95+ रात Shayari Urdu और रात शायरी Hindi

दोस्तों  Shayari On Topics की यह पोस्ट रात Shayari पर बनायीं गयी हैं इसमें आप पढ़ सकते हैं "रात Shayari Urdu" और रात  शायरी Hindi पर एक से बढ़ कर एक लाज़वाब शेर-ओ-शायरी 

Raat-Shayari-Urdu
Raat Shayari Urdu

यह पोस्ट उन शायरी के चाहने वाले दोस्तों के लिए हैं जिन्हे तलाश हैं रात शायरी Hindiरात Shayari Urdu पर लिखी गयी बेजोड़ शायरी के कलेक्शन की  दोस्तों के साथ शेयर करना चाहते हैं. 

इस  रात Shayari का कलेक्शन विश्व प्रसिद्ध शायरों द्वारा लिखा गया हैं जो आपको बेहद पसंद आएगा और आप के दिल को छू लेगा तो देर कैसी  इस पहले भाग को.. 


रात Shayari Urdu और रात शायरी Hindi




1
तेरे वादे को कभी झूट 
नहीं समझूँगा
कल की रात भी दरवाज़ा 
खुला रखूँगा
Tere Wade Ko Kabhi Jhuth
Nahi Samjhunga
Kal Ki Raat Bhi Darwaza
Khula Rakhunga

रात  शायरी Hindi 

2
रातों में खूब बातें होतीं हैं खुद से,
कौन कहता है अकेला हूँ मैं.
Raato Me Khub Baate Hoti Hai Khud Se,
Kaun Kahata Hai Akela Hun Main.

3
रातों को रौशन होने वाले
अक्सर सूरज के आते ही चले जाया करते हैं
Raato Ko Roshan Raushan Hone Wale
Aksar Suraz Ke Aate Hi Chale Jate Jaya Karate Hai

4
जलाकर हसरत की राह पर चिराग आरजू के,

हम तन्‍हा रातों में .. तेरे मिलने का इंतजार करते हैं 

5
हर रात हमारे ख्वाब बदलते हैं,
मंजिल नहीं कारवां बदलता हैं,

6
रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी 
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है 
वसीम बरेलवी

7
रात भी नींद भी 
कहानी भी 
हाए क्या चीज़ है
जवानी भी❗
Raat Bhi Neend Bhi

Khaani Bhi
Hay Kya Chiz Hai
Jawani Bhi

8
अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी 
तिरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए 
अनवर मिर्ज़ापुरी

9
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए 
न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए 
- अनवर मिर्ज़ापुरी

10
हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़ 
आगे का अहवाल वो जाने जिस ने रात गुज़ारी हो 
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

11
बरसात की भीगी रातों में
 फिर कोई सुहानी 
याद आई,
कुछ अपना ज़माना याद आया 
कुछ उनकी जवानी 
याद आई.
Barasaat Ki Bheegi Raato Me 
Fir Koi Suhaani 
Yaad Aayi,
Kuchh Apana Zamaana Yaad Aaya 
Kuchh Unaki Jawaani 
Yaad Aayi..

12
आँखों को सब की नींद भी दी ख़्वाब भी दिए 
हम को शुमार करती रही दुश्मनों में रात 

शहरयार

13


रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती
इब्न-ए-इंशा

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14
कितना भी कर ले, चाँद से इश्क़,
 रात के मुक़द्दर मे, अँधियारे ही लिखे हैं
Kitana Bhi Kar Le, Chand Se Ishk,
 Raat Ke Mukaddar Me, Andhiyaren Hi 
Likhe Hain

15
 कल रात भर मैं   ख्वाब में उसके 
आगोश में रहा,
   ख्वाब ही सही, मगर कुछ पल तो
मैं उसका रहा.
Kal Rata Bhar Me Khwaab Me Usake
Aagosh me Raha
Khwab Hi Sahi Magar Kuchh Pal To
Mai Usaka Raha

16
आज की रात भी तन्हा ही कटी 
आज के दिन भी अंधेरा होगा
अहमद नदीम क़ासमी

17
हर तरफ़ थी ख़ामोशी और ऐसी ख़ामोशी 
रात अपने साए से हम भी डर के रोए थे 
 भारत भूषण पन्त

18
ये उदास शाम और तेरी ज़ालिम याद,
खुदा खैर करे अभी तो रात बाकि है.
Ye Udas Sham Aur Teri Zalim Yaad,
Khuda Khair Kare Abhi To Raat Baki Hai.

