्य में इतने माहिर हो गए थे कि कमजोर से कमजोर मुकदमे भी सटीकता से प्रस्तुत करते थे. और पुलिस के गवाहों तथा अंग्रेज़ न्यायाधीशों को अपनी दलीलों से चुनौती दिया करते थे.

पत्नी का निधन :
तभी उनके साथ एक हादसा घटित हुआ सन 1908 में पत्नी का निधन हो गया जिसके कारण उन्हें काफी दुःख हुआ.  और पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरी शादी नहीं की आजीवन उन्होंने  विधुर का जीवन व्यतीत किया. इनके दो बालक थे एक पुत्र और एक पुत्री के रूप में.

 लंदन की ओर :
इसी के बाद वकालत की आगे की पढाई के लिए अगस्त, 1910 में लंदन चले गए और उन्होंने वही पर रह कर  मिड्ल टेंपल का अध्ययन किया और अंतिम परीक्षा में उच्च प्रतिष्ठा के साथ उत्तीर्ण हुए.

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवनी परिचय - Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi

भारत आगमन :
पढाई पूरी करने के बाद फ़रवरी, 1913 में Sardar Patel वापस भारत आ गए और फिर से उन्होंने शुरू की वकालत और देखते देखते ही  अहमदाबाद अधिवक्ता बार में अपराध क़ानून के नामी वकील बन गए. उनकी शोहरत प्रकाश की तरह फ़ैलने लगी. हमेशा गम्भीर और शालीन रहने वाले Sardar Vallabhbhai Patel जी अपने उच्च स्तरीय तौर-तरीक़ों और चुस्त, अंग्रेज़ी पहनावे के लिए भी जाने - पहचाने  जाते थे.
राजनीतिक सफ़र :
सन 1917 में देश की आज़ादी के लिए गांधी जी द्वारा चलाये जा रहे सत्याग्रह आन्दोलन के कारण  सरदार पटेल गाँधी जी से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्हें अन्दर से महसूस होने लगा की उनमे काफी बदलाव सा आ गया हैं. उनकी दिशा ही बदल गयी.

और इसके बाद से ही वो गाँधी जी के साथ सत्याग्रह (अंहिसा की नीति) के साथ जुड़ गए और अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जंग शुरू कर दी. लेकिन कभी वह गाँधीजी के नैतिक विश्वासों व आदर्शों को अपने अन्दर जगह नहीं दी. लेकिन अपनी शैली और वेशभूषा में पूरा परिवर्तन ले आये गुजरात क्लब छोड़ दिया और भारतीय किसानों के समान सफ़ेद वस्त्र पहनने लगे तथा भारतीय खान-पान को पूरी तरह से अपना लिया.

बारदोली सत्याग्रह  :
सरदार पटेल ने अहमदनगर के पहले भारतीय निगम आयुक्त के रूप में सन 1917 से लेकर सन 1924 तक अपनी सेवा प्रदान की. और इसी के साथ निर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में सन 1924 से लेकर सन 1928 तक कार्य किया.

अपने इसी कार्यकाल के दौरान सन 1928 में बारदोली के भूमिपतियों के ऊपर अंग्रेजो द्वारा बढ़ाये गए करों के ख़िलाफ़ संघर्ष किया और सफलतापूर्वक संघर्ष का लोगो के साथ मिलकर नेतृत्व किया.

"सरदार" की उपाधि :
पटेल जी द्वारा बारदोली सत्याग्रह के आन्दोलन का कुशलतापूर्वक  नेतृत्व करने के कारण लोगो ने इनको "सरदार" की उपाधि दी और इसी के बाद से सरदार पटेल के भी नाम से प्रसिद्ध हुए.

राष्ट्रवादी नेता :
इस सफलता के बाद उनके कदम पीछे नहीं पड़े और लगातार आगे बढ़ते गए.  देश भर में लोग उन्हें एक राष्ट्रवादी नेता के रूप पहचानने लगे. लोग उन्हें व्यावहारिक, निर्णायक और यहाँ तक कि कठोर भी कहते थे और अंग्रेज़ तो उन्हें एक ख़तरनाक शक्तिशाली दुश्मन भी मानते थे.

अध्यक्ष पद से नाम वापसी :
सन 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा किये गए लाहौर अधिवेशन में  गाँधी जी के बाद सरदार पटेल की ही नाम आता हैं अध्यक्ष पद के दूसरे उम्मीदवार के रूप में. तब स्वाधीनता के प्रस्ताव को स्वीकृत होने से रोकने के लिए गाँधी जी ने अध्यक्ष पद की दावेदारी छोड़ दी. और इसी के साथ अध्यक्ष पद के दूसरे उम्मीदवार के रूप में रहे पटेल जी को भी इस दावेदारी से नाम वापसी लेने के लिए अपना काफी दबाव डाला और  इसी के साथ जवाहरलाल नेहरू को अध्यक्ष बनाया.
जेल यात्रा :
गाँधी जी द्वारा चलाये जा रहे सन 1930 में नमक सत्याग्रह के आन्दोलन में सरदार पटेल ने भी अपनी अहम्न भूमिका निभाई थी जिसके कारण उन्हें तीन महीने की कारावास की सजा हुई. और इसके बाद वे रिहा हुए तब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के करांची अधिवेशन की अध्यक्षता मार्च, 1931 में की और फिर एक बार उनकी गिरफ्तारी हुयी जनवरी, 1932 में और उसके बाद सन 1934 में फिर से रिहाई हुयी.

अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार :
कारावास से आज़ाद होने के बाद कांग्रेस पार्टी के संगठन को काफी मजबुती प्रदान की और 1937 के चुनावों में  संगठन को व्यवस्थित किया. सन 1937 से 1938 में वे कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार के रूप में थे. लेकिन फिर गाँधी जी ने बीच में आकर उनपे दुबारा से  अपना दबाव डाला जिसके कारण फिर Sardar Vallabhbhai Patel जी ने अपना नाम वापस ले लिया और दुबारा से नेहरू जी बन गए अध्यक्ष
  
अंग्रेजो ने फिर एक बार कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल को  अक्टूबर, 1940 में गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जेल भेज दिया. इनकी रिहाई अगस्त, 1941 में हुयी.

एक वर्ष बाद पुनः इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. क्युकि देश में भारत छोड़ो आन्दोलन तेजी पर था और अंग्रेजो के पांव उखड रहे थे तब अगस्त 1942 में अहमदनगर फोर्ट में नेहरु, आजाद व कई अन्य  प्रमुख नेताओं के साथ-साथ  Sardar Patel को भी गिरफ्तार कर लिया गया. प्रमुख नेता होने की वजह से शिमला वार्ता में भाग लेने हेतु जून 1945 को उन्हें रिहा कर दिया गया.
आज़ादी के बाद :
आखिरकार 15 अगस्त, सन् 1947 को  देश को अंग्रेजो से स्वतंत्रता मिल गयी. नेहरू जी स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने सरदार पटेल गृहमंत्री बने. और इन पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौपी गयी.   देसी राज्यों (रियासतों) का एकीकरण करना.

देसी राज्यों का भारत में विलय :
सरदार पटेल ने यह कार्य आजादी के पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था. पीवी मेनन के साथ मिलकर. और इसी के परिणाम स्वरूप कई देसी राज्यों के राजवाडों को उनकी स्वेच्छा से भारत में मिलाने के सफल रहे लेकिन बस तीन राज्य को समझाने में असफलता प्राप्त हुयी उन्होंने भारत विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था.
  1. जम्मू एवं कश्मीर,
  2. जूनागढ
  3. हैदराबाद
1 = भारत विलय का प्रस्ताव अस्वीकार करने पर जूनागढ के नवाब के खिलाफ़ बागवत छिड़ गयी जिसके कारण उसे पाकिस्तान भागना पड़ा और इसके बाद जूनागढ भारत में मिल गया.

2 = हैदराबाद को भारत में मिलाने के प्रस्ताव को जब निजाम ने अस्वीकार किया तब Sardar Vallabhbhai Patel ने वह सेना को भेज निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया और फिर हैदराबाद भारत में मिल गया.

3 = जम्मू एवं कश्मीर को नेहरू जी ने अन्तराष्ट्रीय समस्या बताते हुए उसे भारत में मिला लिया. और इसी तरह तीनो भी भारत के अंग हो गए.

