Tuesday, 21 February 2017

मस्ती भरी होली की कवितायें

कविताओं की लाईन-होली के रंग-बुरा ना मानो होली हैं 

वैसे तो भारत में मनाएं जाने वाले अलग-अलग त्यौहारों का अपना ही  एक विशेष महत्व और अलग आनंद और उल्लास होता हैं. होली सबसे नटखट और मस्ती भरा त्यौहार हैं. इस दिन अपनी सभी वर्षों पुराने मतभेद भुला कर एक दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं.
2017-holi-kaveeta-rachana

होली का का मस्त त्यौहार हो  मस्ती की बात न हो तो होली का मतलब ही नहीं बनता.  क्युकि होली तो रंगों से भरी वो थैली हैं जिसमे सभी तरह की रंगों से रंगी मस्ती भरी हैं होती हैं. तो क्यों ना इस मस्ती से भरी होली में हम सब एक रंग में रंग जाए . और बोले एक आवाज़ में "बुरा ना मानो होली हैं" "मिल जुल खेले होली रे"

13 मार्च 2017  को पड़ने वाली इस होली पर आप के लिए विशेष इस आर्टिकल में होली से जुडी कुछ खास रचनाओं को प्रस्तुत कर रहा हु . जो आप को बेहद पसंद आएगी जिसे अलग अलग लेखकों और रचनाकारों ने लिखा हैं. जिसे पढ़ कर आप भी . शब्दों के रंगों से सराबोर हो जायेंगे. इन सभी कविताओं की लाईनों में होली के रंगों के साथ साथ गोजिया की मिठास का आन्नद उठाएंगे.
 तो देर कैसी पढ़ते हैं इन होली की खास रचनाओं  को जो कई सोशल मिडिया और कई वेब साईट और किताबो द्वारा  इक्कठी की गयी हैं खास आप के लिए होली की शुभकामनाओं के साथ. Happy Holi 2017  
1
Holi Hai Aur Dhum Machi Hain.   नीलम जैन 

होली है और धूम मची है
नई उमंग से धरा सजी है

प्रात: गुलाबी किरणों का है
रंगो से है छुपा छुपाई
आओ सखी री भीगी मेंहदी
फिर से ऋतु होली की आई

होली है और धूम मची है
नई उमंग से धरा सजी है

लहरों-सा मन इत उत डोले
नटखट हो बरसा रंग रास
आलिंगन में लिपटी चाहें
बौछारों से पुलकित गात

होली है और धूम मची है
नई उमंग से धरा सजी है

लहराया जो पवन हिंडोला
चुनरी का आँचल विस्तार
ध नि ध प बूँदे टपकीं
मुस्काता बैठा अभिसार

होली है और धूम मची है
नई उमंग से धरा सजी है







3
Rang Rang Radha Huyi, Kanha Huye Gulal पूर्णिमा वर्मन

रंग रंग राधा हुई, कान्हा हुए गुलाल
वृंदावन होली हुआ सखियाँ रचें धमाल

होली राधा श्याम की और न होली कोय
जो मन रांचे श्याम रंग, रंग चढ़े ना कोय

नंदग्राम की भीड़ में गुमे नंद के लाल
सारी माया एक है क्या मोहन क्या ग्वाल

आसमान टेसू हुआ धरती सब पुखराज
मन सारा केसर हुआ तन सारा ऋतुराज

बार बार का टोंकना बार बार मनुहार
धूम धुलेंडी गाँव भर आँगन भर त्योहार

फागुन बैठा देहरी कोठे चढ़ा गुलाल
होली टप्पा दादरा चैती सब चौपाल

सरसों पीली चूनरी उड़ी़ हवा के संग
नई धूप में खुल रहे मन के बाजूबंद

महानगर की व्यस्तता मौसम घोले भंग
इक दिन की आवारगी छुट्टी होली रंग

अंजुरी में भरपूर हों सदा रूप रस गंध
जीवन में अठखेलियाँ करता रहे बसंत


4
Devar Bhabhi Jija Sali, Kare Thitholi Khele Holi कविता सिन्हा 

फागुन मास रंगीला आया
होली का उत्सव है छाया
मस्ताना मदमाता मौसम
झूमें नाचें गायें सब जन

रंग गुलाल के बादल छाये
रंगो में सब लोग नहाये
देवर भाभी जीजा साली
करें ठिठोली खेलें होली

बोले होली है भई होली
खायें गुझिया और मिठाई
घुटे भांग और पिये ठंडाई
गले मिलें जैसे सब भाई

भांति भांति के रंग लुभावन
प्रेम का रंग सबसे मन भावन
प्रेम के रंग में सब रंग जाएँ
जीवन को खुशहाल बनाएँ

खेलें सभी प्रेम से होली
बोलें सभी स्नेह की बोली
मिलें गले बन के हमजोली
ऐसी है अनुपम ये होली


5
Abir Barse Gulal Barese डॉ. प्रेम जनमेजय 

देख, फगवा के रंग बरसे
अबीर बरसे, गुलाल बरसे

आई हुडदंगो की टोली
गली गली खेल रही होली
फगवा की पिचकारी संग
सबका, मन हरषे, तन हरषे।