19
मुद्दत से एक रात भी अपनी नहीं हुई
हर शाम कोई आया उठा ले गया मुझे.
Muddat Se Ek Raat Bhi Apani Nahi Huyi,
Har Sham Koi Aaya Utha Le Gaya Mujhe.

20
मैं सोते सोते कई बार चौंक चौंक पड़ा 
तमाम रात तिरे पहलुओं से आँच आई
नासिर काज़मी

21
आज न जाने राज़ ये क्या है 
हिज्र की रात और इतनी रौशन 
जिगर मुरादाबादी

22
आज न जाने राज़ ये क्या है 
हिज्र की रात और इतनी रौशन 
जिगर मुरादाबादी

23
ये सर्द रात ये तन्हाईयाँ ये नींद का बोझ,
हम अपने शहर में होते तो घर गए होते.
Ye Sard Raat Ye Tanhaayiyan Ye Need Ka Bojh,
Ham Apane Shahar Me Hote To Ghar Gaye Hote.

24
रातों को जागते हैं इसी वास्ते कि
 ख़्वाब, देखेगा बन्द आँखें तो 
फिर लौट जायेगा 
Raato Ko Jagate Hai Isi Vaste Ki 
Khwaab Dekhega band ankhe To
Fir Laut Jayega.

रात Shayari Urdu 

25
तेरी आँखों के ये जो प्याले हैं,
मेरी अंधेरी रातों के उजाले हैं,
पीता हूँ जाम पर जाम तेरे नाम का,
हम तो शराबी बे-शराब वाले हैं.
Teri ANkhon Ke Ye Jo Pyaale hai,
Meri Andheri Raato Ke Ujaale Hai.
Peeta Hun Jaam Par Jaam Tere Naam Ka,
Ham To Sharabi Be-Sharab Wale.

26
इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में 
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात 
फ़िराक़ गोरखपुरी

27
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम 
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई 
फ़िराक़ गोरखपुरी

28
रात भी नींद भी कहानी भी 
हाए क्या चीज़ है 👉 जवानी भी 
फ़िराक़ गोरखपुरी

Raat Bhi Nind Bhi Kahani Bhi
Haay Kya Chiz Hai Jawaani Bhi.

29
रात इकाई नींद दुहाई,
ख्वाब सैकडा दर्द हजार❗
Raat Ikayi Neend Duhai
Khwaab Saikda Dard Hazaar

30
गर मेरी चाहतों के मुताबिक, जमाने में हर बात होती,
तो बस मैं होता वो होती, और सारी रात बरसात होती.
Agar Meri Chahato Ke Mutabik,
Zamaane Me Har Baat Ho.
To Bas Mai Hota Wo Hoti,
Aur Saari Raat Barsaat Hoti.

31
अह्दे-जवानी रो-रो काटी,पीरी में लीं आंखें मून्द
यानी रात बहुत थे जागे,सुबह हुई आराम किया
मीर तक़ी मीर 

32
रात आ जाए तो फिर तुझ को पुकारूँ या-रब 
मेरी आवाज़ उजाले में बिखर जाती है
जावेद नासिर


33
बे- इख्तियार आँखों से आँसु छलक पड़े
कल रात अपने आप से जिस वक्त हम मिले         
राजेन्द्र नाथ रहबर

34
मुझसे नहीं कटती अब
ये उदास रातें
बेखुदी मे कल सूरज से कहूँगा
मुझे साथ लेकर डूबे

bekhudi-par-shayari

Mujhse Nahi Katati Ab
Ye Udaas Raate
Bekhudi Me Kal Suraj Se Kahunga
Mujhe Sath Lekar Dube.

