45+ Mirza Ghalib Shayari - Ghalib Shayari in Hindi Font - With Images


"Mirza Ghalib Shayari" की  इस खास Post में पढ़ेंगे मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी(Mirza Ghalib Quotes), Mirza Ghalib Shayari  In Hindi 2 Lines, को जो आप के दिलो छू जाएँगी। आशा करता हूँ की यह पोस्ट आप सभी शेर-ओ-शायरी के चाहने वालो को पसंद आएगी।  

दोस्तों जहा भी शेर-ओ-शायरी का ज़िक्र जहा होता वहा सबसे पहले  नाम महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का आता हैं.  ग़ालिब उर्दू शायरी का वह चमकता सितारा हैं जो आज भी आकाश के चमचमाते तारे  की तरह चमक रहा।  

  ग़ालिब परिचय  

मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म आगरा में  27 दिसंबर, 1797 को हुआ था। वो एक  सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से थे. और उनकी  पृष्ठभूमि एक तुर्क परिवार से थी मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम "मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां" उर्फ “ग़ालिब” था ग़ालिब के बचपन में ही, उनके चाचा और पिता का देहांत  हो गया था।  

ग़ालिब का अपना जीवनयापन चाचा के देहांत के बाद मिलने वाले पेंशन से होता रहा. बचपन  से ही उन्हें कविताये और शायरी का शौख रहा महज अपनी 11 साल की उम्र से ही कविताएं लिखना आरम्भ कर दिया था 

इनकी शादी 13 वर्ष की आयु में  नवाब इलाही बक्श की बेटी  उमराव बेगम से करा दी गयी. ग़ालिब साहब ने कई  जगह काम किया लाहौर, जयपुर दिल्ली आदि उसके बाद वापस आगरा आ गए और वही रहने लगे ग़ालिब साहब वफ़ात (निधन)  15 फरवरी, 1869 को हुआ. लेकिन आज भी उनका नाम  में ज़िंदा हैं

नमन करते हैं ऐसे महान शायर को जिनके हर एक शब्द जैसे जिंदगी के सार को बयां करती। उनके द्वारा लिखे गए हर एक शेर किसी जिंदादिल आशिक की तरह होते थे जो इश्क़-ए-मोहब्बत की हर एक रस्मो को अदा करती थी यह  आश्चर्य की बात न होगी कि इश्क़ ग़ालिब से ही शुरू हुआ . कमश:....


Mirza-Ghalib-Shayari
Mirza Ghalib Shayari 

दोस्तों तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी के उस दमदार कलेक्शन को जो आप के दिलो को छू जाएगी। क्युकी  ग़ालिब के नज्में और शेर जो  इश्क को सालों साल तलक तहजीब की दुनिया दी. महान शायर Mirza Ghalib की Shayari  के बिना इश्क़ की दुनिया अधूरी है.

45+ Mirza Ghalib Shayari - Ghalib Shayari in Hindi Font 




Ishq-Ne-Galib-Nikamma-Kar-Diya
Ishq Ne Galib Nikamma Kar Diya

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इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया 
वर्ना हम भी आदमी थे काम के 


Ishq Ne Galib Nikamma Kar Diya, Warna Ham Bhi  Aadami The Kaam Ke..


Un-Ke-Dekhe-Se-Jo-Aa-Jati-Hai-Munh-Pe-Raunak -Galib
Un Ke Dekhe Se Jo  Aa Jati Hai Munh Pe Raunak - Galib 

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उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है


Un Ke Dekhe Se Jo  Aa Jati Hai Munh Pe RaunakWo Samjhate Hai Ki Bimaar Ka Hal Achchha Hain..

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काबा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब' 
शर्म तुम को मगर नहीं आती


Kaba Kis Muh Se Jaoge "Galib", Sharm Tum Ko Magar Nahi Aati..


Dil-E-Nadan-Tujhe-Hua-Kya-Hain-Galib
Dil-E-Nadan Tujhe Hua Kya Hain - Galib

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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है 
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है


Dil-E-Nadan Tujhe Hua Kya Hain? Akhir Is Dard Ki Dawa Kya Hai.


Ishq-Par-Jor-Nahi-Hain-Ye-Aatish-Galib
Ishq Par Jor Nahi Hain Ye Aatish "Galib"

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इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे


Ishq Par Jor Nahi Hain Ye Aatish "Galib", Ki Lagaaye Naa Lage Bujhaye Na Bujhe..

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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना 
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना


Esharat-E-Katara Hai Dariya Me Fana  Ho Jana, Dard Ka Had Se Guzarana Hain Dawa Ho Jana..


Dil-Se-Teri-Nigah-Jigar-Tak-Utar-Gayi
Dil Se Teri Nigah Jigar Tak Utar Gayi

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दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई 
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई 


Dil Se Teri Nigah Jigar Tak Utar GayiDono Ko Ek Adaa Me Rajamand Kar Gayi.


