51+ गुनाह शायरी 2 लाइन - Gunaah Status


दोस्तों फेसबुक शायरी के इस Post की Topic  "Gunaah Shayari"  हैं. इसमें आप पढ़ सकते हैं गुनाह शायरी 2 लाइन, गुनाह शायरी in Urdu, Gunaah Status, गुनाह शायरी 4 लाइन, पर बनी बेजोड़ शानदार गुनाह शेर-ओ-शायरी को, मित्रो आशा करता हूँ कि यह पोस्ट आप सभी शायरी के चाहने वालो को बेहद पसंद आएगी.-

Gunaah-Shayari
51+ गुनाह  शायरी

 दोस्तों अब पढ़ते हैं  गुनाह, गुनाहो, गुनाहगार,  पर बनी बेहतरीन शायरी के इस कलेक्शन को  और शेयर करते हैं अपने दोस्तों को. 


1
कर दे मेरे गुनाहों को माफ़ ए ख़ुदा
सुना है सोने के बाद, कुछ लोगों की सुबह नही होती

Kar De Mere Ghunahon Ko Maf Ae Khuda,
Suna Hai Sone Ke Bad Kuch Logon Ki Subha Nahi Hoti

2
अगर तेरे बिना जीना आसान होता तो
कसम मुहब्बत की तुझे याद करना भी गुनाह समझते

3
खुदगर्जो की बस्ती में एहसान भी गुनाह है
जिसे तैरना सिखाओ वही डुबाने को तैयार रहता है

4
मुद्दते हो गयी, गुनाह करते करते
शर्म आती है अब,  दुआ करते हुए

5
तेरी रहमत भी मोहताज़ है मेरे गुनाहों की
मेरे बिना तू भी  खुदा हो नहीं सकता

6
कोई समझे तो एक बात कहूँ 
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं 
फ़िराक़ गोरखपुरी

Koi Samjhe To Ek Baat Kahu
Ishk Taufiq Hai Gunaah Nahi

7
बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे खफा होने का
 तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा

8
क़ैदी हूँ पर मुल्जिम नहीं 
मुझ पर मुहब्बत का इल्जाम है

वफ़ा के वास्ते मर मिटने चला था 
बस मेरा इतना सा गुनाह है

9
वो रख ले कहीं अपने पास हमें कैद करके
काश कि हमसे कोई ऐसा गुनाह हो जाये

Wo Rakh Le Kahi Apane Paas Hame Kaid Karake,
Kash Ki Hamase Koi Yesa Gunaah Ho Jaye Koi..

  गुनाह शेर-ओ-शायरी  

10
हर कोई रखता है ख़बर ग़ैरों के गुनाहों की
अजब फितरत हैं कोई आइना नहीं रखता

Har Koi Rakhta hai Khabar Gairo ke Gunaho ki
Ajab Fitrat hai koi Aaina Nahi Rakhta..
11
हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा  भी साथ चलती है
हम अब तन्हा नहीं चलते  दवा भी साथ चलती है
मुनव्वर राना   

12
सजा मिली उन गुनाहों की जो मेरे हरगिज न थे
मैं वो आँसू भी रोया जो खान साहब के नसीब में न थे

13
मन करता है, कर लूं मैं कबूल गुनाह अपना
पर सजा जो मुझे, उनके दिल में उम्र-कैद की मिले

14
तेरी ख्वाहिश कर ली तो कौन सा गुनाह किया
लोग तो इबादत में पूरी क़ायनात मांगते हैं खुदा से

  गुनाह शायरी 2 लाइन  

15
चल सनम एक। गुनाह करते हैं
तुम बाँहों में रहो हम मोहब्बत बेपनाह करते हैं

16
अगर मोहब्बत गुनाह है, तो गुनाहगार है खुदा
क्यूँ बनाया ये #दिल, किसी की रूह मै उतर जाने के लिए?

17
कोई और गुनाह करवा दे मुझ से मेरे खुदा
मोहब्बत करना अब मेरे बस की बात नहीं

18
मुहब्बत करना गुनाह नहीं हैं
मुहब्बत में बेहक जाना गुनाह हैं

19
खता मत गिन इश्क़ में , किसने क्या गुनाह किया
इश्क़ इक नशा था , तूने भी किया और मैंने भी किया

  Gunaah Status  

20
कोई किसी को पसन्द करे तो कोई गुनाह नहीं
इश्क और पसन्द दिल के दो अलग अलग एहसास है 

21
गुनाह मेरे बड़े हैं, हैं तेरा दिल भी बड़ा
यकीन हैं माफ करेगा तभी हूँ दर पे खड़ा

22
गुनाह आँखो ने किया
गिरफ्तार दिल हो गया है

23
गुनाहे इश्क में इक वो दौर भी बहुत खास रहा
जब मेरा ना होकर भी तू मेरे बहुत पास रहा

24
रोज गुनाह करता हूँ आप छुपा लेते हो अपनी रहमत से
मैं मजबूर हूं अपनी  आदत से आप मशहूर हो अपनी रहमत से

25
गुनाह किये होते, तो मांफ भी हो जाते साहिब
ख़ता तो मुझसे ये हुई,कि उनसे इश्क़ हो गया

26
ये मोहब्बत  भी तो किसी गुनाह से कम नही
हर आशिक यहाँ सज़ा-याफ़्ता है

27
तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारों
मरने का शौक है तो मुहब्बत क्यों नहीं करते

28
 दुश्मनी हो जाती है मुफ्त में सैंकड़ों से
 इंसान का बेहतरीन होना ही गुनाह है

29
ऐसा नहीं है कि हमें बातें बुरी नहीं लगती
एक बस तेरे लिये सारे गुनाह माफ़ है

  गुनाह शेर-ओ-शायरी  

30
गुनाह यार ए मोहब्बत हुआ है मुझसे 
गुजारिश है कोई मेरे दिल को फांसी दे दो

31
या अल्लाह हम सब पर अपनी रहमत कि बारिश कर दे
 हमारे गुनाहों को माफ कर दे

Ya Allah Ham Sab Par 
Apanai Rahamat Ki Barish Kar De,
Hamare Gunahon Ki Mafi Kar De.

