Thursday, 26 April 2018

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं,  विलेन के किरदार से शुरू किया फ़िल्मी कैरियर और बाद में एक सफल  स्टार बने विनोद खन्ना  का जीवन परिचय” ( Vinod Khanna Biography In Hindi) के बारे में. जो आज हमारे बीच नहीं रहे. 

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जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकराएगी

तो देर कैसी आईये जानते हैं फिल्म अभिनेता, सफल राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना की बायोग्राफी के बारे में. और उससे पहले गुनगुनाते हैं इन पर फिल्माया गए एक प्यारे से नगमे को.
जब कोई बात बिगड़ जाये जब कोई मुश्किल पड जाये तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवाज़.
एक झलक विनोद खन्ना की जीवनी पर :
फ़िल्मी दुनिया का जाने माने अभिनेता विनोद खन्ना का जन्म पेशावर में 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था. इनके पिता जी का नाम किशनचंद खन्ना था और माता जी का नाम कमला था. इनके पिता का बिज़नस टेक्सटाइल का था.



भारत की आज़ादी के बाद भारत पाक के हुए बटवारे के बाद पेशावर से इनका परिवार मुंबई आ गया.

शिक्षा:
अपनी प्रारंभिक शिक्षा नासिक के एक बोर्डिग स्कूल से ली और उसके बाद स्नातक की शिक्षा  सिद्धेहम कॉलेज से पूरी की. बचपन से ही विनोद खन्ना  शर्मीले स्वभाव के थे.  

एक्टिंग का सौख इन्हें तब लगा जब एक बार पढाई के दौरान टीचर ने जबरदस्ती स्टेज पर एक कार्यक्रम  के दौरान उनसे अभिनय कराया और इसी अभिनय के बाद Vinod Khanna को एक्टिंग का चस्का लग गया. और अभिनय के प्रति इनका रुझान दिन प्रति  दिन बढ़ता गया.

फिर एक दिन एक्टर बनने की बात अपने परिवार में बताई लेकिन यह बात सुन कर इनके पिता ने नाराजगी जाहिर की क्युकि विनोद खन्ना के पिता नहीं चाहते थे की उनका बेटा फिल्मो में काम करे.

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

लेकिन माँ का दिल तो हमेशा अपने बेटे के साथ होता हैं बेटे की जिद्द और सोंख के कारन आखिरकार माँ ने किशनचंद खन्ना को मना ही लिया लेकिन उन्होंने हां तो की लेकिन एक शर्त रख दी कि फिल्मो में अगर दो साल में सफल हो गए तो ठीक हैं, वरना वापस अपने  बिज़नस को अच्छे से संभालना होगा. पिता की यह शर्त मान ली.

फ़िल्मी सफ़र:
अपने पहले फ़िल्मी की शुरुआत 1968 में सुनील दत्त की आई फिल्म "मन का मीत" से की और इस फिल्म में विलेन का रोल निभाया. और इसी के साथ इनके अभिनय की चारो तरफ सराहना होने लगी और साथ ही इन्हें कई फिल्मो का ऑफर भी मिल गया और इन्होने एक साथ 15 फ़िल्में साइन कर ली.  जिसमे पूरब और पश्चिम, आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश जैसी  सुपरहिट फिल्में शामिल थीं. 

खलनायक से नायक का सफ़र:
फिर इन्होने सन 1971 में फिल्म "हम तुम" और "वो" में बतौर सोलो हीरो बन के काम किया.

फिर सन 1973 में गुलज़ार जी की फिल्म "मेरे अपने" में अभिनय किया और यह फिल्म भी कामयाब हुई. और फिर इनकी फिल्म "अचानक" आई और इस फिल्म में विनोद खन्ना ने एक मौत की सजा पाए आर्मी अफसर का रोल निभाया था जिसकी तारीफ दर्शकों ने बहुत की,  इसी के साथ वो बन गए एक कामयाब हीरो. 

अमिताभ बच्चन के साथ:
सन 1977 में अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया फिल्म "परवरिश" में और यह सुपरहिट फिल्म साबित हुई. कई फिल्मे अमिताभ बच्चन के साथ के साथ की अमर अकबर एंथनी, खूनपसीना, हेराफेरी और "रेशमा और शेरा" जैसी फिल्मे साथ साथ की.


विवाह:
विनोद खन्ना ने अपनी दो शादियाँ की थी. जिससे उन्हें तीन बेटे और एक बेटी हुई.

पहली शादी  1971 में अपने कॉलेज की दोस्त गीतांजलि से की जो एक मॉडल थी. लेकिन किन्ही कारणों उनका आपस में 1985 को  तलाक हो गया. फिर विनोद खन्ना ने अपनी दूसरी शादी 1990 में कविता से की .



राजनीतिज्ञ सफ़र:
सन 1998 में पहली बार विनोद खन्ना ने राजनीति जीवन में कदम रखा. और उसी साल 12वीं लोकसभा का चुनाव होने वाला था तब इन्होने पहली बार भारतीय जनता पार्टी टिकट पर पंजाब के गुरदासपुर से चुनाव लड़ा और विजयी रहे और संसद में पहुंचे. लगातार 1999 और 2004 में भी इसी सीट से चुनाव को जीता. 


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अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में केंद्र की बीजेपी सरकार में विनोद खन्ना पर्यटन एवं संस्‍कृति राज्‍यमंत्री बने और 2003 व 2004 में विदेश राज्‍यमंत्री का भी पद संभाला.

चौथी बार 2014 में फिर उन्‍होंने बीजेपी के टिकट पर गुरदासपुर से चुनाव में फिर जीत हासिल की और 16वीं लोकसभा के सदस्‍य बने.

संसद में इनको कई कमेटियों का सदस्य भी बनया गया था. रक्षा मामलों पर गठित स्‍टैंडिग कमेटी में  1 सितंबर, 2014 में सदस्‍य रहे, और इसके अलावा कृषि मंत्रालय की परामर्श कमेटी में भी सदस्‍य रहे.

आधात्य्म की ओर:
इसी दौरान उनका ह्रदय आधात्य्म की ओर खीचने लगा तब धार्मिक गुरु ओशो रजनीश के करीब आये और शोहरत और दौलत की इस दुनिया से दूर धर्म की राह पर चलने लगे धार्मिक गुरु ओशो रजनीश के मार्ग दर्शन में.

लेकिन यह सिलसिला ज्यादा दिनों तक नहीं चला धीरे धीरे कर के रजनीश से उनका मोह भंग हो गया और 5 वर्ष तक साथ रहने के बाद वापस अपने उसी राह पर लौट आये. अपने बॉलीवुड जगत में जहा उनका स्वागत बड़े ही गर्मजोशी के साथ हुआ. 

फिल्मों में वापसी:
और इसी के साथ मुकुल आनंद द्वारा बनायीं जाने वाली फिल्म इन्साफ का ऑफर इन्हें मिला और इस फिल्म में  Vinod Khanna ने जोरदार भूमिका अदा की और यह फिल्म पूरी तरह से रुपहले परदे पर हिट साबित हुयी. 


यादगार फ़िल्में:
  • मेरे अपने
  • मेरा गांव मेरा देश
  • कुर्बानी
  • मुकद्दर का सिकंदर
  • अमर अकबर एंथनी
  • पूरब और पश्चिम
  • रेशमा और शेरा
  • हाथ की सफाई
  • हेरा फेरी
  • दयावान
  • क्षत्रिय
  • बटवारा
  • सत्यमेव जयते
  • द बर्निंग ट्रेन
  • नेहले पे देहला
  • कुँवारा बाप, आदि 
सम्मान और पुरस्कार:
1999 में उनको फिल्मों में उनके 30 वर्ष से भी ज्यादा समय के योगदान के लिए फिल्मफेयर के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित भी किया गया. 140 से भी अधिक फिल्‍मों में विविध किरदार निभाने वाले विनोद खन्‍ना को सबसे पहले 1974 में 'हाथ की सफाई' फिल्‍म के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला. उसी साल उनको नेशनल यूथ फिल्‍म अवार्ड भी मिला. दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2017)



आखिरी सफ़र:
70 वर्षीय विनोद खन्ना  कैंसर से पीड़ित थे. और इसी कारण उनकी सेहत दिन प्रति दिन गिरती चली जा रही थी, आखिरी समय इन्हें मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भारती कराया गया लेकिन कैंसर से जूझ रहे और इसी के साथ 27 अप्रैल 2017 को  Vinod Khanna का  निधन हो गया. इनकी उम्र 70 साल की थी.


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आखिरी फिल्म:

फिल्म "एक थी रानी ऐसी भी" इनकी आखिरी फिल्म रही जो 21 अप्रैल 2017 को पर्दे पर आई और इस फिल्म की  कहानी मध्यप्रदेश की दिवंगत नेता विजयाराजे सिंधिया की जीवनी पर आधारित थी.

दोस्तों अगर विनोद खन्ना  की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi के इस लेख को  लिखने में मुझ से कोई त्रुटी हुयी हो तो छमा कीजियेगा और इसके सुधार के लिए हमारा सहयोग कीजियेगा. आशा करता हु कि आप सभी को  यह लेख पसंद आया होगा. 



धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.


29 अप्रैल का इतिहास / 29 April Aaj Ka Itihaas - History Of 29 April In Hindi

29 अप्रैल का  इतिहास  / 29 April Aaj Ka Itihaas - History Of 29 April In Hindi

आज जानते हैं  " 29 अप्रैल का इतिहास " के पन्ने को और बीते हुए कल की कुछ प्रमुख घटनाओं को एक नज़र में. क्या हुआ था हमारे बीते हुए कल में Wahh के द्वारा लिखे गए  " 29 अप्रैल Aaj Ka Itihas" नामक कालम के जरिये. 

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29 April Day In Indian And World History Important Event 
सबसे पहले जानते हैं की आज के दिन क्या खास हुआ देश और विदेश में  29 अप्रैल के इस  इतिहास के पन्ने में.

# = चीन के मिंग वंश ने 1661 में  ताइवान पर अपना कब्जा किया था.

# =  दिल्ली में लालकिले की नींव 1639 में  रखी गई थी.

# = अमेरिका में जेएफ हम्मेल ने 1813 को  रबर का पेटेंट कराया था.

# = कनाडा के उत्तर-पश्चिम प्रदेश में  1903 में  हुए भूस्खलन से लगभग 70 लोगों की मौत हुयी .
# =  ब्रिटेन और आॅस्ट्रेलिया के बीच 1930 में  टेलीफोन की सेवा  की शुरुआत हुयी.

# =  नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 1939 में  कांग्रेस से अपना  इस्तीफा दे दिया था.

# = जापान की सेना ने 1945 में रंगून छोड़ा.

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# = पाकिस्तान के अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग ने 1965 में  अपने सातवें रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया था.

# = अफगानिस्तान के विद्रोही गुट ने 1978 में सत्ता हासिल की.

# = इंटरनेशनल डांस डे की शुरुआत 1982 में में हुयी थी.

# =  बंगलादेश के चटगांव में आए 1991 में  एक चक्रवाती तूफान में एक लाख 38 हजार लोग मारे गए और दस लाख लोग बेघर हो गए.

# = अमेरिका के लॉस एंजिल्स में 1992 में  दंगे भड़के थे.

# =  पहली बार बकिंघम पैलेस को 1993 में आम लोगो के लिए खोला गया और जिसे देखने के लिए आठ पाउंड का टिकट भी लगया गया.

# = रासायनिक हथियारों पर 1997 में  प्रतिबंध  लगाया गया.

# = बच्चों के यौन शोषण पर 1999 में  रोक संबंधी विधेयक जापानी संसद में मंजूरी मिली. 

# = सीरिया की अंतिम फौजी टुकड़ी 2005 में  लेबनान से रवाना हुई.

# =  पाकिस्तान ने 2006 में  हत्फ़-6 का परीक्षण किया.

# = आस्ट्रेलिया ने 2007 में  लगातार तीसरी बार क्रिकेट विश्वकप को जीता.
  आईये अब जानते हैं  यहाँ  29 अप्रैल  को जन्मे कुछ खास लोगो के बारे में, और देते हैं उन्हें जन्म दिन की बधाईयाँ. 29 April Famous Birthdays.
# = मेवाड़ के महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार भामाशाह का जन्म 29 अप्रैल 1547 को हुआ.

# = सुप्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा का जन्म 29 अप्रैल 1848 को हुआ.
# = सुविख्यात तबला वादक, भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल और संगीत वादकों में से एक अल्ला रक्खा ख़ाँ  का जन्म 29 अप्रैल 1919  को हुआ.

# = भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक ज़ुबिन मेहता का जन्म 29 अप्रैल 1936 को हुआ.

# = प्रसिद्ध राजनेता - ई. अहमद का जन्म 29 अप्रैल 1938 को हुआ.

# = भारतीय इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा का जन्म 29 अप्रैल 1958 को हुआ.

# = भारतीय क्रिकेटर आशीष नेहरा का जन्म 29 अप्रैल 1979 को हुआ.
29 अप्रैल को दुनिया से अलविदा कह रूख़सत हो गए  कुछ प्रमुख हस्तियाँ.  29 April Famous Deaths.
# = दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश के एक प्रमुख शासक इल्तुतमिश का निधन 29 अप्रैल 1236  को हुआ था.

# = उड़ीसा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा गाँधीवादी कार्यकर्ता गोपबन्धु चौधरी का निधन 29 अप्रैल 1958  को हुआ था.

# = हिन्दी जगत् के कवि, गद्यकार और अद्वितीय वक्ता बालकृष्ण शर्मा नवीन का निधन 29 अप्रैल 1960 को हुआ था.

# = भारत के सच्चे देशभक्त, क्रान्तिकारी, पत्रकार और समाज सुधारक राजा महेन्द्र प्रताप का निधन 29 अप्रैल 1979 को हुआ था.

# = भारतीय रिज़र्व बैंक के सत्रहवें गवर्नर आर. एन. मल्होत्रा का निधन 29 अप्रैल 1997 को हुआ था.

# = भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और हिंदी फ़िल्मों के गीतकार केदार शर्मा का निधन 29 अप्रैल 1999 को हुआ था.

# = गायत्री मण्डल की संस्थापक सदस्या एवं समाज सेविका कमलादेवी शुक्ला का निधन 29 अप्रैल 2010 को हुआ था.
29 अप्रैल के महत्वपूर्ण दिवस. - Important Days of 29 April.
# = अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस

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Wednesday, 25 April 2018

राजेश खन्ना की जीवनी - Rajesh Khanna Biography In Hindi

सुपरस्टार राजेश खन्ना की जीवनी - Rajesh Khanna Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं,  23 साल की उम्र में पहली फिल्म "आखिरी खत" से फिल्मी  कैरियर की शुरुआत करने वाले सुपरस्टार “राजेश खन्ना की जीवनी” (Rajesh Khanna Biography In Hindi) के बारे में. जो आज हमारे बीच नहीं रहे. 


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तो देर कैसी आईये जानते हैं सुपरस्टार राजेश खन्ना की बायोग्राफी के बारे में. और उससे पहले गुनगुनाते हैं इन पर फिल्माया गए एक प्यारे से नगमे को.
कोरा कागज़ था ये मन मेरा लिख लिया नाम इस पे तेरा सूना आँगन था जीवन मेरा बस गया प्यार इस में तेरा 

एक झलक सुपर स्टार राजेश खन्ना की जीवनी पर :
जतिन खन्ना (राजेश खन्ना) का जन्म  29 दिसम्बर 1942 में हुआ था.  जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तब जतिन खन्ना का परिवार  अमृतसर आ गए और यही बस गए.



