35 लाज़वाब रेत शायरी 2 Line / रेत शायरी Urdu,


 नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट "रेत  Shayari" पर आधारित हैं आप पढ़ सकते रेत शायरी Urdu, रेत शायरी 2 Line, और  रेत शायरी Hindi के खास कलेक्शन को. 

Ret-Shayari-2-Line
Ret Shayari 2 Line

तो आईये दोस्तों आज की रेत शायरी 2 Line  पोस्ट को पढ़ते है और लुफ्त उठाते हैं इस कलेक्शन का क्युकी यह पोस्ट खास सभी शेर-ओ-शायरी के चाहने वाले दोस्तों के लिए बनाया गया हैं. रेत शायरी Urdu के इस कलेक्शन को कई सोशल मिडिया से संग्रह किया गया हैं खास आपके लिए तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं इस पोस्ट को. 

35 लाज़वाब रेत शायरी 2 Line / रेत शायरी Urdu,


1
ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे,
या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

E Khuda Ret Ke Sahara Ko Samndar Kar De
Ya Chhalakati Huyi Ankhon Ko Bhi Patthar Kar De.

रेत शायरी 2 Line

 2
रेत सा क्युं लगता हैं  प्यार तुम्हारा , 
कभी मिला , तो मुठ्ठीभर तो कभी .
चुटकी भी नसीब नहीं

Ret Sa Kyu Lagata Hai Pyaar Tumhaara
Kabhi Mila To Mutthi Bhar To Kabhi
Chutaki Bhar Bhi Nashib Nahi.

 3
न जाने क्यों रेत की तरह निकल जाते हैं हाथों से वो लोग,
जिन्हें जिंदगी समझकर हम कभी खोना नहीं चाहते।

रेत  Shayari

 4
बनाकर उसने मेरे संग रेत का महल
न जाने क्यों बारिशों को खबर कर दी.

Banaa-kar Usane Mere Sang Ret Ka Mahal
Naa Jaane Kyu Barishon Ko Khabar Kar Di.

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❁ 5
मैं तपती रेत सा.
सागर की बुंद हो तुम.

Main Tapati Ret Sa
Sagar Ki Bund Ho Tum

रेत शायरी Hindi

 6
लगी है प्यास तो चलो रेत निचोड़ी जाए,
अपने हिस्से में कोई समंदर नहीं आने वाला.

 7
बस एक लहर आने तक मेरी कहानी चलेगी,
मैं, समंदर किनारे, रेत पर लिखा इक नाम हूँ.

 8
साहिल. रेत. समंदर लहरें 
बस्ती .जंगल सहरा दरिया 
खुशबू मौसम फूल दरीचे 
बादल सूरज चाँद सितारे 
आज ये सब कुछ नाम तुम्हारे

 9
थे रेत में बस घर का टीला बनाना आता था, 
और घर नही बन पाता था 
तो गुस्से मे टीले को बिगाड़ के चले जाते थे 

 10
जान न ले रेत का टीला हूँ मैं
 मेरे काँधों पे है तामीर इमारत उस की 

 11
बरसना. मैं रेत का टीला हूँ 
मेरी प्यास बहुत है.

Barsana, Main Ret Ka Tila Hun
Meri Pyaas Bahut Hain.

रेत शायरी Hindi

 12
रेत के टीला नही हु जनाब, 
जो छोटे मोटे हवा के झोंके से इधर उधर हो जाऊंगा.
चट्टान हूं, जो टक्कर लेने-देने की क्षमता रखता हूं.

 13
रेत का टीला भी पर्वत को चुनोती दे रहा है
 की में भी तेरे से कम नहीं हु

Ret Ka Tila Bhi Parwat Ko Chunauti De Raha Hai
Ki Mai Bhi Tere Se Kam Nahi.

रेत शायरी Hindi

 14
घर के सामने रेत का टीला
पार उसके खेत सजीला.

 15
रेत के टीले सी है ज़िंदगी 
वक़्त की आंधी,
ज़र्रा ज़र्रा उड़ाकर ले जा रही है.

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 16
रेत का टीला देखा है कभी?
खड़ा रहता हैं हर कहीं.

रेत  Shayari

 17
फिसल गया वक्त रेत बनकर 
लम्हो के बन्द दरिचों से.
वक्त पर वक्त भी ना सीखा 
गिला क्या करें नसीबों से.

