राजेश खन्ना की जीवनी - Rajesh Khanna Biography In Hindi

सुपरस्टार राजेश खन्ना की जीवनी - Rajesh Khanna Biography In Hindi

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं,  23 साल की उम्र में पहली फिल्म "आखिरी खत" से फिल्मी  कैरियर की शुरुआत करने वाले सुपरस्टार “राजेश खन्ना की जीवनी” (Rajesh Khanna Biography In Hindi) के बारे में. जो आज हमारे बीच नहीं रहे. 


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तो देर कैसी आईये जानते हैं सुपरस्टार राजेश खन्ना की बायोग्राफी के बारे में. और उससे पहले गुनगुनाते हैं इन पर फिल्माया गए एक प्यारे से नगमे को.
कोरा कागज़ था ये मन मेरा लिख लिया नाम इस पे तेरा सूना आँगन था जीवन मेरा बस गया प्यार इस में तेरा 

एक झलक सुपर स्टार राजेश खन्ना की जीवनी पर :
जतिन खन्ना (राजेश खन्ना) का जन्म  29 दिसम्बर 1942 में हुआ था.  जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तब जतिन खन्ना का परिवार  अमृतसर आ गए और यही बस गए.



जतिन खन्ना (Rajesh Khanna) के पिता गरीब थे  जिसके कारण जतिन जी के पालन पोषण करने में दिक्कत आ रही थी तब उनके ही परिवार के चाचा चुन्नी लाल ने जतिन खन्ना को गोद ले लिया.  

लीलावती चुन्नीलाल खन्ना ने जतिन खन्ना का बहुत ही अच्छे से पालन पोषण किया किया. बाद में अंकल के कहने पर जतिन खन्ना से राजेश खन्ना नाम रख लिया और इसी नाम से पहचान बनी फ़िल्मी इतिहास में.

शिक्षा :
अपनी प्राथमिक शिक्षा सेंट सेबेस्टियन्स गोन हाई स्कूल से की और पढाई के ही दौरान इनकी दोस्ती  रवि कपूर से हुयी जिन्हें सदाबहार जितेन्द्र के नाम से जानते हैं. दोनों ने साथ ही पढाई की.
अभिनय में रूचि:
राजेश खन्ना को अभिनय में शुरू से ही रूचि रही जिसके कारण स्कूल में ही बने थिएटर में अभिनय को सिखना शुरू किया और इसी के साथ उसमे अभिनय करने लगे.

कॉलेज के दिनों में नाटक प्रतियोगिता में भी भाग लेते थे और इन्होने कई पुरस्कार जीते.

स्पोर्टस कार में सफ़र: 
थिएटर और फिल्मों में काम पाने लिए उन्होंने काफी संघर्ष किये.  निर्माताओं के दफ्तरों के चक्कर लगते थे. लेकिन इनकी शानो शौकत में कोई कमी नहीं थी हमेशा स्पोर्टस कार में ही सफ़र करते थे और जाते थे. उस समय इतनी महँगी गाड़ी से काम की तलाश करना एक बहुत बड़ी बात थी. उस दौर के चर्चित हीरो के पास इस तरह की कार नहीं होती थी.

कैरियर की शुरुआत:
वर्ष 1966 में Rajesh Khanna ने अपने 23 साल की उम्र में पहली फिल्म "आखिरी खत" से फिल्मी  कैरियर की शुरुआत की. 

उसी के बाद जीपी सिप्पी ने अपनी फिल्म "राज" में साइन किया और इस फिल्म में अदाकारा की भूमिका निभा रही थी उस दौरान की बड़ी स्टार बबीता. और इसी के साथ Rajesh Khanna तीन कामयाब फिल्मो में काम किया.

आराधना:
1969 में आई फिल्म आराधना ने असली पहचान दिलाई राजेश खन्ना को  और "प्लेटिनम जयंती" मना-कर सुपरहिट फ़िल्म साबित हुयी और रातो रातो स्टार बना दिया और इसी के साथ फ़िल्मी जगत के सुपरस्टार का खिताब भी उन्हें मिल गया.



सुपरहिट फ़िल्में :
वर्ष 1969 से लेकर वर्ष 1972 तक में 15 सुपरहिट फ़िल्में बनायीं और कामयाबी के शिखर पर रहे. 


