पिता दिवस की शुभकामना 2017 - Father's Day in India

18 जून 2017 पितृ दिवस की शुभकामना 


18 जून 2017 रविवार को पड़ने वाले पितृ दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें आज का यह आर्टिकल उन बेटे बेटियों के लिए हैं जिनके लिए माता पिता का दर्जा संसार में सबसे बड़ा हैं. 

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Fathers Day in India

हमारा भारत उन सभी देशो से महान जहा माता - पिता का दर्जा ईश्वर के समान होता हैं. यहाँ आज भी हिन्दू परिवारों में देखने को मिलेगा की सुबह बच्चे अपने माता पिता के चरण को स्पर्श करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. हिन्दू संस्कृति में यह बात आम हैं. कुछ बच्चे तो आज भी हर रोज़ सुबह अपने माता पिता के पैर छूते है. 
हिन्दू धर्म में माता पिता की पूजा करने का रिवाज़ पुराणों में भी देखने को मिलता हैं. 
एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती के दोनों पुत्रो में सबसे बड़ा कौन हैं हम दोनों में इस बात को लेकर बहस छिड़ गयी. और यह बहस बढाती गयी की हम दोनों में सर्वश्रेष्ठ कौन हैं?
ये बहस इतनी बढ़ गयी की इसे सुलझाने के लिए दोनों भाई माता पार्वती और भगवान शिव के पास पहुंचे. और वह पहुँच कर अपनी बात माता पिता के सामने रखी. दोनों भाइयों की बात सुन कर शिव-पार्वती ने गणेश और कार्तिकेय  से कहा जो संपूर्ण पृथ्वी की सात बार परिक्रमा करके पहले हमारे पास पहुँचेगा वही सर्वश्रेष्ठ होगा. 

यह बात सुन कर कार्तिकेय खुश हो गया की मेरी सवारी  तो मयूर हैं मैं तो जल्द ही पृथ्वी की परिक्रमा  लगा लूँगा और गणेश के पास तो मूसक सवारी हैं वो तो सात चक्कर कैसे लगाएगा. यही सोच कर ख़ुशी के मारे कार्तिकेय अपने मयूर से पृथ्वी के सात चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े. 

इधर गणपति जी सोच में पड़ गए अब वो क्या करे? और वो वह से एकांत में चले गए और सोचने लगे की कैसे पृथ्वी के सात चक्कर लगाये? और इस समस्या का समाधान पाने के लिए  शांत मन से अपने माता पिता का ध्यान लगाया. और उन्हें उपाय मिल ही गया कैसे पृथ्वी के सात चक्कर लगाये. 
क्युकी कहा गया हैं की शांत मन से ध्यान लगाने से हर समस्या का समाधान मिल जाता हैं. और इसी कारण गणपति जी को भी इस का समाधान मिल गया. 

और फिर वो वह से उठ कर अपने माता पार्वती और पिता शिव के पास पहुंचे और माता पार्वती - पिता शिव के हाथो को पकड़ा और उन्हें एक ऊँचे स्थान पर बैठाया और पूरी श्रद्धा के साथ उनके चरणों को स्पर्श किया साथ ही पत्र-पुष्पों द्वारा उनकी पूजा की. और उसके बाद माता पिता की परिक्रमा करने लगे जब एक चक्कर पूरा हुआ तो शिव-पार्वती के चरण स्पर्श किया और फिर परिक्रमा लगाने लगे दूसरा पूरा हुआ तो फिर चरण स्पर्श किये इसी तरह कर के सात बार किया.


यह देख कर माता पार्वती  ने पूछा पुत्र ये  प्रदक्षिणाएँ क्यों की? तब गणपति जी ने कहा.

सर्वतीर्थमयी माता.

 सर्वदेवमयो पिता.

सारी पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो पुण्य होता है, वही पुण्य माता की प्रदक्षिणा करने से हो जाता है. यह शास्त्रवचन है. पिता का पूजन करने से सब देवताओं का पूजन हो जाता है. क्युकी  पिता देवस्वरूप हैं. अतः आपकी परिक्रमा करके मैंने संपूर्ण पृथ्वी की सात परिक्रमाएँ कर लीं हैं. 
यह सुन कर माता पार्वती और पिता शिव गणपति जी को देख मंद मंद मुस्काए और माता पिता की भक्ति देख कर  कहा आज से हर शुभ कार्यो का प्रारम्भ  गणेश पूजन से ही होगा. दोनों भाइयो में से सर्वश्रेष्ठ गणेश हैं. 

शिव-पुराण में कहा गया हैं की.

पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रक्रान्तिं च करोति यः।

तस्य वै पृथिवीजन्यफलं भवति निश्चितम्।।

"जो पुत्र माता-पिता की पूजा करके उनकी प्रदक्षिणा करता है, उसे पृथ्वी-परिक्रमाजनित फल सुलभ हो जाता है"

और इससे सिद्ध होता हैं की माता पिता की भक्ति के आगे सारी भक्ति व्यर्थ हैं.