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी - Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi

छह सौ रियासतों का भारत में विलय :
इसी तरह सरदार वल्लभ भाई पटेल जी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए छह सौ छोटी बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराया. भारत में देशी रियासतों का विलय स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी और पहली उपलब्धि थी. और इस उपलब्धि सबसे विशेष योगदान Sardar Patel जी का था. जिन्होंने

लौह पुरुष की उपाधि :
इसी तरह का योगदान जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क ने दिया था. और उन्ही की Vallabhbhai Patel ने भी अपनी सूझ-बुझ से स्वतंत्र भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाया.  गाँधी जी पटेल जी की नीतिगत दृढ़ता के लिए उन्हें  'सरदार' और 'लौह पुरुष' की उपाधि दी. जैसे  "जर्मनी का आयरन चांसलर" कहा जाता है. उसी तरह भारत में  Sardar Vallabhbhai Patel "भारत के लौह पुरुष" कहलाते हैं.
आखिरी सफ़र : सरदार पटेल के ह्रदय में शुरू से ही गाँधी जी के लिए अपार श्रद्धा थी. लेकिन जब गाँधी जी हत्या हुयी तब उन्हें बहुत गहरा आघात पंहुचा क्युकि हत्या के कुछ क्षण पहले उनके पास वे अंतिम व्यक्ति के रूप में थे और जो उनसे निजी वार्ता भी की थी. गाँधी जी हत्या की इस हत्या ने उन्हें हिला कर रख दिया गृह मंत्री होने के नाते अपनी ग़लती को मानते हुए कहा की सुरक्षा में मुझसे बहुत बड़ी चुक हुयी हैं.

निधन : हत्या के सदमे से वो बाहर नहीं आ पा रहे थे अन्दर ही अन्दर घुटते जा रहे थे जिस कारण  गाँधीजी की मृत्यु के दो महीने के भीतर ही मुम्बई में 15 दिसम्बर 1950 को उन्हें हार्ट अटैक आ गया और इसी के साथ हम सब से दूर सदा-सदा के लिए चले गए. 

सम्मान और पुरस्कार : मरणोपरान्त  सन 1991 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया. अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण 'सरदार वल्लभभाई पटेल अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा' रखा गया. गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में 'सरदार पटेल विश्वविद्यालय' की स्थापना. 

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी : सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2013 को  गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी ने नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल का विशाल स्मारक का शिलान्यास किया. और इस स्मारक का नाम "एकता की मूर्ति" (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया. 

दोस्तों अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी - Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi के इस लेख को  लिखने में मुझ से कोई त्रुटी हुयी हो तो छमा कीजियेगा और इसके सुधार के लिए हमारा सहयोग कीजियेगा. आशा करता हु कि आप सभी को  यह लेख पसंद आया होगा. 

धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.


26 अप्रैल का इतिहास - History Of 26 April In Hindi

26 अप्रैल का  इतिहास  / 26 April Aaj Ka Itihaas - History Of 26 April In Hindi

आज जानते हैं  " 26 अप्रैल का इतिहास " के पन्ने को और बीते हुए कल की कुछ प्रमुख घटनाओं को एक नज़र में. क्या हुआ था हमारे बीते हुए कल में Wahh के द्वारा लिखे गए  " 26 अप्रैल Aaj Ka Itihas" नामक कालम के जरिये.

History-Of-26-April-In-Hindi

26 April Day In Indian And World History Important Event

सबसे पहले जानते हैं की आज के दिन क्या खास हुआ देश और विदेश में  26 अप्रैल के इस  इतिहास के पन्ने में.

# =  केप हेनरी में पहले ब्रिटिश नागरिक ने 1607 में  अमेरिकी कालोनी की स्थापना की थी.
# = ब्राजील से  यहूदियों को 1654 में  निकाला गया था. 

# = पहला विश्वविद्यालय 1755 में   रूस के  राजधानी मॉस्को में खोला गया था.
# = यूनान की स्वतंत्रता के र्समथन में 1828 को  रूस ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा  कर दी थी.

# = भारत में समाचार पत्र बाम्बे गजट का प्रकाशन 1841 में प्रारम्भ हुआ.

# =  गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल उच्च न्यायालय में  1903 में अपनी वकालत शुरू की और साथ ही  यहां उन्होंने ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की स्थापना की थी.

# =  प्रथम विश्वयुद्ध में 1915 को  इटली ने लंदन में ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के साथ गुप्त संधि की थी.

# = भारत और इंग्लैंड के बीच 1929 में   पहली बार विमान सेवा  की शुरुआत हुयी.

# = क्यूबा ने 1959 में  पनामा पर आक्रमण  कर दिया था.

# = माल्टा ने 1974 में अपना  संविधान अंगीकार किया.

# =  सिक्किम 1975 में  भारत का  22वां राज्य बना.

# =  पहली बार एक अमरीकी अंतरिक्ष यान ने 1962 में  चाँद की सतह पर अपना कदम रक्खा.  

# =  कलकत्ता में स्थितीय खगोल विद्या केंद्र की स्थापना 1980 में की गयी.

# = वी.आर.पी. मेनन ने  1990 में  लगातार 463 घंटे डिस्को डांस करने का विश्व रिकार्ड बनाया.

# =  ईराक के नये झंडे को 2004 में  मान्यता मिली.

# =  भारत और उज़बेकिस्तान ने  2006 में 6 समझौतों पर  हस्ताक्षर किए.
आईये अब जानते हैं  यहाँ  26 अप्रैल  को जन्मे कुछ खास लोगो के बारे में, और देते हैं उन्हें जन्म दिन की बधाईयाँ. 26 April Famous Birthdays.
# = स्वामी दयानन्द सरस्वती के शिष्य तथा आर्य समाज के पाँच प्रमुख नेताओं में से एक रहे पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी  का जन्म 26 अप्रैल 1864 को हुआ.

# = भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री  मौसमी चटर्जी  का  जन्म 26 अप्रैल 1953 को हुआ.

# = प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, छायाकार और लेखक नितिन बोस का  जन्म 26 अप्रैल 1987 को हुआ.
26 अप्रैल को दुनिया से अलविदा कह रूख़सत हो गए  कुछ प्रमुख हस्तियाँ.  26 April Famous Deaths.
# = आधुनिक काल के एक महान् भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन का  निधन 26 अप्रैल 1920 को हुआ था.
# = जम्मू और कश्मीर के रियासत के आखिरी शासक महाराज हरी सिंह का  निधन 26 अप्रैल 1961 को हुआ था.

# = प्रसिद्ध कवि और आलोचक मलयज का  निधन 26 अप्रैल 1982 को हुआ था.

# = भारतीय प्रसिद्ध संगीतकार शंकर (शंकर जयकिशन) का  निधन 26 अप्रैल 1987 को हुआ था.

# = नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री तथा नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष मनमोहन अधिकारी का  निधन 26 अप्रैल 1999 को हुआ था.

# = राजस्थान की राज्यपाल रही प्रभा राव का  निधन 26 अप्रैल 2010 को हुआ था.
26 अप्रैल के महत्वपूर्ण दिवस. - Important Days of 26 April.
# = विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस

# = चेरनोबिल दिवस


History Of  26 April In Hindi, 26 April Aaj Ka Itihaas, 26  April Itihas,  आज का इतिहास, 26  अप्रैल का इतिहास,  Aaj Ka Itihas, जाने 26  अप्रैल के इतिहास के पन्ने को और प्रमुख घटनाओ को,

Sunday, 22 April 2018

25 अप्रैल का इतिहास / History Of 25 April In Hindi

25 अप्रैल का  इतिहास  / 25 April Aaj Ka Itihaas - History Of 25 April In Hindi

आज जानते हैं  " 25 अप्रैल का इतिहास " के पन्ने को और बीते हुए कल की कुछ प्रमुख घटनाओं को एक नज़र में. क्या हुआ था हमारे बीते हुए कल में Wahh के द्वारा लिखे गए  " 25 अप्रैल Aaj Ka Itihas" नामक कालम के जरिये.

History-Of-25-April-In-Hindi

25 April Day In Indian And World History Important Event

सबसे पहले जानते हैं की आज के दिन क्या खास हुआ देश और विदेश में  25 अप्रैल के इस  इतिहास के पन्ने में.

# =  फ्रांसीसी सेना ने 1678 में  वाइप्रेस शहर पर अपना कब्जा किया.
# =  जापान की राजधानी टोक्यो में 1867 में   विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई  थी.

# =  दक्षिण अफ्रीका के अन्दर 1905 में श्वेतों को अपना  मताधिकार प्रयोग करने की अनुमति मिली. 

# =  पॉल वाेन हिंडनबर्ग जर्मनी के 1925 में  राष्ट्रपति  बने.

# =  बेल लैब्स ने  1954 में  न्यूयार्क में पहली बार सोलर बैटरी बनाने की घोषणा की थी.

# =  सोडियम परमाणु रिएक्टर 1957 में  पहली बार प्रायोगिक तौर  उपयोग किया गया.

# =  तत्कालीन सोवियत रूस ने 1975 में  भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था. 

# = अमरीकी सेना का तेहरान में 1980 को  अमरीकी दूतावास में बंघकों को छुड़ाने की कोशिश असफल हुई.

# = जापान के सुरूगा में 1981 को  एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हो रहे  मरम्मत कार्य के दौरान लगभग  100 से अधिक मजदूर परमाणु विकिरण का शिकार हो गये.

