65+ समंदर शायरी 2 लाइन - Samandar Status





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Samandar-Shayari
Samandar Shayari 


65+ समंदर शायरी 2 लाइन  - Samandar Status

1
सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है
उधर ही ले चलो कश्ती जहां तूफान आया है

2
अधूरी रहें इश्क की दास्तानँ,, वहीं चाहत कहलाती है 
समंदर से मिलनें के बाद तो,,नदी भी समंदर कहलाती है 

3
उसने मुझसे पूछा मोहब्बत कश्मकश क्या है?
मेने कहा बाहों में समंदर और रूह प्यासी

4
तूने देखी कहां,मेरी चाहतों की दुनियां
समंदर इश्क़ का,तेरे लिए अभी सूखा नहीं है

5
कह दो समुद्र से की लहरों को संभाल कर रखे
जिंदगी मैं तूफ़ान लाने के लिए मेरे दिल ही काफी है

5
गिरते हैं समुंदर में बड़े शौक़ से दरिया 
लेकिन किसी दरिया में समुंदर नहीं गिरता 
क़तील शिफ़ाई

  समंदर शायरी  

5
मैंने अपनी ख़ुश्क आंखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए
राहत इंदौरी

6
कितने ही लोग प्यास की शिद्दत से मर चुके
मैं सोचता रहा के समंदर कहाँ गये
राहत इंदौरी

  समंदर शायरी 4 लाइन  

7
मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं
एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे
8
रख हौंसला के वो मंज़र भी आएगा
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा 

9
बहता छोड़ दिया है खुद को तेरे इश्क़ के समंदर में
अब तेरी मर्ज़ी हाथ थाम या डुबो दे मुझको

10
होता होगा तुम्हारी दुनियाँ में गहरा समंदर
हमारे यहाँ इश्क़ से गहरा कुछ भी नहीं 

11
दिल तक पहुँचने का रास्ता, 
वफ़ा के समंदर से होकर गुजरता है

हर लहर पे नाव बदलने वाले, 
मंजिल तक नही पहुँचा करते

12
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए
हम समंदर से भी गहरे हो गए

13
ये समुंदर जैसा दिल है मेरे भाई,तुम लाख बुराई करो मेरी
मैंने ना कल बुरा माना था ना कल बुरा मानूँगा

14
लगा के ताला अपने दिल के दरवाज़े पे
चाबी फेंक दी मैंने अकेलेपन के समंदर में

15
कतरा होने की शोहरत कोई मुझसे पूछे
मैंने अपने लिये समुंदर को परेशान देखा है

  Samandar Status  

16
समंदर बेबसी अपनी किसी से कह नहीं सकता
हजारों मील तक फैला है, फिर भी बह नहीं सकता

17
वो बहने के लिये कितना तड़पता रहता है लेकिन
समंदर का रुका पानी कभी दरिया नहीं बनता

18
उन आँसुओं का समंदर है मेरी आँखों में
जिन आँसुओं में है ठहराव भी, रवानी भी

19
उसके रुखसार पे इक अश्क की आवारागर्दी
हमने याकूत के सीने पे समन्दर देखा

20
एक दिल है कि जो प्यासा है समंदर की तरह
दो निगाहें जो घटाओं के सिवा कुछ भी नहीं

  समंदर शायरी  

21
कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊंगा
मैं तो दरिया हूं समुंदर में उतर जाऊंगा
दीम क़ासमी

22
बंद हो जाता है कूज़े में कभी दरिया भी 
और कभी क़तरा समुंदर में बदल जाता है
फ़रियाद आज़र
23
तू किसी और के लिए होगा समंदर-ऐ-इश्क़
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

24
जब रूह में उतर जाता हैं बेपनाह इश्क का समंदर
लोग जिंदा तो होते हैं मगर किसी और के अंदर

25

साहिल. रेत. समंदर लहरें बस्ती .जंगल सहरा दरिया 
खुशबू मौसम फूल दरीचे बादल सूरज चाँद सितारे 
आज ये सब कुछ नाम तुम्हारे

  समंदर शायरी in Urdu  

26
समंदर की तरह पहचान है हमारी 
उपर से खामोश अंदर से तुफान

27
लहरों को शांत देखकर,
ये ना समझना कि समंदर मे पानी नहीं है

जब भी उठेंगे तूफ़ान बन के उठेंगे,
अभी उठने की ठानी नहीं है

28
इक मैं हूँ कि लहरों की तरह चैन नहीं है
इक वो है कि ख़ामोश समुंदर की तरह है

29
समंदर को ढूँढती है नदी जाने क्यूँ
पानी को पानी की ये कैसी प्यास है

30
बस यही सोच कर हर तपिश में जलते आये हैं
धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर सुखा नहीं करते

31
कह देना समुन्दर से हम ओस के मोती हैं
दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आएंगे
शीर बद्र

32
किसी की मस्त निगाहों में डूब जा गालिब
बहुत ही हंसी समन्दर है खुदकुशी के लिए

33
जब चल पड़े सफ़र को तो फिर हौंसला रखो
सहरा कहीं, कहीं पे समंदर भी आएंगे

34
जिसको देखूँ तेरे दर का पता पूछता है
क़तरा क़तरे से समंदर का पता पूछता है

35
वो नदी थी वापस मुड़ी नहीं
मैं समंदर था आगे बढ़ा नहीं 

36
समन्दर मैं तुझसे वाकिफ हूँ मगर इतना बताता हूँ
वो आंखें तुझसे ज्यादा गहरी हैं जिनका मैं आशिक हूं