जतिन खन्ना (Rajesh Khanna) के पिता गरीब थे  जिसके कारण जतिन जी के पालन पोषण करने में दिक्कत आ रही थी तब उनके ही परिवार के चाचा चुन्नी लाल ने जतिन खन्ना को गोद ले लिया.  

लीलावती चुन्नीलाल खन्ना ने जतिन खन्ना का बहुत ही अच्छे से पालन पोषण किया किया. बाद में अंकल के कहने पर जतिन खन्ना से राजेश खन्ना नाम रख लिया और इसी नाम से पहचान बनी फ़िल्मी इतिहास में.

शिक्षा :
अपनी प्राथमिक शिक्षा सेंट सेबेस्टियन्स गोन हाई स्कूल से की और पढाई के ही दौरान इनकी दोस्ती  रवि कपूर से हुयी जिन्हें सदाबहार जितेन्द्र के नाम से जानते हैं. दोनों ने साथ ही पढाई की.
अभिनय में रूचि:
राजेश खन्ना को अभिनय में शुरू से ही रूचि रही जिसके कारण स्कूल में ही बने थिएटर में अभिनय को सिखना शुरू किया और इसी के साथ उसमे अभिनय करने लगे.

कॉलेज के दिनों में नाटक प्रतियोगिता में भी भाग लेते थे और इन्होने कई पुरस्कार जीते.

स्पोर्टस कार में सफ़र: 
थिएटर और फिल्मों में काम पाने लिए उन्होंने काफी संघर्ष किये.  निर्माताओं के दफ्तरों के चक्कर लगते थे. लेकिन इनकी शानो शौकत में कोई कमी नहीं थी हमेशा स्पोर्टस कार में ही सफ़र करते थे और जाते थे. उस समय इतनी महँगी गाड़ी से काम की तलाश करना एक बहुत बड़ी बात थी. उस दौर के चर्चित हीरो के पास इस तरह की कार नहीं होती थी.

कैरियर की शुरुआत:
वर्ष 1966 में Rajesh Khanna ने अपने 23 साल की उम्र में पहली फिल्म "आखिरी खत" से फिल्मी  कैरियर की शुरुआत की. 

उसी के बाद जीपी सिप्पी ने अपनी फिल्म "राज" में साइन किया और इस फिल्म में अदाकारा की भूमिका निभा रही थी उस दौरान की बड़ी स्टार बबीता. और इसी के साथ Rajesh Khanna तीन कामयाब फिल्मो में काम किया.

आराधना:
1969 में आई फिल्म आराधना ने असली पहचान दिलाई राजेश खन्ना को  और "प्लेटिनम जयंती" मना-कर सुपरहिट फ़िल्म साबित हुयी और रातो रातो स्टार बना दिया और इसी के साथ फ़िल्मी जगत के सुपरस्टार का खिताब भी उन्हें मिल गया.



सुपरहिट फ़िल्में :
वर्ष 1969 से लेकर वर्ष 1972 तक में 15 सुपरहिट फ़िल्में बनायीं और कामयाबी के शिखर पर रहे. 


आराधना, इत्त्फ़ाक़, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, खामोशी, कटी पतंग, आन मिलो सजना, ट्रैन, आनन्द, सच्चा झूठा, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी.

राजेश खन्ना और मुमताज़ की जोड़ी:
मुमताज़ के साथ Rajesh Khanna ने आठ फ़िल्मों में साथ साथ काम किया और सभी फिल्म हिट रही . दोनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती रही उस दौरान. काम करते वक्त दोनों में अच्छा तालमेल रहता था. 