# = दिल्ली में पहली बार 1982 में टेलीविजन पर रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई.

# = जर्मन पत्रिका "स्टर्न" ने 1983 में   हिटलर की विवादास्पद डायरी की पहली किस्त छापी थी.

# =  वेस्टइंडीज के आल राउंडर खिलाड़ी कार्ल हूपर ने 1999 में  अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्न्यास  लेने की  घोषणा की.

# =  जिम्बाव्वे में 2004 को  श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक दिवसीय मैचों में न्यूनतम 35 रनों का रिकार्ड बनाया.


25 अप्रैल का  इतिहास  / 25 April Aaj Ka Itihaas - History Of 25 April In Hindi


# = जापान के अमागासाकी में 2005 को हुए  एक रेल दुर्घटना में लगभग  107 लोगों की मौत हो गई थी.

# =  भारतीय नौसेना ने पुराने हो चुके चेतक हेलीकाप्टरों की जगह 2010 में  नए लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर (एलयूएच) ख़रीदने की प्रक्रिया शुरू की.

# =  रूस के रामेन्स्की में 2013 को एक अस्पताल में लगी भीषण आग से लगभग 38 लोग  मौत हो 
 आईये अब जानते हैं  यहाँ  25 अप्रैल  को जन्मे कुछ खास लोगो के बारे में, और देते हैं उन्हें जन्म दिन की बधाईयाँ. 25 April Famous Birthdays.
# = संयुक्त राष्ट्र के प्रथम महासचिव के चुनाव तक कार्यवाहक महासचिव रहे ग्लेडविन जेब का जन्म 25 अप्रैल 1900 को हुआ.

# = जानेमाने साहित्यकार चन्द्रबली पाण्डेय का जन्म 25 अप्रैल 1904 को हुआ.
# = भारत के प्रसिद्ध फ़ुटबॉल खिलाड़ी आई. एम. विजयन का जन्म 25 अप्रैल 1969 को हुआ.

# = दक्षिण अफ्रीका के टेनिस खिलाड़ी जैफ कोएत्ज़ी का जन्म 25 अप्रैल 1977 को हुआ.
25 अप्रैल को दुनिया से अलविदा कह रूख़सत हो गए  कुछ प्रमुख हस्तियाँ.  25  April Famous Deaths.
# = भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध कथा, पटकथा और कहानी लेखक पण्डित मुखराम शर्मा  का निधन 25 अप्रैल 2000 को हुआ.

# = भारतीय संत स्वामी रंगनाथनंदा का निधन 25 अप्रैल 2005  को हुआ.
25 अप्रैल के महत्वपूर्ण दिवस. - Important Days of 25 April.
# = विश्व मलेरिया दिवस.

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Saturday, 21 April 2018

लाला लाजपत राय की जीवनी - Lala Lajpat Rai Biography In Hindi

लाला लाजपत राय की जीवनी – Lala Lajpat Rai Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं, आजीवन ब्रिटिश राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने वाले, साइमन कमीशन के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान शहीद होने वाले “लाला लाजपत राय की जीवनी” (Lala Lajpat Rai Biography) के बारे में.

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एक झलक Lala Lajpat Rai की जीवनी पर :लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के  फ़रीदकोट जिले में स्थित दुधिके गॉव में 28 जनवरी 1865 को हुआ. यह गाँव इनका  ननिहाल हैं. इनके पिता जी का नामलाला राधाकृष्ण था और माता जी का नाम गुलाब देवी था अपने माता के ये ज्येष्ठ पुत्र थे. और ये बनिया जाति के अग्रवाल थे.
 
इनके पिता जी लाला राधाकृष्ण उर्दू तथा फ़ारसी के अच्छे जानकार थे और पेशे से एक अध्यापक थे. और इन्हें इस्लाम में भी गहरी आस्था थी. जिसके कारण ये नमाज़ भी पढ़ते थे और रमज़ान के महीने में रोज़ा  भी रखते थे. लाजपत राय जी के पिता वैश्य (अग्रवाल) थे, किंतु उनकी माती सिक्ख परिवार से थीं.

शिक्षा :
इनकी प्रारम्भिक शिक्षा पांच वर्ष की आयु से ही शुरू हो गयी थी. और बाद में कलकत्ता तथा पंजाब विश्वविद्यालय से सन 1880 में  एंट्रेंस की परीक्षा एक वर्ष में उत्तीर्ण की उसके बाद आगे की पढाई के लिए लाहौर आ गए और यही उन्होंने गर्वमेंट कॉलेज में दाखिला लिया. सन 1882 में एफ. ए. की परीक्षा तथा मुख़्तारी की परीक्षा साथ-साथ दी और  उत्तीर्ण हुए.