35
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई 
हम न सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा

36
रात को रात कह दिया मैं ने 
सुनते ही बौखला गई दुनिया 
हफ़ीज़ मेरठी

37
हैरत से देखता हूँ हर इक नक्शे पा’ को मैं
दिन रात ढूँडता हूँ किसी दिलरुबा को मैं         
रतन पंडोरवी

38
कौन कहता है कि दिन रात मेरे नाम करो
एक लम्हा तो मिरे साथ गुजारा होता 
मुराद लखनवी

39
सुना है दिन को उसे तितलियँ सताती हैं
सुना है रात को जुगनु ठहर के देखते हैं
अहमद फ़राज

40
रात क्या सोए कि बाक़ी उम्र की नींद उड़ गई 
ख़्वाब क्या देखा कि धड़का लग गया ताबीर का 
अहमद फ़राज़

41
रात ही वो नेक दिल मां कि जिस की गोद में
हम सराहनो के तले मुँह को छुपा कर सो सकें     
अनु जसरोटिया

42
कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई 
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई 
निदा फ़ाज़ली

43
था व'अदा शाम का मगर आए वो रात को 
मैं भी किवाड़ खोलने फ़ौरन नहीं गया 
अनवर शऊर

रात  शायरी Hindi 


44
रात भर जलता रहा ये दिल उसकी याद में 
समझ नही आता दर्द प्यार करने से 
होता है या याद करने से?
Raat Bhar Jalata Raha Ye Dil 
Usaki Yaad Men,
Samjh Me Nahi Aata Dard Pyaar Karane Se 
Hota Hai Ya Yaad Karane Se?

रात Shayari Urdu और रात  शायरी Hindi



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45
रात की खामोशी रास नहीं आती,
मेरी परछाईं भी अब मेरे पास नहीं आती
Raat Ki Khamoshi Raas Nahi Aati
Meri Parchhayi Bhi Ab Mere Paas Nahi Aati

रात Shayari Urdu 

46
बात करनी थी, बात कौन करे
दर्द से दो-दो हाथ कौन करे
हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं
चाँद न हो तो रात कौन करे.
Baat Karani Thi, Baat Kaun Kare
Dard Se Do-Do Hath Kaun Kare?
Ham Sitare TuMHE Bulate Hai,
Chand Naa Ho To Raat Kaun Kare?

47

मौत का एक दिन मुअय्यन’ है
नींद क्यों रात नहीं आती
गालिब

48

मय से ग़रज़ नशात है किस
रू-सियाह को 
इक-गूना बेख़ुदी मुझे
दिन रात चाहिए 
मिर्ज़ा ग़ालिब

May Se Gharaz Nashaat Hai Kis
Ru-Siyaah Ko
Ek-Guna Bekhudi Mujhe
Din Raat Chahaiye

49

दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी 
'अख़्तर' वो बेख़ुदी के ज़माने
किधर गए 
अख़्तर शीरानी

Din Raat May-Kade Me Guzarati Thi Zindagi
"Akhtar" Wo Bekhudi Ke Zamaane
Kidhar Gaye

50
न मुदारात हमारी न अदू से नफ़रत 
न वफ़ा ही तुम्हें आई न जफ़ा ही आई
बेखुद बदायुनी

N Murad Hamari N Adu Se Nafarat
N Wfa Hi Tumhe Aayi N Zafa Hi Aayi

51

हमारे 
ख़्वाब चोरी हो गए हैं 
हमें रातों को नींद आती नहीं है❗
बख़्श लाइलपूरी

52

उस के बगैर नींद न आई तमाम रात
करवट बदल के बिताई तमाम रात
अख्तर हुसैन बख्तावर

53

इक सुब्ह है जो हुई नहीं है
इक रात है जो कटी नहीं है

54

रात भी नींद भी कहानी भी,
हाय क्या चीज है जवानी भी।
एक पैगामे-जिन्दगानी भी,
आशिकी मर्गे-नागहानी भी।।

55

अब आओ मिल के सो रहें 
तकरार हो चुकी 
आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है❗
निज़ाम रामपुरी

56
कौन कहता है उसकी याद से
 बे-खबर हूँ मैं,
मेरी आंखो से पूछ ले मेरी रात 
कैसे गुजरती है.
Kaun Kahata Hai Usaki Yaad Se 
Be-Khabar Hun Mai,
Meri ANkhon Se Punchh Lo Meri Raat 
Kaise Guzarati Hai.

57
शाम होते ही सज जाता है 
तेरी याद का बाजार,
बस इसी रौनक से हमारी 
सारी रात गुजर 
जाती है.
Sham Hote Hi Saj JATI hai 
Teri Yaad Ka Baazaar,
Bas Isi Raunak Se Hamari
 Sari Raat Guzar 
Jati Hai.

