Tuesday, 14 February 2017

बाल गंगाधर तिलक के 15 सुविचार

स्वराज के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

बाल गंगाधर तिलक जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना बहुत बड़ा बलिदान दिया और वो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जनक भी थे.

जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में सहायता की. वो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. और साथ ही साथ भारतीय इतिहास,  हिन्दू धर्म, संस्कृत,  गणित और खगोल विज्ञानं जैसे विषयों के विद्वान भी थे.


15-Inspiring-Quotes-By-Bal-Gangadhar-Tilak

तो दोस्तों आईये पढ़ते बहुमुखी प्रतिभा के धनी बाल गंगाधर तिलक के अनमोल विचारो को.


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Bal Gangadhar Tilak Best 15  Quotes in Hindi  
1  स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा ।

2प्रगति स्वतंत्रता में निहित है. स्वशासन के बिना न औद्योगिक प्रगति संभव है, और न ही शैक्षिक योजना … राष्ट्र के लिए उपयोगी होगी… भारत की आजादी के लिए प्रयास करना सामाजिक सुधारों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

3ये सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है लेकिन ये भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने की शक्ति नहीं है।

4महान उपलब्धियाँ कभी भी आसानी से नहीं मिलतीं और आसानी से मिली उपलब्धियाँ महान नहीं होतीं।

5एक अच्छे अखबार के शब्द अपने आप बोल देते हैं।



आधुनिक भारत के निर्माता बाल गंगाधर तिलक  के 15 सुविचार 
6 आपका लक्ष्य किसी जादू से नहीं पूरा होगा बल्कि आपको ही अपना लक्ष्य प्राप्त करना पड़ेगा. कमजोर ना बनें, शक्तिशाली बनें और यह विश्वास रखें की भगवान हमेशा आपके साथ है।

7अगर आप रुके और हर भौंकने वाले कुत्ते पर पत्थर फेंकेंगे तो आप कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचेंगे. बेहतर होगा कि हाथ में बिस्कुट रखें और आगे बढ़ते जायें।

8मानव स्वभाव ही ऐसा है कि हम बिना उत्सवों के नहीं रह सकते. उत्सव प्रिय होना मानव स्वभाव है. हमारे त्यौहार होने ही चाहियें।

9एक बहुत पुरानी कहावत है की भगवान उन्ही की सहायता करता है, जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं।

10यदि हम किसी भी देश के इतिहास को अतीत में जाएं , तो हम अंत में मिथकों और परम्पराओं के काल में पहुंच जाते हैं जो आखिरकार अभेद्य अन्धकार में खो जाता है।



15 Powerful Quotes By Lokmanya Tilak 
11 भारत का तब तक खून बहाया जा रहा है जब तक की बस कंकाल ना शेष रह जाये।
12जीवन एक ताश के खेल की तरह है, सही पत्तों का चयन हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमारी सफलता निर्धारित करने वाले पत्ते खेलना हाथ में है।

13ईश्वर की यही इच्छा हो सकती है कि मैं जिस उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करता हूँ वो मेरे आजादी में रहने से ज्यादा मेरी पीड़ा में अधिक समृद्धि हो।

14भारत की गरीबी पूरी तरह से वर्तमान शासन की वजह से है।

15धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना  नहीं है।  असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है।

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