35 लाज़वाब रेत शायरी 2 Line / रेत शायरी Urdu


 18
वक्त की रेत मुठ्ठी से फिसलती क्यूँ है
जिदंगी ऱोज नए रंग बदलती क्यूँ है
मुकददर के साँचें में ढलती क्यूँ है
तकदीरों की कलम फिर पिघलती क्यूँ है.

 19
वक्त तो रेत है फिसलता ही जायेगा
जीवन एक कारवां है चलता चला जायेगा
मिलेंगे कुछ खास इस रिश्ते के दरमियां
थाम लेना उन्हें वरना कोई लौट के न आयेगा.

 20
सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए 
मुझे इन झील सी आँखों में रहना लिख दिया जाए. 
अतीक़ अंज़र

रेत शायरी Hindi

 21
वक्त की रेत हाथों से, कुछ यूं फिसल गई.
जिंदगी समझे जब तक, जिंदगी निकल गई.

Waqt Ki Ret Hatho Se Kuchh Yun Fisal Gayi
Zindagi Samjhe Jab Tak Zindagi Nikal Gayi.

 22
रेत पर नाम लिखते नही रेत पर लिखे नाम 
कभी टिकते नही 
लोग कहते हैं पत्थर दिल है 
हम लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नही.

 23
सुलगती रेत में पानी की अब तलाश नहीं,
मगर ये कब कहा हमने के हमें प्यास नही.

Sulagati Ret Me Pani Ki Ab Talash Nahi
Magar Ye Kab Kaha Hamane Ke Pyaas Nahi.

 24
रेत की दीवार ढह रहे हैं 
वक़्त की धारा में बह रहे हैं 
जिनको नाज़ था अपनी जवानी पर कभी 
वे अपनी कब्र में भी उजड़ रहे हैं.

रेत शायरी 2 Line


 26
रेत पर थक के गिरा हूँ तो हवा पूछती है 
आप इस दश्त में क्यूँ आए थे वहशत के बग़ैर .
इरफ़ान सिद्दीक़ी

 27
रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती है
सितारों की जरूरत आसमान को होती है
आप हमें भूल न जाना, क्योंकी
दोस्त की जरूरत हर इंसान को होती है.

रेत शायरी Hindi

 28
हर पल कुछ रेत फिसलती है,
वैसे ही जैसे जिंदगी गुजरती है.

Har Pal Kuchh Ret Fisakati Hai
Wese Hi Jaise Zindagi Guzarati Hai.

रेत शायरी Hindi

 29
समंदर मे बसे रेत की तरह ता-उम्र तेरे दिल मे रहना चहता हू,
बादल से गिरे बूंद की तरह तेरे समंदर जैसे दिल मे फ़ना होना चहता हू,
तू बेशक ठुकरा सकती है मोहब्बत को मेरे,
मै बस एक किनारे की तरह हमेशा के लिये तुझे मेहसूस करना चाहता हू.

 30
रूठ जाओ कितना भी पर मना लेंगे,
दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे,
दिल आखिर दिल है कोई सागर की रेत नही,
जो लिख के नाम आपका मिटा देंगे.

 31
यूँ ही बेवजह एक तस्वीर रेत पर उकेरती हैं उँगलियाँ,
लिख कर तेरा नाम जमीं पर मिटा देती हैं उँगलियाँ,
है मालूम कि लहरों को नहीं रास ये आने वाला,
चंद लम्हों में..
जी भर के एहसास-ए-मोहब्बत जी लेती हैं उँगलियाँ.

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 32
हो. इश्क का रंग सफेद पिया
ना छल ना कपट ना भेद पिया
सौ रंग मिले तू इक्क वर्गा
आतिश होया रेत पिया, रेत पिया.

 33
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है
शिकवे कितने भी हो हर पल
फिर भी हँसते रहना
क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है
 बस एक ही बार मिलती है.

 34
रेत की लहरों से दरिया की रवानी माँगे 
मैं वो प्यासा हूँ जो सहराओं से पानी माँगे. 
शाहिद कबीर

रेत शायरी 2 Line

 35
रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती है,
फूलों की जरूरत गुलिस्तान को होती है,
तुम मुझे कभी भूल ना जाना मेरे यार,
क्योंकि अच्छे दोस्त की जरूरत हर इन्सान को होती है.

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