58
फिर कभी न आऊँगी तुम्हारी 
ज़िन्दगी में लौट के 
सारी ज़िन्दगी तन्हाई के लिए , 
आज की रात बहुत है
Fir Kabhi Naa Aaungi Tumhaari
Zindagi Me Laut Ke
Sari Zindagi Tanhaayi KE Liye
Aaj Ki Raat Bahut Hai

59
रातो में   घर का दरवाज़ा 
खुला रखती हूँ,
काश कोई लुटेरा आये और मेरे 
ग़मों को लुट ले जाए.
Raato Me Ghar Ka Darwaaza 
Khula Rakhati Hun,
Kash Koi Lutera Aaye Aur Mere 
Gamo Ko Lut Le Jaaye.

60

आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख़्म-ए-जिगर देखेंगे

61

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई 
हम न सोए रात थक कर सो गई❗ 
राही मासूम रज़ा

62

हर तरफ़ फ़िर तो अन्धेरा होगा
रात जब दिन के उजाले को निगल जाएगी         
डॉ. रहमन रबानी

63

रात आ कर गुज़र भी जाती है 
इक हमारी सहर नहीं होती 
इब्न-ए-इंशा

रात  शायरी Hindi 


64
रोज़ रात 'रात' की तरह चले आते हो
अंधेरा और ख्वाब लिए
Roz Raat "Raat" Ki Tarah Chale Aate Ho
Andhera Aur Khwaab Liye.

65

आँख और खाब में इक रात की दूरी रखना
ऐ-मुसव्विर मेरी तस्वीर अधूरी रखना
मैराज फ़ैजाबादी

66

चाँद खिड़की से झाकेगा आदतन…,
चांदनी फिरसे दिल जलाएगी….
रात तनहा….सहर तक जाएगी

67

रेगिस्तान की झुलसती रात के 
बारिश हो तुम
मेरा वजूद, मेरा ख्वाब, 
मेरी ख्वाहिश 
हो तुम 

68

पी के रात को हम उनको भुलाने लगे,
शराब में गम को मिलाने लगे,

दारू भी बेवफा निकली यारों,
नशे में तो वो और भी याद आने लगे..
Best-Sharab-Shayari
Pee Ke Raat Ko Ham Unako Bhulane Lage,
Sharab Me Gam Ko Milane Lage.
Daru Bewafa Nikali Yaaro,
Nashe Me To Wo Aur Bhi Yaad Aane Lage..

69
उदास रात है 
बीरान दिल की धड़कन है
ये बदनसीबी 
मुझे लेकर कहां चली आयी ❓

70

आँखों को सब की नींद भी दी ख़्वाब भी दिए
हम को शुमार करती रही दुश्मनों में रात 

71

रात आई है बलाओं से रिहाई देगी 
अब न दीवार न ज़ंजीर दिखाई देगी 
अनवर मसूद

72

खींच कर उस माह रू को आज यां लाई है रात।
यह खुदा ने मुद्दतों में हमको दिखलाई है रात॥

73

खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें.
Khamosh Shahar Ki Chikhati Raate,
Sab Chup Hai Par, Kahane Ko Hai Hazaaro Baate.

74

रात को आराम से हूँ मैं न दिन को चैन से,
हाए ऐ वहशते दिल, हाए हाए दर्द-ए-दिल.
Zahar Ki Chutaki Hi Mil Jaaye Baraye Dard-E-Dil,
Kuchh Na Kuchh To Chahiye Baba Dawa-E-Dard-E-Dil,

75

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा
Is Safar Me Need Esi Kho Gayi
Ham Na Soye Raat Thak Kar So Gayi.

76

सोयी आँखों में हलचल करते रहे,
कल रात तुम्हारे ज़िद्दी ख़याल.
Soyi Ankhon Me Halchal Karate Rahe,
Kal Raat Tumhaare Ziddi Khyaal..

77

निगाह-ए-साक़ी से पैहम छलक रही है शराब,
पिओ की पीने-पिलाने की रात आई है.
Nigah-E-Saki Se Paiham Chhalak Rahi Hai Sharab,
Peeo Ki Peene-Peelane Ki Raat Aayi Hai.

78
खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें.

Khamosh Shahar Ki Chikhati Raate,
Sab Chup Hai Par, Kahane Ko Hai Hazaaro Baate.