देख, फगवा के रंग बरसे
अबीर बरसे, गुलाल बरसे।

रात रात भर, जाग जाग कर
रंग प्रेम के घोल घोल कर
उबाले अबीर, पुकारे गोरी
रंग खेल हमसे, खेल हमसे

देख, फगवा के रंग बरसे
अबीर बरसे, गुलाल बरसे।



Ati Holi  दीपा जोशी

आयी होली आयी बजने लगे
उमंग के साज
इन्द्रधनुषीय रंगों से रंग दो
पिया आज

न भाए रंग अबीर का
न सोहे रंग गुलाल
नेह के रंगों से पिया रंग दो
चुनरिया लाल

न जानूँ बात सुरों की
है अनजानी हर ताल
होली के मद में नाचूंगी तुम संग
हो बेसुध बिन साज

बाट तुम्हारी मैं जोहुंगी
नयन बिछाए हर राह
भूल न जाना बात मिलन की
आई होली आज





8
Holi Sa Tyauhaar Na Milata landon Aur Shanghai Me. संतोष कुमार सिंह 

होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।
आता है आनंद बहुत ही, होली की ठंडाई में।।

सब मुख से लगा गुलाल रहे।
रंग भरि-भरि लोटा डाल रहे।।
छुप कर बैठा था भोला भी, ढूँढा उसे रजाई में।
होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।

रंग से कोई रहा न डर।
खेलें बालक, नारी- नर ।।
गुझियों का आनन्द अलग है, मिले न किसी मिठाई में।
होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।।

ब्रज में खूब मची होली।
गलिन-गलिन घूमें टोली।।
द्वेष भावना मिटे ह्रदय से, मान बढ़े लघुताई में।
होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।।

गोरी के गाल गुलाल छुए।
जो गाल थे गोरे लाल हुए।।
लगता है ज्यों होली होती, राधा और कन्हाई में।
होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।।

झूम रहे सब गीतों पर।
डाल रहे रंग मीतों पर।।
कपड़े रंगे, रंगे चौबारे, कुछ जन लगे सफ़ाई में।
होली-सा त्योहार न मिलता, लंदन और शंघाई में।।


9
Masti Me Dub Jao Ki Aaj Holi Hain. चंपालाल चौरडिया "अश्क" 

रंग और गुलाल लगाओ कि आज होली है
चंग और मृदंग बजाओ कि आज होली है

मस्ती का मौसम है मस्ती का आलम है
मस्ती में डूब जाओ कि आज होली है

फागुन का मौसम है पुरवाई बौराई
बौराए गीत सुनाओ कि आज होली है

मय भी है जाम भी है सागर भी और साकी भी
भर भर के जाम पिलाओ कि आज होली है

गिले और शिकवे सभी आज भूल जाओ 'अश्क'
हँस के गले से लगाओ कि आज होली है


Holi Ka Parv Suhana सुरेशचन्द्र ‘विमल’

होली का पर्व सुहाना यह,
सारी खुशियाँ घर लाना है।
अब निशा दुखों की विदा हुई,
सुरभित दिनकर फिर आया है॥

धर्म, जाति, भाषा के हम,
वाद – विवादों में पड़कर।
अपनों को थे हम भूल गए,
थे भटक गए थोड़ा चलकर॥

मंदिर – मस्जिद में हम अटके,
मानवता को विस्मृत करके।
निज स्वार्थ जाल में फंसे रहे,
मन – मंदिर को कुलषित करके॥

पर यह सब क्षणिक भुलावा था,
स्निग्ध चाँदनी फिर आई।
हम फिर अतीत में लौट चले,
फिर बही सुगंधित पुरवाई॥

राग – द्वेष विस्मृत करके,
आपस में हम पुनः मिले।
सारी कटुता को दूर भगा,
प्रेम – पुष्प मन पुनः खिले॥

हम सभी दिवाकर की किरणें,
जो हैं आपस में सभी एक।
जग को आलोकित करती हैं,
बात दिखती हैं जो अनेक॥

हम सब सागर की बूँदें हैं,
जिनका जीवन बहते रहना।
सबको जीवन देना लेकिन,
अपनी विपदाएँ खुद सहना॥

आओ जीवन में रंग भरें,
सतरंगी दुनिया में जाकर।
आपस में मिल – जुलकर रहें और,
सबको जीवन में अपनाकर॥

होली का पर्व तुम्हें शुभ हो,
जीवन के सब सुख तुम्हें मिलें।
घर आँगन सुरभित रहें और,
इच्छित मन के सब पुष्प खिलें॥

मर्यादाओं के तुम बन प्रतीक़
जीवन सरिता के बनो कमल।
नभ में चंदा से चमको तुम,
यश – कीर्ति तुम्हारी रहे ‘विमल’॥
  • दोस्तों होली सी जुडी और ज्यादा रचनाओं को पढ़ना चाहते हैं तो आप इस वेब साईट को जरुर देखे  Anubhuti Hindi
Previous Post
Next Post

About Author

0 comments: