Sunday, 1 April 2018

जाने कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी को - Kamaladevi Chattopadhyay Biography

कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी – Kamaladevi Chattopadhyay Biography

दोस्तों आज के आर्टिकल Biography में जानते हैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक,  नारी आन्दोलन की पथ प्रदर्शक “कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी” (Kamaladevi Chattopadhyay Biography in Hindi) के बारे में.

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दोस्तों आईये अब जानते हैं  कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी से जुडी कुछ खास बातो को “Wahh Hindi Blog” के द्वारा लिखे गए इस लेख में.

  • कमलादेवी चट्टोपाध्याय कौन थी?
पद्म भूषण से सम्मानित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक,  भारतीय हस्तकला के क्षेत्र में नव-जागरण लाने वाली गांधीवादी महिला, नारी आन्दोलन की पथ प्रदर्शक, कला और साहित्य की समर्थक तथा सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाली कमलादेवी चट्टोपाध्याय जो महात्मा गांधी के आह्वान के चलते वे राष्ट्र सेवा से जुड़ गईं थीं.  और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र की सेवा में लगा दी.

  • जीवन परिचय :
कमलादेवी चट्टोपाध्याय का जन्म कर्नाटक में स्थित मैंगलोर में 3 अप्रैल 1903 को हुआ.  इनके पिता का नाम अनन्त धारेश्वर था जो उस समय मंगलोर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के रूप में कार्य करते थे. और उनकी  माता का नाम गिरिजाबाई था जो पढ़ी-लिखी, संस्कारी और निर्भीक महिला थीं. कमलादेवी का परिवार एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवारों में से एक था.



वे  अपने माता-पिता की चौथी संतान थी और सबसे छोटी पुत्री थीं. शिक्षा और अच्छे संस्कार उनके घर वातावरण में घुला मिला सा था यहाँ तक उनकी दादी  स्वयं प्राचीन भारतीय दर्शन की विद्वान थी. इसे वातावरण पालन-पोषण कारण कमलादेवी चट्टोपाध्याय बचपन से ही तर्कशील और स्वावलंबी थीं.

  • शिक्षा और विवाह :
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मंगलोर से ली  इसी दौरान 12 वर्ष की आयु में उनका बालविवाह कृष्णा राव के साथ वर्ष 1917 में  करा दिया गया था, लेकिन इस विवाह के दो वर्ष के बाद ही वर्ष 1919 में कृष्णा राव का निधन हो गया इसी कारण वे स्कूली शिक्षा पूर्ण करने से पहले ही वो विधवा हो गयी थी.

और इसके बाद कमलादेवी ने सरोजिनी नायडू के छोटे भाई हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय से वर्ष 1919 में अपना दूसरा विवाह कर लिया था. जो उन्हें पसंद थे. हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय  कला, संगीत, कविता और साहित्य आदि में काफी रूचि रखते थे.

विवाह के कुछ दिनों के बाद लन्दन चले गए. और इसी के साथ उन्होंने लन्दन यूनिवर्सिटी के बेडफ़ोर्ड कॉलेज से समाजशास्त्र की डिग्री प्राप्त की.

विवाह के कुछ और दिन बित जाने के बाद उन्हें एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रामकृष्ण चट्टोपाध्याय रखा गया. हरेन्द्रनाथ और कमलादेवी के विचार आपस में लगातार मेल ना खाने के कारण दोनों में तलाक हो गया. और उसके बाद उन्होंने प्राचीन भारतीय पारम्परिक संस्कृत ड्रामा कुटीयाअट्टम (केरल) की शिक्षा ली और उस पर  अपना गहन अध्ययन किया.

सन 1923 में महात्मा गाँधी के द्वारा चलाये जा रहे असहयोग आन्दोलन में शामिल होने के लिए लन्दन से भारत लौट आई, और इसी के साथ और इसी के साथ उन्होंने अपना पहला कदम रखा अपनी मात्रभूमि की सेवा के लिए.