  • इन्हें भी पढ़े :
  • रास बिहारी बोस की जीवनी
  • डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जीवनी
  •  पंडित मदनमोहन मालवीय की जीवनी

  • आर्य समाज के सदस्य :
    पढाई के दौरान ही वे आर्य समाज से काफी प्रभावित थे जिसके कारण उन्होंनेआर्य समाज की सदस्यता ली और सन 1882 के दौरान पहली बार आर्य समाज के लाहौर के वार्षिक उत्सव में सम्मिलित हुए.

    डी.ए.वी. कॉलेज की स्थापना :
    जब अजमेर में स्वामी दयानन्द का देहान्त 30 अक्टूबर, 1883 को हुआ तब उसके बाद 9 नवम्बर, 1883 को स्वामी दयानन्द के लिए एक शोक सभा का आयोजन किया गया लाहौर में आर्य समाज की ओर से और इस सभा के अंत में स्वामी जी की स्मृति में एक ऐसे महाविद्यालय की स्थापना का संकल्प लिया गया जिसमें वैदिक साहित्य, संस्कृति तथा हिन्दी की उच्च शिक्षा के साथ-साथ अंग्रेज़ी और पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान में भी छात्रों को शिक्षा में दक्षता प्राप्त कराई जाये. 

    इसी के साथ आर्य समाज के अन्य नेताओं के साथ लाला लाजपत राय के संचालन में सन 1886 में शिक्षण संस्थान "दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज" की स्थापना हुई.

    वकालत का कार्य  :
    मुख़्तारी की परीक्षा पास करने के बाद मुख़्तार (छोटा वकील) के रूप में अपने मूल निवास स्थल जगराँव में ही वकालत का कार्य शरू कर दिया. लेकिन छोटा क़स्बा होने के कारण अधिक काम आने की सम्भावना नहीं थी. 

    जिस कारण वो रोहतक चले गये और वही रह कर उन्होंने  सन 1885 में वकालत की परीक्षा को उत्तीर्ण किया. और उसके बाद एक सफल वकील बन कर  सन 1886 में वे हिसार चले आये. और उसके बाद उन्होंने वही रह कर सन 1892 तक वकालत की. और फिर सन 1886 में लाहौर चले आये उसी के बाद से लाहौर ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियों का केन्द्र बन गया.

    आदर्श :
    लाजपत राय जी ने जब एक पुस्तक में मेत्सिनी के लिखे भाषण पढ़ा तब वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मेत्सिनी की जीवनी पढ़नी चाही लेकिन मेत्सिनी की पुस्तक भारत में नहीं मिली तब उन्होंने इस पुस्तक को इंग्लैण्ड से मंगवाया और इसे पढ़ा और इसे पढ़ कर उन्होंने अपने जीवन में  ज्यूसेपे मेत्सिनी को आदर्श के रूप में उन्हें मानने लगे थे.

    लाजपत राय जी ने ज्यूसेपे मेत्सिनी की लिखी पुस्तक ‘ड्यूटीज ऑफ़ मैन’ का उर्दू में अनुवाद किया और फिर उसको पढ़ने के लिए लाहौर के एक पत्रकार को दिया लेकिन उस पत्रकार ने इसमे थोडा सा संशोधन करके अपने नाम से प्रकाशित करवा दी.

    कांग्रेस की सदस्यता :
    जब वे हिसार में वकालत कर रहे थे तब ही उन्होंने  कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी. और  कांग्रेस की की बैठकों में जाया करते थे. और इसी के साथ वो धीरे-धीरे के कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ताओं में उनका भी नाम हो गया.

    नगर निगम सदस्य :
    उनके हृदय में देश के प्रति  राष्ट्रीय भावना भी बचपन से ही थी. लाला जी  लोकमान्य तिलक तथा विपिनचन्द्र पाल के साथ मिलकर कांग्रेस कांग्रेस में शामिल हुए. मात्र 23 वर्ष की आयु में सन 1888 में कांग्रेस के 'प्रयाग सम्मेलन' में शामिल हुए थे. कांग्रेस द्वारा आयोजित "लाहौर अधिवेशन" को सफल बनाने के लिए लालाजी ने जी जान से प्रयास किया और "लाहौर अधिवेशन" को सफल बनाया. और उसके बाद "हिसार नगर निगम" सदस्य बने और बाद में उनको सचिव भी बनाया गया.

