जाने गणेश जी का कैसे दांत टुटा और कैसे बने एकदंत - (गणेश चतुर्थी विशेष)

धर्म.आस्था से जुडे इस आर्टिकल मे जाने गणेश जी का कैसे दांत टुटा और कैसे बने श्री गणेश एकदंत और साथ ही जानते है महाभारत के युद्ध का महाकाव्य की रचना किसने की.  गणेश चतुर्थी विशेष के पोस्ट में.

जाने गणेश जी का कैसे दांत टुटा और कैसे बने एकदंत


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गणेश चतुर्थी विशेष

 जाने गणेश जी का कैसे दांत टुटा और कैसे बने एकदंत - (गणेश चतुर्थी विशेष)




हिन्दू धर्म मे किसी भी शुभकार्य को करने से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है क्यूकि श्री गणेश ही सुख करता, दुख हरता, मंगलमुत्र्री है और इनकी पूजा हर मंगलकार्य में सभी देवी, देवताओं मे सर्वप्रथम होती है.

आपने ने देखा होगा देवो के देव महादेव के पुत्र श्री गणेश का एक दांत टुटा हुआ और उन्हे सभी भक्त एकदंत के नाम से भी श्री गणेश को बुलाते हैं.

क्या कभी आप ने सोचा आखिर माता पार्वती के लाडले पुत्र गणेश का यह एक दांत कैसे टुटा क्या है राज दांत टुटने का क्या है श्री गणेश के दांत टुटने की कहानी.

भगवान गणेश के इस दांत टुटने की कई कहानियां प्रचलित है. जिन्हे जानते है आज इस आर्टिकल में कैसे टुटा श्री गणेश का दांत और बन गये एकदंत.

महाभारत लेखन 
सब से बड़ा महाभारत के युद्ध का सम्पूर्ण लेखन करने के लिए महर्षि वेदव्यास को कोई एसे व्यक्ति की तलाश थी जो इस युद्ध को लिख सके अथार्त उनके द्वारा बोले गये शब्दों को कलम के द्वारा कागज पर लिख पाये. तब उन्होने इस कार्य के लिये श्री गणेश का चयन किया.

और गणेश के पास पहुचे और अपना उदेश्य बताया सम्पूर्ण महाभारत युद्व को लिखने का तब भगवान गणेश इस कार्य के लिये तैयार हो गये.

एक शर्त 
लेकिन गणेश ने इस कार्य को करने के लिये महर्षि वेदव्यास के सामने एक शर्त रख दी. की इस महाभारत युद्व को मै लिखुगां परन्तु बिना रुके अगर आप एक पल के लिए रुके तो मै लिखना वही पर बन्द कर दुंगा. आपको महर्षि लगातार बोलना है और उसे मै लगातार लिखता रहुंगा जैसे ही आपने इस विषय पर बोलना बंद किया तो मै भी लिखना उसी पल बंद करके वापस लौट जाउंगा. 



श्री गणेश की यह शर्त महर्षि वेदव्यास ने बिना समय गवाये स्वीकार कर ली. और तब वेदव्यास जी ने कहा कि आप जो भी लिखेगे वो समझ.बुझ के साथ ही लिखेंगे यह बात श्री गणेश ने भी स्वीकार कर ली. और इस के साथ दोनो ने मिलकर महाभारत महाकाव्य लिखने की शुरुवात की.

इधर महर्षि वेदव्यास ने महाभारत के युद्ध का विस्तार पूर्वक वर्णन करने लगे और वही.वही शब्दो को सोच समझ कर गणेश जी लिखने लगे शर्त के अनुसार यह महाकाव्य बिना रुके लिखना था इस लिये जब भी महर्षि वेदव्यास को थकान महसुस होती तो श्री गणेश को एक कोई मुश्किल सा छंद बोलते और उस छंद को गणेश जी को सोच समझ कर लिखना था तो उतने समय तक वेदव्यास जी आराम कर लेते थे.

तब ही अचानक गणेश जी की कलम टुट जाती है और लिखने का कार्य रुक जाता हैं क्युकि वेदव्यास जी के बोलने की तेजी इतनी थी की कलम आखिरकार टुट ही गयी.

कलम टुटते ही लिखने का कार्य अचानक रुक गया तब गणेश ने देखा और महसुस किया की इस घटना से वेदव्यास जी के अंदर अहम की भावना उत्पन्न हो रही है.

तब भगवान गणेश ने अहम की भावना को खत्म करने तथा महाभारत के सम्पूर्ण महाकाव्य को लिखने के उदेश्य से अपने मुख का एक दांत तोड़ दिया और उस टुटे हुये दांत को स्हायी मे डुबों कर उसकी नोक से दुबारा इस ग्रंथ को लिखना प्रारम्भ कर दिया.



महाभारत के इस महाकाव्य को लिखने मे महर्षि वेदव्यास जी और गणेश जी को पुरा तीन वर्ष का समय लगा. और यह है श्री गणेश का एकदंत बनने की पहली कहानी.

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