आराधना, इत्त्फ़ाक़, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, खामोशी, कटी पतंग, आन मिलो सजना, ट्रैन, आनन्द, सच्चा झूठा, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी.

राजेश खन्ना और मुमताज़ की जोड़ी:
मुमताज़ के साथ Rajesh Khanna ने आठ फ़िल्मों में साथ साथ काम किया और सभी फिल्म हिट रही . दोनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती रही उस दौरान. काम करते वक्त दोनों में अच्छा तालमेल रहता था. 

डिम्पल से शादी:
राजेश खन्ना अंजू महेंद्रू से अपनी शादी करना चाहते थे. जो उनके साथ लगभग 7 वर्षों तक रही लेकिन अंजू महेंद्रू ने उनसे शादी नहीं की तब राजेश खन्ना ने अपनी शादी डिंपल कपाड़िया से कर ली. 



डबल रोल:
Rajesh Khanna ने अपने फ़िल्मी कैरियर में 12 फिल्म ऐसी बनायीं जिसमे उनकी भूमिका दोहरी (डबल रोल) थी. 

  1. राज़
  2. आराधना
  3. धर्म और कानून, 
  4. कुदरत, 
  5. सच्चा झूठा, 
  6. हमशक्ल, 
  7. हम दोनों, 
  8. ऊँचे लोग, 
  9. महबूबा, 
  10. भोला भाला, 
  11. दर्द, 
  12. महा चोर.   

 काका: 
 राजेश खन्ना को पूरी फिल्म इंडस्ट्री बहुत प्यार मिलता था. और लोग इन्हें प्यार से "काका" कह कर बुलाते थे. और उसी दौरान एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध हो गयी थी "ऊपर आका और नीचे काका" की.

पुरस्कार:
  • 1971 में, फिल्म सच्चा झूठा के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म अनुराग के लिए फिल्मफेयर विशेष अतिथि अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1975 में,फिल्म अविष्कार के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1991 में, भारतीय फिल्म उद्योग में 25 वर्ष पूरे होने के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2005 में, फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (स्वर्ण जयंती समारोह) से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म बावर्ची में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1974 में, फिल्म नमक हराम में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1987 में, फिल्म अमृत में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 2005 में, प्राइड ऑफ फिल्म इंडस्ट्री अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2009 में, आईआईएफए (आईफा) लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
  • 2009 में, ऑल इंडिया फिल्म वर्कर्स एसोसिएशन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2013 में, पद्म भूषण पुरुस्कार(मरणोपरांत)


अंतिम समय:
राजेश खन्ना का स्वास्थ्य 2011 से लगातार और ख़राब  रहने लगा था उन्हें कैंसर की बीमारी थी. 23 जून  2012 में उनकी सेहत और बिगड़ने लगी तब उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया और वह इलाज के बाद 8 जुलाई को छुट्टी मिल गयी लेकिन फिर 14 जुलाई को उनकी तबियत बिगड़ने तब फिर से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया.



उसके बाद 18 जुलाई 2012 को थोडा आराम मिला तो वापस अपने घर आ गए लेकिन 18 जुलाई 2012 को अपने बंगले पर ही राजेश खन्ना का निधन हो गया. 

अंतिम संस्कार:
जैसे ही  इनके निधन की खबर मीडिया के द्वारा लोगो को हुयी तब राजेश खन्ना के प्रशंसकों की भारी भीड़ बान्द्रा स्थित आशीर्वाद बँगले पर जुटनी शुरू हो गयी उनके अंतिम दर्शन के लिए.   

और इनका अंतिम संस्कार विले पार्ले के पवन हंस शवदाह गृह में  19 जुलाई को 11:10 बजे हुआ. जिसमे 10 लाख से भी ज्यादा लोग रहे. जिसमे उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी रिंकी खन्ना और दामाद अक्षय कुमार, फ़िल्म अभिनेता निर्देशक मनोज कुमार, फ़िल्मस्टार अमिताभ बच्चन तथा उनके पुत्र अभिषेक बच्चन सहित कई फ़िल्मी और हस्तियाँ रही.

मुखाग्नि:
राजेश खन्ना की चिता को दामाद अक्षय कुमार के नौ वर्षीय पुत्र आरव ने दी.  


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