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  • ब्रिटिश युवराज का आगमन :
     जब भारत में ब्रिटिश युवराज के आगमन पर एक समारोह के दौरान उनका स्वागत करना था और इसका प्रस्ताव आया तो लालाजी ने इसका  विरोध किया और कांग्रेस के मंच से सभी को संबोधित करते हुए तेजस्वी भाषण दिया जिसमें देश की अस्मिता प्रकट हुई थी.

    किसानों का अधिकार :
    पंजाब के किसानों को अपने अधिकार को लेकर उन्हें जागरूक किया और सन 1907 में जब किसान अपने हकों को लेकर जागरूक होने लगे तब अंग्रेजी सरकार लालाजी तथा सरदार अजीतसिंह पर कोर्धित हुए और सरकार ने उन दोनों देशभक्त नेताओं देश से निकल दिया और उन्हें पड़ोसी देश बर्मा के मांडले नगर में नज़रबंद कर दिया. 
    लेकिन देश की जनता सरकार के इस दमनपूर्ण काम का जबरजस्त विरोध किया जिसके कारण   लालाजी तथा सरदार अजीतसिंह को वापस देश में लाया गया. भारत की जनता ने दोनों देशभक्तों का जोरदार स्वागत किया.

    देशव्यापी अकाल :
    देश में सन 1897 और सन 1899 के बीच जबरजस्त  देशव्यापी अकाल पड़ गया. जिससे कारण हर तरफ भुखमरी, बीमारी का साम्राज्य फ़ैलाने लगा. इस देशव्यापी अकाल में लाजपत राय पीड़ितों की सेवा में जी जान से जुटे रहे. राहत कार्यों में सबसे आगे आगे रहते इसी के दूसरी तरफ ब्रिटिश सरकार देश में आये भूकंप और अकाल में देशवासियों की सहायता की जगह आराम से बैठे रहे.

    बंगाल विभाजन का विरोध :
    अंग्रेजो ने  देश को बाटने का षड्यंत्र रचा और  सन 1905 में बंगाल का विभाजन कर दिया. इस बटवारे को लेकर लालाजी ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी और विपिनचंद्र पाल जैसे आंदोलनकारियों के साथ मिल कर ब्रिटिश सरकार के तानाशाही फैसले का खुलकर विरोध किया.

    रावलपिंडी में गिरफ़्तार :
    अंग्रेजों के विरुद्ध देश की आज़ादी के लिए लगातार संघर्ष करते रहे और एक दिन  3 मई, 1907 को लालाजी को रावलपिंडी से अंग्रेज़ों ने गिरफ्तार कर लिया.

    इंग्लैंड गए : भारत की स्थिति में सुधार लाने के उदेश्य से लालाजी कई बार इंग्लैंड का दौरा किया अंग्रेज़ों से विचार-विमर्श किया देश की स्थिति से उन सभी को अवगत कराया.

    जब कई देश प्रथम विश्वयुद्ध की आग में जल रहा था तब सन 1914 से लेकर सन 1918 के दौरान पुनः एक प्रतिनिधि मण्डल के सदस्य के रूप में इंग्लैंड गये और वहा जा कर भारत की स्वतंत्रता को लेकर लोगो के बीच प्रबल जनमत जागृत किया.

    इण्डियन होमरूल लीग की स्थापना :
    इंग्लैंड के बाद वो जापान गए फिर  यही से होते हुए अमरीका पहुंचे जहा  स्वाधीनता-प्रेमी  अमरीकावासियों के समक्ष भारत की स्वाधीनता के पक्ष में आपनी बातो को प्रबलता से रखा और वही पर  "इण्डियन होमरूल लीग" नाम से एक संगठन का स्थापना किये.

    तरुण भारत का लेखन :
    और इसी दौरान उन्होंने  कुछ किताबे भी लिखी. और उसके बाद "तरुण भारत" के नाम से एक पुस्तक लिखी यह पुस्तक देशप्रेम तथा नवजागृति पर आधारित थी जिसके कारण ब्रिटिश हुकूमत ने इस किताब पर प्रतिबन्ध लगा दिया.

    मासिक पत्र : 
    लेकिन हार ना मानने वाले लाला लाजपत राय जी ने मासिक पत्र निकाला "यंग इंण्डिया" के नाम से और इसी बीच उन्होंने कई पुस्तके लिखी. दुसरे देश में रहते हुए भी देशहित के लिए काम करते रहे. वहा रहते हुए जागरूकता और स्वतंत्रता के उदेश्य को लेकर .उन्होंने दो संस्थाएं चलायी सक्रीय रूप से "इंडियन इन्फ़ॉर्मेशन" और "इंडियन होमरूल" के नाम से.

    जलियाँवाला बाग़ :
    जब लाला लाजपत राय वापस 20 फ़रवरी, 1920 को भारत वापसी हुयी तब अमृतसर में ' जलियांवाला बाग़ काण्ड   हो चूका था उन्होंने देखा पंजाब ही पूरा देश राजनैतिक रूप से जल रहा था. यह घटना देशवासियों के सीने में अंग्रेजो के खिलाफ़ ज्वाला बन कर सुलग रही थी .

    असहयोग आन्दोलन :
    स्वराज की माँग को लेकर गांधी जी ने 1 अगस्त, 1920 को असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की और इस आन्दोलन में लालाजी ने भी भाग लिया. और सक्रीय रूप  से इसमे अपना भरपूर योगदान दिया. उन्होंने पंजाब में सन 1920 में असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व किया, और इसी कारण एक बार फिर से सन 1921 में  गिरफ्तार हुए और उन्हें कारावास की सजा सुनाई गयी.

    पंजाब केसरी की उपाधि :
    "लोक सेवक संघ" के नाम से लालाजी ने एक संगठन की स्थापना की और इसमे लोगो को जोड़ा और अपने अन्य आन्दोलनों  में गति दी जिसके कारण वो पंजाब के लोगो के बीच और प्रसिद्ध हो गए उन्हें लोग "पंजाब का शेर" और "पंजाब केसरी" के नाम से पुकारने लगी 

    साइमन कमीशन :

    1927 जब "साइमन कमीशन" का गठन हुआ तब इस आयोग का तीव्र विरोध किया गया. और यह विरोध जंगल में लगी आग की तरह फ़ैलने लगी लोगो के बीच. जगह जगह पर अंग्रेजों के खिलाफ़ धरने प्रदर्शन होने लगे

    आखिरी सफ़र :
     इसी दौरान लाहौर में 30 अक्टूबर, 1928 को  साइमन कमीशन के विरोध में  लाला लाजपत राय के नेतृत्व में लोगो ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया इस प्रदर्शन से क्रोधित अंग्रेजो ने बेरहमी के साथ भीड़ पर लाठियां चलानी शुरू कर दी और लोगो को पीटना शुरू कर दिया. चारो तरफ बस अंग्रेजों की लाठियाँ ही लाठियाँ नज़र आने लगी और इसी लाठी चार्ज में लाजपत राय की छाती पर बेहरमी के साथ लाठियों से वार किया गया जिसके कारण लालाजी बुरी तरह से घायल हो गए

    निधन : और इसके बाद उन्हें अस्पताल में भारती कराया गया और तब लालाजी ने अपना अंतिम भाषण दिया कि.
    मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक चोट ब्रिटिश साम्राज्य के क़फन की कील बनेगी
    17वें दिन अस्पताल में इजाज के दौरान 17 नवम्बर, 1928 को उनका निधन हो गया और इसी के साथ देश के लाल पंजाब केशरी ने अपनी आंखे सदा सदा के लिए मूँद ली. और देश के लिए शहीद हो गए.
    श्रद्धांजलि : लाला जी को महात्मा गाँधी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा  कि
    "भारत के आकाश पर जब तक सूर्य का प्रकाश रहेगा, लालाजी जैसे व्यक्तियों की मृत्यु नहीं होगी. वे "अमर रहेंगे."

    बदला :
    लाला लाजपत राय जी की मौत के  ज़िम्मेदार अंग्रेज़ अफ़सर को मौत के घाट उतारने का संकल्प चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और राज गुरु ने लिया. और उसी की बाद लाला लाजपत राय जी निधन के लिए ज़िम्मेदार अंग्रेज़ अफ़सर स्कॉट को मौत के घाट उतारने के लिए एक योजना बनायीं गयी.

    चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और राज गुरु ने मिलकर जे. पी. सांडर्स सहित एक अन्य अंग्रेज़ अफ़सर को भी मारा डाला. जिसने स्कॉट के कहने पर लाला लाजपत राय पर लाठियाँ चलायी थीं.

    दोस्तों अगर लाला लाजपत राय की जीवनी – Lala Lajpat Rai Biography In Hindi के इस लेख को  लिखने में मुझ से कोई त्रुटी हुयी हो तो छमा कीजियेगा और इसके सुधार के लिए हमारा सहयोग कीजियेगा. आशा करता हु कि आप सभी को  यह लेख पसंद आया होगा. 

    धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.