Dard-Minnat-Kash-E-Dawa-N-Hua-Mirza-Ghalib
Dard Minnat Kash-E-Dawa N Hua - Mirza Ghalib

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दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ 
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ


Dard Minnat Kash-E-Dawa N Hua, Main N Achchha Hua Na Bura Hua.

Aah-Ko-Chahaiye-Ek-Umar-Asar-Hote-Tak-Mirza-Ghalib
Aah Ko Chahaiye Ek Umar Asar Hote Tak - Mirza Ghalib

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आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक 
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक


Aah Ko Chahaiye Ek Umar Asar Hote Tak, Kaun Jeeta Hai Tiri Zulfo Ke Sar Hone Tak..

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क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन


Karz Ki Peete The May, Lekin Samjhate The Ki Ha,n, Rang Lavegi Hamari Faka-Masti Ek Din.

  Mirza Ghalib Shayari  

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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले


Mohabbat Me Nahi Hai Farq Jeene Aur Marane Ka, Usi Ko Dekh Kar Jeete Hai Jis Kafir Pe Dam Nikale..


Kitana-Khauf-Hota-Hai-Mirza-Ghalib
Kitana Khauf Hota Hai - Mirza Ghalib

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कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते


Kitana Khauf Hota Hai Shaam Ke Andhero Me, Punchh Un Parindo Se Jinake Ghar Nahi Hote.


Hazaron-Khwahishe-Esi-Ki-Ghalib
Hazaron Khwahishe Esi Ki  Ghalib

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले


Hazaron Khwahishe Esi Ki Har Khwahish Pe Dam Nikale, Bahut Nikale Mire Armaan Lekin Fir Bhi Kam Nikale..

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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और


Hai Aur Bhi Duniya Me Sukun-Var Bahut Achchhe, Kahate Hai Ki "Galib" Ka Hain Andaaz-E-Bayan Aur..

  Ghalib Shayari on Life  

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न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता


N Tha Kuchh To Khuda Tha, Kuchh N Hota To Khuda Hota, Duboya Mujh Ko Hone Ne N Hota Main To Kya Hota..


Dard-Jab-Dil-Me-Ho-To-Ghalib
Dard Jab Dil Me Ho To  Ghalib

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दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए 
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए 


Dard Jab Dil Me Ho To Dawa Kijiye, Dil Hi Jab Dard Ho To Kya Kijiye?


Hatho-Ki-Lakiron-Pe-Mat-Ja-E-Galib
Hatho Ki Lakiron Pe Mat Ja E Galib

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हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब 
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते


Hatho Ki Lakiron Pe Mat Ja E "Galib", Nasib Unake Bhi Hote Hai, Jinake Hath Nahi Hote.


Do-Ghut-Pee-Aur-Masjid-Hilata-Dekh-Galib
Do Ghut Pee Aur Masjid Hilata Dekh  Galib

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वाइज़!! तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिलाके देख 
नहीं तो दो घूंट पी और मस्जिद को हिलता देख 

Vaiz teri Duwaon Me Asar Ho To Masjid Ko Hilake Dekh, Nahi To Do Ghut Pee Aur Masjid Hilata Dekh..


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नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं


Nazar Lage N Kahi Usake Dast-O-Baju Ko, Ye Log Kyun Mere Zakhme Jigar Dekhate Hai..

  Shayari Of Ghalib On Ishq  

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 रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है


Rahi N Takat-E-Guftaar Aur Agar Ho Bhi, To Kis Ummid Pe Kahiye Ke Aarzoo Kya Hai..

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पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है


Piyun Sharab Agar Khum Bhi Dekh Lu Do Char, Ye Shisha-O-Kahad-O-Kuza-O-Subu Kya Hain

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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है


Rango Me Daudate Firane Ke Ham Nahi KayalJab Ankh Hi Se N Tapaka To Fir Lahu Kya Hai..

  Mirza Ghalib Shayari  

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चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है


Chipak Raha Hai Badan Par Lahu Se PairahanHamari Zeb Ko Ab Hajat-E-Rafu Kya Hai ..

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न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है


N Shole Me Ye Larishma N Barq Me Ye AdaaKoi Batao Ki Wo Shokhe-Tandukhu Kya Hain..

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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता


Huyi Muddat Ki "Galib" Mar Gaya Par Yaad Aata Hai, Wo Har Ek Baat Pe Kahata Ki Yun Hota To Kya Hota..

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तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता


Tere Wade Par Jiye Ham, To Yah Jaan, Jhuth Jana, Ki Khushi Se Mar N Jate, Agar Etbaar Hota..


Galib-Ye-Khyaal-Achchha-Hain
Galib Ye Khyaal Achchha Hain

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हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
 दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़्याल अच्छा है


Hamko Malum Hai Zannat Ki HAQIQAT Lekin, Dil Ke Khush Rakhane Ke "Galib" Ye Khyaal Achchha Hain..

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रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब' 
कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था 


Rekhte Ke Tumhi Ustaad Nahi Ho "Galib", Kahate Hai Agale Zamaane Me Koi Meer Bhi Tha

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कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को 
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता 


Koi Mere Dil Se Puchhe Tere Teer-E-Neem-Kash Ko, Ye Khalish Kaha Se Hoti Jo Jigar Ke Paar Hota..

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बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना 
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना 


Bas-KI-Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasaan Hona, Aadami Ko Bhi Mayassar Nahi Insaan Hona..

  Ghalib Shayari in Hindi Font  

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बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे 
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे 


Bagicha-E-Atafaal Hai Diniya Mire AageHota Hai Shab-O-Roz Tamasha Mire Aage..

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यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं। 
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो


Yahi Hai Aazamana To Satana Kisko Kahate Hai, Adu Ke Ho Liye Jab Tum To Mera Inthaan Kyu Ho..

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तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई

मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई


Tum N Aaye To kya Sahar N Huyi, Han Magar Chain Se Basar N Huyi, Mera Nala Suna Zamane Ne, Ek Tum Ho Jise Khabar N Huyi..


45+ Mirza Ghalib Shayari - Ghalib Shayari in Hindi Font 


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हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का
ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता


Hua Jab Gham Se Yun Behish To Gham Kya Sar Ke Katane Ka, Na Hota Gar Juda Tan Se To Jahanu Par Dhara Hota..

  Shayari Of Ghalib On Ishq  

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हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है


Har Ek Baat Pe Kahate Ho Tum Ki Tu Kya HaiTumhi Kaho Ki Ye Andaaz-E-Guftagu Kya Hain..

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वो चीज़ जिसके लिये हमको हो बहिश्त अज़ीज़
सिवाए बादा-ए-गुल्फ़ाम-ए-मुश्कबू क्या है


Wo Chiz Jisake Liye Hamako Ho Bahisht Azez, Siwaye Bada-E-Gulfaam-e-E-Mushkabu Kya Hai..


Ye-Ham-Jo-Hizr-Me-Deewaar-O-Dar-Ko-dekhate
 Deewaar-O-Dar Ko dekhate

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ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं


Ye Ham Jo Hizr Me Deewaar-O-Dar Ko dekhate Hai, Kabhi Saba Ko, Kabhi Namaabar Ko Dekhate Hai..

Wo-Aaye-Ghar-Me-Hamare-Khuda-Ki-Kudarat-Hai-Galib
Wo-Aaye-Ghar-Me-Hamare-Khuda-Ki-Kudarat-Hai-Galib

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वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं
कभी हम उनको, कभी अपने घर को देखते हैं


Wo Aaye Ghar Me Hamare, Khuda Ki Kudarat Hai, Kabhi Ham Unako Kabhi Apane Ghar Ko Dekhate Hain..

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निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले


Nikalana Khuld Se Adam Ka Sunate Aaye Hai Lekin, Bahut Be-Aabaru Ho Kar Kire Kunche Se Ham Nikale..

  Ghalib Shayari on Life  

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कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़
 पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले


Kaha May-Khane Ka Darwaza "Galib" Aur Kaha Vayiz, Par Itana Janate Hain Kal Wo Jata Tha Ki Ham Nikale..

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तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल को क्या देखें
हम औजे तअले लाल-ओ-गुहर को देखते हैं


Tere Zawahire Tarfe Kal Ko Kya DekhHam Auze Tale Laal-O-Guhar Ko Dekhate Hai...

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बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वगर्ना शहर में "ग़ालिब" की आबरू क्या है


Bana Hai Shah Ka Musaahib Fire Hai itraana, Vagana Shahar Me "Galib" Ki Abaru Kya Hai..

  Ghalib Shayari in Hindi Font  

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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है


Jula Hai Zism Janha Dil Bhi Jal Gaya Hoga, Kudarate Ho Jo Ab Raakh Justaju Kya Hain..

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ये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है


Ye Rashk Ki Wo Hota Hai Hamsukhan HamaseWarana Khuf-E-Bdamoji-E-Adu Kya Hai..

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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता 
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता 


Ye N Thi Hamari Kisamat Ki Visaal-E-Yaar Hota, Agar Aur Jeete Rahate Yahi Intizaar Hota..

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रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज 
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं 


Ranj Se Khugar Hua Insaan To Mit Jata Hain Ranj, Mushkile Mujh Par Padi Itani Ki Asaan Ho Gayi..


आशा करता हूँ आप सभी ग़ालिब के दीवाने दोस्तों को  45+ Mirza Ghalib Shayari - Ghalib Shayari in Hindi Font  पोस्ट बेहद ही  होगा और ग़ालिब की शायरियों का भरपूर आप सभी ने लुफ्त उठाया होगा। दोस्तों कृपया इस पोस्ट को जयदा से  करे ताकि आप के सभी दोस्त मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी का लुफ्त उठा सके..


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