37
इश्क का समंदर भी क्या समंदर है
जो डूब गया वो आशिक जो बच गया वो दीवाना
जो तैरता ही रह गया वह पति 

38
दिलों को जीतने का वो , हुनर मैं भी रखती हूं
लाखों में नज़र आऊं , वो असर मैं भी रखती हूं

वादा किया हैं किसी से , मुस्कुराने का ए दोस्त
वरना आंखों में दर्द का , समंदर मैं भी रखती 

39
डूबना है तो समुद्र में जाके डुबो किनारे पर क्या रखा है 
प्यार करना है तो बाहो में आके करो किनारे पर क्या रखा है

40
मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में
मगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं

41

वक्त ढूँढ रहा था मुझे हाथों में खंजर लिए
मैं छुप गई आईने में आँखों में समंदर लिए


42
तेरे मासूम चेहरे पर, अदा अच्छी लगती है,
जिस घडी तु हंस दे, वो दुआ सच्ची लगती है

तेरी आँखों में काजल, इक लकीर सी बनाता है,
समंदर पर, ये नक्काशी अच्छी लगती है

  Samandar Status  

42
सुकून अपने दिल का मैंने खो दिया
खुद को तन्हाई के समंदर में डुबो दिया

43

ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे
या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

E Khuda Ret Ke Sahara Ko Samndar Kar De
Ya Chhalakati Huyi Ankhon Ko Bhi Patthar Kar De.

44
ये समंदर उदास है शायद,
ज़ख्म लहरो के पास है शायद

एक लड़की की दास्तां सुन कर,
सारा मंज़र उदास है शायद
प्रखर

  समंदर शायरी 4 लाइन  

45
इलाही कश्ती-ए-दिल बह रही है किस समंदर में
निकल आती हैं मौजें हम जिसे साहिल समझते हैं
सर सहबाई

  समंदर शायरी in Urdu  

46

अगर है गहराई तो चल डुबा दे मुझ को
 समंदर नाकाम रहा अब तेरी आँखो की बारी है

47
समंदर समंदर अपनी प्यास बुझाओ जिन आखों में उतरो
जिस दिल में डूबो मेरी तन्हाई अब तुम्हें आवाज़ न देगी

48
सब हवाएं ले गया मेरे समंदर की कोई
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

49

बस एक लहर आने तक मेरी कहानी चलेगी
मैं, समंदर किनारे, रेत पर लिखा इक नाम हूँ

50
लगी है प्यास तो चलो रेत निचोड़ी जाए
अपने हिस्से में कोई समंदर नहीं आने वाला


65+ समंदर शायरी 2 लाइन  - Samandar Status


51

बुझी न प्यास तो यूँ ख़त्म ज़िंदगी कर ली
नदी ने जा के समंदर में ख़ुदकशी कर ली

Bujhi Na Pyaas To Yu Khatm Zindagi Kar Li
Nadi Ne Ja Ke Samndar Me Khudkhushi Kar Li.

52
उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो

इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है,
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो


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53
तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे
औस से प्यास बुझाना अभी आता है मुझे

54

तुम समंदर हो, दिल मेरा दरिया है
साँसे चलती है दिल में जो मेरे
उसका तू ही तो जरिया है

Tum Samandar Ho Dil Mera Dariya Hain
Sanse Chalati Hai Dil Me Jo Mere
Usaka Tu Hi To Jariya Hai

55
बे-इरादा टकरा गए थे लेहरों से हम
समन्दर ने कसम खा ली हमे डुबोने की

56
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समंदर से नूर निकलेगा

57
दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
ब्दुल अहद साज़

58

इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो

Ulajhi Sham Ko Pane Ki Zid Naa Karo,
Jo Naa Ho Apana Use Apanaane Ki Zid Naa Karo.

59

बेहतर से बेहतर कि तलाश करो
मिल जाये नदी तो समंदर कि तलाश करो

 टूट जाता है शीशा पत्थर कि चोट से
 टूट जाये पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो

60
 ना जाने कौन मेरे हक़ में दुआ पढता है
 डूबता भी हूँ तो समंदर उछाल देता है

61
ऐसा डूबा हूँ तेरी याद के समंदर में “फ़राज़”
दिल का धड़कना भी अब तेरे कदमों की सदा लगती है

Aise Duba Hun    Teri Yaad Ke Samandar Me “Faraz”
Dil Ka Dhadakna Bbhi   Ab Tere Kadmon Ki Sda Laggti Hai.

62
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मै हि कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

63
कोई अपनी ही नजर से तो हमें देखेगा
एक कतरे को समन्दर नजर आयें कैसे

64

कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे
हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे

वो तरस जायेंगे प्यार की एक बूँद के लिए
हम तो बादल है प्यार के कहीं और बरस जायेंगे

65
ग़मों के नूर में लफ़्जों को ढालने निकले
गुहरशनास समंदर खंगालने निकले

66
समंदर ने कहा मुझको बचा लो डूबने से
मैं किनारे पे समन्दर लगा के आया हूँ


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