Sunday, 19 February 2017

पढ़े ढेरों Munawwar Rana शायरी माँ के नाम

मुनव्वर राना की कलम माँ के नाम

मुन्नवर राणा शायरी की दुनिया में एक ऐसा नाम हैं जो माँ के रूप को बड़े ही सरल शब्दों  में शायरियों के द्वारा लिखते हौं और  बताते हैं. मुन्नवर राणा द्वारा लिखी माँ के लिए ये शायरियां जिनका कोई जोड़ नहीं हैं. कम से कम शब्दों में माँ के प्यार को लिखने की कला तो बस मुन्नवर राणा साहब ही जानते हैं. उनकी कलम में मानो खुद माँ का ही वास हो, उनकी कलम तो बस माँ के प्यार के लिए बनी हैं. मुन्नवर राणा द्वारा लिखी गयी माँ नामक किताब जो पुरे विश्व में मशहूर हैं. मुन्नवर राणा हमेशा माँ के प्यार के नाम से जाने जाते हैं और उनका लेखन कार्य में कोई जोड़ नहीं हैं..
munawwar-rana -shayari-on-maa

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में  मुन्नवर राणा द्वारा लिखी माँ के ऊपर शायरी के रूप में लिखी वो लाईने पढेगे जो उनके द्वारा लिखी गयी हैं और काफी मशहूर हैं . जिसे आप सोशल मिडिया पर और अन्य वेब साईटों पर जरुर पढ़ा और उनके द्वारा सुना भी होगा कुछ चुनिन्दा खास शायरी माँ से जुडी आप के लिए wahh टीम द्वारा आप के समक्ष पेश हैं . तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं.....


मुनव्वर राना की शायरी माँ के नाम 
1

चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखि है

Chalti firti hui aankhon se azan dekhi hai
Maine jannat to nahi dekhi hai maa dekhi hai

2मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है
किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है

Mujhe kadhe hue takiye ki kya jaroorat hai
Kisi ka haath abhi mere sar ke neeche hai

3इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

Is tarah mere gunaahon ko wo dho deti hai
Maa bahut gusse me hoti hai to ro deti hai


4ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे

Khud ko is bheed me tanha nahi hone denge
Maa tujhe hum abhi boodha nahi hone denge

5खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी हैं गाँव से
बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही

Khaane ki cheeze Maa ne jo bheji hai gaaon se
Baasi bhi ho gai hai to lazzat wahi rahi

6
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

Kisi ko ghar mila hisse mein ya koi dukaan aai
Main ghar mein sabse chhota tha mere hisse mein Maa aai

7
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

Labon pe uske kabhi baddua nahi hoti
Bas ek Maa hai jo kabhi khafa nahi hoti

8
ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

Ae andhere dekh le munh tera kala hogaya
Maa ne aankhe khol di ghar me ujaala ho gaya

9
मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

Maine rote hue ponchhe the kisi din aansoo
Muddaton Maa ne nahi dhoya dupatta apna

10
यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा

Yahin rahoonga kahin umra bhar na jaaunga
Zameen Maa hai ise chhod kar na jaaunga

11
कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे
माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी

Kuchh anhi hoga to aanchal me chhupa legi mujhe
Maa kabhi sar pe khuli chhat nahi rahne degi

12
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

Meri khwaahish hai ki main phir se farishta ho jaaun
Maa se is tarah lipat jaaun ki baccha ho jaaun

13
बहन का प्यार माँ की ममता दो चीखती आँखें
यही तोहफ़े थे वो जिनको मैं अक्सर याद करता था
Bahan ka pyar Maa ki mamata do cheekhati
Yahi tohafe the wo jinko main aksar yaad karta tha

14
दुआएँ माँ की पहुँचाने को मीलों मील जाती हैं
कि जब परदेस जाने के लिए बेटा निकलता है

Duaaen Maa ki pahunchaane ko meelo meel jati hai
Ki jab pardesh jane ke liye beta nikalta hai

15
बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है

Barbaad kar diya hume pardesh ne magar
Maa sabse kah rahi hai ki beta maze main hai
16
मुक़द्दस मुस्कुराहट माँ के होंठों पर लरज़ती है
किसी बच्चे का जब पहला सिपारा ख़त्म होता है

Mukaddas muskuraahat Maa ke hontho par larzati hai
Kisi bacche ka jab pahla sipaara khatm hota hai

17
जब तक रहा हूँ धूप में चादर बना रहा
मैं अपनी माँ का आखिरी ज़ेवर बना रहा

Jab tak raha hoon dhoop me chaadar bana raha
Main apni Maa ka aakhiri jewar bana raha

18
मुसीबत के दिनों में हमेशा साथ रहती है
पयम्बर क्या परेशानी में उम्मत छोड़ सकता है

Musibat ke dino me humesha sath rahati hai
Pyambar kya pareshani mein ummat chhod sakta hai

19
अब भी चलती है जब आँधी कभी ग़म की ‘राना’
माँ की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है

Ab bhi chalti hai jab aandhi kabhi  gham ki Rana
Maa ki mamta mujhe baahon me chhupa leti hai

20
दिन भर की मशक़्क़त से बदन चूर है लेकिन
माँ ने मुझे देखा तो थकन भूल गई है

Din bhar ki mashakkat se badan chur hai lekin
Maa ne mujhe dekha to thkan bhool gai hai

21
दिया है माँ ने मुझे दूध भी वज़ू करके
महाज़े-जंग से मैं लौट कर न जाऊँगा

Diya hai Maa ne mujhe Doodh bhi wajoo karke
Mahaaze-jang se main laut kar na jaaunga

22
हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए
माँ ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे
Haadson ki gard se khud ko bachaane ke liye
Maa hum apne saath bas teri dua le jayenge

23
माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

 Maa ke aage yoon kabhi khul kar nahi rona
Jahan buniyaad ho itani nami achchhi nahi hoti

24
बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता
कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता

Bujurgon ka mere dil se abhi tak dar nahi jaata
Ki jab tak jaagti rahti hai Maa main ghar nahi jaata

25
ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,
मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है

Ye aisa karz hai jo main adaa kar hi nahi sakta
Main jab tak ghar na lautoon, meri maa sazde me rahti hai

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