32
रख ले 2-4 बोतल कफ़न में,
साथ बैठ कर पिया करेंगे

जब माँगे गा हिसाब गुनाहों का,
एक पेग उसे भी दे दिया करेंगे
33
इश्क़  का व्रत तेरे   नाम पे
 रख लिया  हमने

अब  किसी और को  सोचना भी 
गुनाह लगता  है

34
न जिद है न हमे कोई गुरूर है 
बस तुम्हे पाने का 
हमे सुरूर है

इश्क गुनाह है तो गलती की
अब सजा जो भी हो 
हमे मंजूर है

Naa Zid Hai Na Hame Koi Gurur Hai,
Bas Tumhe Paane Ka 
Hame Surur Hai.

Ishq Gunaah Hai Galati Ki,
Ab Saja Jo Bhi Ho 
Hame Manjur Hai

35
ता-मत-गिन इश्क़ में
किसने क्या गुनाह किया

इश्क़ इक नशा था जो 
तूने भी किया और मैंने भी किया

Khata Mat Gin Ishk Me
Kisane Kya Gunaah Kiya

Ishk Ek Nasha Tha Jo
Tune Bhi Kiya Maine Bhi Kiya

36
इश्क़ इनायत है  खुदा की
तो मैं गुनाहगार कैसे?

Ishk Inayat Hai Khuda Ki
To Mai Gunahgaar Kaise?

37
मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे
ग़ैर-मुमकिन है 

बढ़ी जब बेख़ुदी फिर कौन डरता है
गुनाहों से 
आरज़ू लखनवी

Mohabbat Neko-O-Bad Ko Sochane De
Gair-Mumkin Hai

Badhi Jab Bekhudi Fir Kaun Darata Hai
Gunaaho Se

  गुनाह शायरी 2 लाइन  

38
कोई अच्छा सा बहाना 
बनाना तुम मुझ से खफ़ा होने का

क्यूँकि तुझे चाहने के सिवा, 
मैने अब तक कोई गुनाह नहीं किया है

39
कैदी होना तकदीर कि बात है,
कोइ कैदी बनने गुनाह-ए-इश्क किये जा रहा है

तो कोइ दिल का कैदखाना 
खोलने को तैयार नही

  गुनाह शायरी  

40
छोड़ दें कोशिशें इंसानों को पहचानने की,
यहाँ जरूरतों के हिसाब से बदलते नकाब हैं

अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर,
हर शख्स कहता है  जमाना बड़ा खराब हैं

41
न जिद है न हमे कोई गुरूर है 
बस तुम्हे पाने का हमे सुरूर है

इश्क गुनाह है तो गलती की
अब सजा जो भी हो  हमे मंजूर है

Naa Zid Hai Na Hame Koi Gurur Hai,
Bas Tumhe Paane Ka Hame Surur Hai.

Ishq Gunaah Hai Galati Ki,
Ab Saja Jo Bhi Ho  Hame Manjur Hai.

42
प्यारे, मैं उन गुनाहो के सदके,
जो तेरा दीदार करा दे

हर सजाए सर आखो पर मेरी,
जो मुझे तुमसे मिला दे

43
खुद की मोहब्बत यहां फ़ना कौन करेगा
सभी नेक बन गए तो गुनाह कौन करेगा

ऐ खुदा, सनम बेवफा को सलामत रखना
वरना रोज मेरी मौत की दुआ कौन करेगा 

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44
आज भी याद हैं मुझे अपने वो तीन गुनाह सनम,
पहला मोहब्बत कर ली
दूसरा तुमसे कर ली,
तीसरा बेपनाह कर ली

  Gunaah Status  

45
गुनाह ही समझते हैं लोग मोहब्बत को
चाहे रब से हो य़ा यार से

46
आशिक हूँ तेरा भोले अब तेरी रजा बता दे
गुनाह हैं गर ये तो सजा बता दे

47
कोई गुनाह नहीं है इश्क़ जो हम छुपांएगे
हमने चाहा है तुमको हम तो सबको बताएँ

48
किसी के दिल में बसना कोई गुनाह तो नहीं
गुनाह है ये जमाने के नजर में तो, क्या जमाने वाले कोई खुदा तो नहीं

49
इश्क़ अगर गुनाह है तो गुनाहगार है खुदा
जिसने बनाया दिल किसी पर आने के लिए

  गुनाह शायरी  

50
गुनाह करके सजा से डरते हैं, 
ज़हर पी के दवा से डरते हैं

दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं हमें, 
हम तो दोस्तों के खफा होने से डरते है

51
हर एक नज़र को गुनाह का हक़ है,
हर नूर को एक आह का हक़ है

हम भी एक दिल लेकर आये हे इस दुनिया में,
हमें भी ये गुनाह करने का हक़ है

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