Thursday, 26 April 2018

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं,  विलेन के किरदार से शुरू किया फ़िल्मी कैरियर और बाद में एक सफल  स्टार बने विनोद खन्ना  का जीवन परिचय” ( Vinod Khanna Biography In Hindi) के बारे में. जो आज हमारे बीच नहीं रहे. 

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जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकराएगी

तो देर कैसी आईये जानते हैं फिल्म अभिनेता, सफल राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना की बायोग्राफी के बारे में. और उससे पहले गुनगुनाते हैं इन पर फिल्माया गए एक प्यारे से नगमे को.
जब कोई बात बिगड़ जाये जब कोई मुश्किल पड जाये तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवाज़.
एक झलक विनोद खन्ना की जीवनी पर :
फ़िल्मी दुनिया का जाने माने अभिनेता विनोद खन्ना का जन्म पेशावर में 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था. इनके पिता जी का नाम किशनचंद खन्ना था और माता जी का नाम कमला था. इनके पिता का बिज़नस टेक्सटाइल का था.



भारत की आज़ादी के बाद भारत पाक के हुए बटवारे के बाद पेशावर से इनका परिवार मुंबई आ गया.

शिक्षा:
अपनी प्रारंभिक शिक्षा नासिक के एक बोर्डिग स्कूल से ली और उसके बाद स्नातक की शिक्षा  सिद्धेहम कॉलेज से पूरी की. बचपन से ही विनोद खन्ना  शर्मीले स्वभाव के थे.  

एक्टिंग का सौख इन्हें तब लगा जब एक बार पढाई के दौरान टीचर ने जबरदस्ती स्टेज पर एक कार्यक्रम  के दौरान उनसे अभिनय कराया और इसी अभिनय के बाद Vinod Khanna को एक्टिंग का चस्का लग गया. और अभिनय के प्रति इनका रुझान दिन प्रति  दिन बढ़ता गया.

फिर एक दिन एक्टर बनने की बात अपने परिवार में बताई लेकिन यह बात सुन कर इनके पिता ने नाराजगी जाहिर की क्युकि विनोद खन्ना के पिता नहीं चाहते थे की उनका बेटा फिल्मो में काम करे.

विनोद खन्ना की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi

लेकिन माँ का दिल तो हमेशा अपने बेटे के साथ होता हैं बेटे की जिद्द और सोंख के कारन आखिरकार माँ ने किशनचंद खन्ना को मना ही लिया लेकिन उन्होंने हां तो की लेकिन एक शर्त रख दी कि फिल्मो में अगर दो साल में सफल हो गए तो ठीक हैं, वरना वापस अपने  बिज़नस को अच्छे से संभालना होगा. पिता की यह शर्त मान ली.

फ़िल्मी सफ़र:
अपने पहले फ़िल्मी की शुरुआत 1968 में सुनील दत्त की आई फिल्म "मन का मीत" से की और इस फिल्म में विलेन का रोल निभाया. और इसी के साथ इनके अभिनय की चारो तरफ सराहना होने लगी और साथ ही इन्हें कई फिल्मो का ऑफर भी मिल गया और इन्होने एक साथ 15 फ़िल्में साइन कर ली.  जिसमे पूरब और पश्चिम, आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश जैसी  सुपरहिट फिल्में शामिल थीं. 

खलनायक से नायक का सफ़र:
फिर इन्होने सन 1971 में फिल्म "हम तुम" और "वो" में बतौर सोलो हीरो बन के काम किया.

फिर सन 1973 में गुलज़ार जी की फिल्म "मेरे अपने" में अभिनय किया और यह फिल्म भी कामयाब हुई. और फिर इनकी फिल्म "अचानक" आई और इस फिल्म में विनोद खन्ना ने एक मौत की सजा पाए आर्मी अफसर का रोल निभाया था जिसकी तारीफ दर्शकों ने बहुत की,  इसी के साथ वो बन गए एक कामयाब हीरो. 

अमिताभ बच्चन के साथ:
सन 1977 में अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया फिल्म "परवरिश" में और यह सुपरहिट फिल्म साबित हुई. कई फिल्मे अमिताभ बच्चन के साथ के साथ की अमर अकबर एंथनी, खूनपसीना, हेराफेरी और "रेशमा और शेरा" जैसी फिल्मे साथ साथ की.


विवाह:
विनोद खन्ना ने अपनी दो शादियाँ की थी. जिससे उन्हें तीन बेटे और एक बेटी हुई.

पहली शादी  1971 में अपने कॉलेज की दोस्त गीतांजलि से की जो एक मॉडल थी. लेकिन किन्ही कारणों उनका आपस में 1985 को  तलाक हो गया. फिर विनोद खन्ना ने अपनी दूसरी शादी 1990 में कविता से की .



राजनीतिज्ञ सफ़र:
सन 1998 में पहली बार विनोद खन्ना ने राजनीति जीवन में कदम रखा. और उसी साल 12वीं लोकसभा का चुनाव होने वाला था तब इन्होने पहली बार भारतीय जनता पार्टी टिकट पर पंजाब के गुरदासपुर से चुनाव लड़ा और विजयी रहे और संसद में पहुंचे. लगातार 1999 और 2004 में भी इसी सीट से चुनाव को जीता. 


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अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में केंद्र की बीजेपी सरकार में विनोद खन्ना पर्यटन एवं संस्‍कृति राज्‍यमंत्री बने और 2003 व 2004 में विदेश राज्‍यमंत्री का भी पद संभाला.

चौथी बार 2014 में फिर उन्‍होंने बीजेपी के टिकट पर गुरदासपुर से चुनाव में फिर जीत हासिल की और 16वीं लोकसभा के सदस्‍य बने.

संसद में इनको कई कमेटियों का सदस्य भी बनया गया था. रक्षा मामलों पर गठित स्‍टैंडिग कमेटी में  1 सितंबर, 2014 में सदस्‍य रहे, और इसके अलावा कृषि मंत्रालय की परामर्श कमेटी में भी सदस्‍य रहे.

आधात्य्म की ओर:
इसी दौरान उनका ह्रदय आधात्य्म की ओर खीचने लगा तब धार्मिक गुरु ओशो रजनीश के करीब आये और शोहरत और दौलत की इस दुनिया से दूर धर्म की राह पर चलने लगे धार्मिक गुरु ओशो रजनीश के मार्ग दर्शन में.

लेकिन यह सिलसिला ज्यादा दिनों तक नहीं चला धीरे धीरे कर के रजनीश से उनका मोह भंग हो गया और 5 वर्ष तक साथ रहने के बाद वापस अपने उसी राह पर लौट आये. अपने बॉलीवुड जगत में जहा उनका स्वागत बड़े ही गर्मजोशी के साथ हुआ. 

फिल्मों में वापसी:
और इसी के साथ मुकुल आनंद द्वारा बनायीं जाने वाली फिल्म इन्साफ का ऑफर इन्हें मिला और इस फिल्म में  Vinod Khanna ने जोरदार भूमिका अदा की और यह फिल्म पूरी तरह से रुपहले परदे पर हिट साबित हुयी. 


यादगार फ़िल्में:
  • मेरे अपने
  • मेरा गांव मेरा देश
  • कुर्बानी
  • मुकद्दर का सिकंदर
  • अमर अकबर एंथनी
  • पूरब और पश्चिम
  • रेशमा और शेरा
  • हाथ की सफाई
  • हेरा फेरी
  • दयावान
  • क्षत्रिय
  • बटवारा
  • सत्यमेव जयते
  • द बर्निंग ट्रेन
  • नेहले पे देहला
  • कुँवारा बाप, आदि 
सम्मान और पुरस्कार:
1999 में उनको फिल्मों में उनके 30 वर्ष से भी ज्यादा समय के योगदान के लिए फिल्मफेयर के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित भी किया गया. 140 से भी अधिक फिल्‍मों में विविध किरदार निभाने वाले विनोद खन्‍ना को सबसे पहले 1974 में 'हाथ की सफाई' फिल्‍म के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला. उसी साल उनको नेशनल यूथ फिल्‍म अवार्ड भी मिला. दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2017)



आखिरी सफ़र:
70 वर्षीय विनोद खन्ना  कैंसर से पीड़ित थे. और इसी कारण उनकी सेहत दिन प्रति दिन गिरती चली जा रही थी, आखिरी समय इन्हें मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भारती कराया गया लेकिन कैंसर से जूझ रहे और इसी के साथ 27 अप्रैल 2017 को  Vinod Khanna का  निधन हो गया. इनकी उम्र 70 साल की थी.


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आखिरी फिल्म:

फिल्म "एक थी रानी ऐसी भी" इनकी आखिरी फिल्म रही जो 21 अप्रैल 2017 को पर्दे पर आई और इस फिल्म की  कहानी मध्यप्रदेश की दिवंगत नेता विजयाराजे सिंधिया की जीवनी पर आधारित थी.

दोस्तों अगर विनोद खन्ना  की जीवनी - Vinod Khanna Biography In Hindi के इस लेख को  लिखने में मुझ से कोई त्रुटी हुयी हो तो छमा कीजियेगा और इसके सुधार के लिए हमारा सहयोग कीजियेगा. आशा करता हु कि आप सभी को  यह लेख पसंद आया होगा. 



धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.


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