डिम्पल से शादी:
राजेश खन्ना अंजू महेंद्रू से अपनी शादी करना चाहते थे. जो उनके साथ लगभग 7 वर्षों तक रही लेकिन अंजू महेंद्रू ने उनसे शादी नहीं की तब राजेश खन्ना ने अपनी शादी डिंपल कपाड़िया से कर ली. 



डबल रोल:
Rajesh Khanna ने अपने फ़िल्मी कैरियर में 12 फिल्म ऐसी बनायीं जिसमे उनकी भूमिका दोहरी (डबल रोल) थी. 

  1. राज़
  2. आराधना
  3. धर्म और कानून, 
  4. कुदरत, 
  5. सच्चा झूठा, 
  6. हमशक्ल, 
  7. हम दोनों, 
  8. ऊँचे लोग, 
  9. महबूबा, 
  10. भोला भाला, 
  11. दर्द, 
  12. महा चोर.   

 काका: 
 राजेश खन्ना को पूरी फिल्म इंडस्ट्री बहुत प्यार मिलता था. और लोग इन्हें प्यार से "काका" कह कर बुलाते थे. और उसी दौरान एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध हो गयी थी "ऊपर आका और नीचे काका" की.

पुरस्कार:
  • 1971 में, फिल्म सच्चा झूठा के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म अनुराग के लिए फिल्मफेयर विशेष अतिथि अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1975 में,फिल्म अविष्कार के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1991 में, भारतीय फिल्म उद्योग में 25 वर्ष पूरे होने के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2005 में, फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (स्वर्ण जयंती समारोह) से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म बावर्ची में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1974 में, फिल्म नमक हराम में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1987 में, फिल्म अमृत में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 2005 में, प्राइड ऑफ फिल्म इंडस्ट्री अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2009 में, आईआईएफए (आईफा) लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
  • 2009 में, ऑल इंडिया फिल्म वर्कर्स एसोसिएशन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2013 में, पद्म भूषण पुरुस्कार(मरणोपरांत)


अंतिम समय:
राजेश खन्ना का स्वास्थ्य 2011 से लगातार और ख़राब  रहने लगा था उन्हें कैंसर की बीमारी थी. 23 जून  2012 में उनकी सेहत और बिगड़ने लगी तब उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया और वह इलाज के बाद 8 जुलाई को छुट्टी मिल गयी लेकिन फिर 14 जुलाई को उनकी तबियत बिगड़ने तब फिर से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया.



उसके बाद 18 जुलाई 2012 को थोडा आराम मिला तो वापस अपने घर आ गए लेकिन 18 जुलाई 2012 को अपने बंगले पर ही राजेश खन्ना का निधन हो गया. 

अंतिम संस्कार:
जैसे ही  इनके निधन की खबर मीडिया के द्वारा लोगो को हुयी तब राजेश खन्ना के प्रशंसकों की भारी भीड़ बान्द्रा स्थित आशीर्वाद बँगले पर जुटनी शुरू हो गयी उनके अंतिम दर्शन के लिए.   

और इनका अंतिम संस्कार विले पार्ले के पवन हंस शवदाह गृह में  19 जुलाई को 11:10 बजे हुआ. जिसमे 10 लाख से भी ज्यादा लोग रहे. जिसमे उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी रिंकी खन्ना और दामाद अक्षय कुमार, फ़िल्म अभिनेता निर्देशक मनोज कुमार, फ़िल्मस्टार अमिताभ बच्चन तथा उनके पुत्र अभिषेक बच्चन सहित कई फ़िल्मी और हस्तियाँ रही.

मुखाग्नि:
राजेश खन्ना की चिता को दामाद अक्षय कुमार के नौ वर्षीय पुत्र आरव ने दी.  


दोस्तों अगर राजेश खन्ना की जीवनी - Rajesh Khanna Biography In Hindi के इस लेख को  लिखने में मुझ से कोई त्रुटी हुयी हो तो छमा कीजियेगा और इसके सुधार के लिए हमारा सहयोग कीजियेगा. आशा करता हु कि आप सभी को  यह लेख पसंद आया होगा. 


धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.