79
दिन ख़्वाब को पलकों पे सजाने में गुज़र जाय
रात आये तो नींदों को मनाने में गुज़र जाय 
Din Khwaab Ko Palako Pe Sajaane Me Guzar Jaaye
Raat Aaye To Neendon Ko Manaane Me Guzar Jaaye.

80
कैद है कुछ ख़्वाब इन खुली आँखों में,
न जाने कब जागती रातो का सवेरा होगा.

81
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
  मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की 
 Gulzar  

82
हिचकियाँ रात दर्द तन्हाई 
आ भी जाओ तसल्लियाँ दे दो 
नासिर जौनपुरी
Hichakiyan Raat Sard Tanhayi,
Aa Bhi Jaao Tasalliya De Do..

83

दिन गुजर जाता है, तुम्हारी यादो के साथ 
मशला रात का है खेर जाने दो.


Din Guzar Jata Hai, Tumhari Yaando Ke Sath,
Masala Raat Ka Hai KHAIR jaane Do.

84
जुगनू सहेज सकते हैं
बनना नहीं आता 
किसी की रातों को रौशन 
करना नहीं आता

85

जाम पे जाम पीने से क्या फायदा दोस्तों,
रात को पी हुयी शराब सुबह उतर जाएगी,
अरे पीना है तो दो बूंद बेवफा के पी के देख
सारी उमर नशे में गुज़र जाएगी ..
Jaam Pe Jaam Peene Se Kya Fayada Dosto,
Raat Ko Pee huyi Sharab Subah Utar Jaayegi,
Are Peena Hai To Do Bund Bewafa Ke Pee Ke Dekh,
Sari Umar Nashe Me Guzar Jaayegi.

86

जूनून–ए–इश्क़ था, 
तो कट जाती थी रात ख़्यालो में
सज़ा–ए–इश्क़ आई, तो 
हर लम्हां सदियों सा लगने लगा 

87

गिरी मिली एक बोतल शराब की, तो ऐसा लगा मुझे,
जैसे बिखरा पड़ा हो सुकून, किसी के एक रात का.
Giri Mili Ek Botal Sharab Ki, To Esa Laga Mujhe
Jaise Bikhara Pada Ho Sukun, Kisi Ke Ek Raat Ka.

88

दो-चार बातें कर ली होती,
तनहा़ रात के कह़र ढानें से पहले,
हम यूं ना भीगते तकिये के गिलाफ़,
सुबह हो जाने से पहले..

89
मोहब्बत के सुहाने दिन 
जवानी की हसीन 
राते,
जुदाई में नज़र आती हैं
 ये सब ख्वाब की 
बाते. 
Mohabbat Ke Suhaane Din 
Jawaani Ki Haseen 
Raate,
Judayi Me Nazar Aati Hai
 Ye Sab Khwaab Ki
 Baate.


रात Shayari Urdu 

90
खुशबू की तरह आया वो 
तेज हवाओं में,
माँगा था जिसे हमने दिन-रात 
दुआओं में.
Khushabu Ki Tarah Aaya Wo 
Tez Hawaaon Me
Manga Tha Jise Hmane Din-Raat 
Duaaon Me.


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91
बेचैन इस क़दर था, सोया न
रात भर.
पलकों से लिख रहा था, तेरा नाम
चाँद पर
Bechain Is Kadar Tha Soya Naa
Raat Bhar
Palakon Se Likh Raha Tha, Tera Naam
Chand Par

92
वो कह के चले इतनी मुलाक़ात
 बहुत है 
मैंने कहा रुक जाओ अभी 
रात बहुत है
Wo Kah Ke Chale Itani Mulakaat
Bahut hai
Miane Kaha Ruk Jao Abhi
 Raat Bahut Hai

93
पता है तुम्हें, मैं बहुत बातें करता हूँ,
तुम्हारी चाँद से,अक्सर रातों में.
Pata Hai Tumhe Mai Bahut Baate Karata Hun
Tumhari Chand Se Aksar Raato Me

94
मै रोता रहा रात भर मगर फैसला ना कर सका,
तू याद आ रही है, या मै याद कर रहा हूँ.
Mai Rota Raha Raat Bhar Magar Faisala Naa Kar Saka,
Tu Yaad Aa Rahi Hai, Ya Mai Yaad Kar Raha Hun.

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