  • सेवादल की सदस्यता :
और उन्होंने गाँधी जी द्वारा चलाये जा रहे संगठन के सेवादल में अपनी सदस्यता ले ली, और वह जल्दी ही  महिला विभाग की प्रमुख बन गईं.  उनका और कार्य क्षेत्र बढ़ गया जिसमे उन्हें सभी उम्र की महिलाओं, लड़कियों को दल में शामिल करना उन्हें प्रशिक्षित करना था.

कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी – Kamaladevi Chattopadhyay Biography


1926 के दौरान उनकी मुलाकात अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (AIWC) की संस्थापिका मार्गेट ई कौंसिन्स से हुई. जो इनसे काफी प्रभावित हुयी, जिसके कारण इन्हें  मद्रास प्राविंशियल लेजिस्लेटिव असेंबली में स्थान दिया. और वे इसके बाद भारत की प्रथम महिला बन गयी जिन्हें सदन में लेजिस्लेटिव सीट (सवैधानिक सीट) प्राप्त था.

  • आल इण्डिया वुमन कॉफ्रेंस का गठन :
1927 में उन्होंने आल इण्डिया वुमन कॉफ्रेंस की स्थापना की जो समय के साथ-साथ यह संगठन आगे बढ़ने लगा और बाद में यह  राष्ट्रीय संगठन बन गया जिसकी  देश भर में तमाम शाखाएँ फ़ैल गयी.

  • नमक आंदोलन :
1930 गाँधी जी द्वारा चलाया जा रहा नमक आंदोलन में भी उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और इसी लिए उन्हें बाम्बे प्रेसीडेंसी में  नमक कानून तोड़ने (गन्दा नमक) बेचने के मामले में  गिरफ्तार कर लिया गया.  और वो इस आन्दोलन में गिरफ्तार होने वाली वे पहली महिला थीं.

  • कारावास :
अंग्रेजो के खिलाफ़ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कमलादेवी चट्टोपाध्याय चार बार जेल गईं,  और पांच सालों तक कारावास की सजा काटी.

  • नमक आन्दोलन :
1938 के दौरान  वे गाँधी जी के साथ सक्रिय रूप से नमक आन्दोलन में भाग लिया, और बम्बई के समद्र तट पर नमक को बनाया.

  • हस्तशिल्प तथा हथकरघा कला का विकास :
कमलादेवी चट्टोपाध्याय अंग्रेजो के खिलाफ़ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका को निभाने के साथ साथ उन्होंने हस्तशिल्प तथा हथकरघा कलाओं को नयी दिशा दी. वो देश की पहली महिला थी जिन्होंने भारतीय हस्तशिल्प तथा हथकरघा की कलाओं को देश ही नहीं विदेशों तक पहचान दिलाई. और इस क्षेत्र में उन्होंने अपना बहुत ही बड़ा योगदान दिया.

  •  आजादी के बाद :
अंग्रेजी हुकूमत से भारत की आज़ादी मिलने तक वे लगातार इस क्षेत्र के विकास में लगी रही और  सन 1952 में उन्हें  ‘आल इंडिया हेंडीक्राफ्ट’ का प्रमुख बनाया दिया गया.

  • सांस्कृतिक और आर्थिक संस्थनों की स्थापना में योगदान :
उन्होंने भारत में कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आर्थिक संस्थनों की स्थापना में अपना योगदान दिया. इससे हस्तशिल्प और को-ओपरेटिव आंदोलनों को बढ़ावा मिला, जिसके कारण भारतीय की जनता को सामाजिक स्तर और आर्थिक रूप से विकसित होने का अवसर प्राप्त हुआ.

भारत के अनेको  प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों के विकास और स्थापना में अपना योगदान दिया जिनमे से कुछ इस प्रकार हैं .
  • नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा,
  • संगीत नाटक अकेडमी,
  • सेन्ट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम
  • क्राफ्ट कौंसिल ऑफ इंडिया


  • लेखन के क्षेत्र में योगदान :
कमलादेवी चट्टोपाध्याय को लिखने का भी सौख था और उन्होंने कई पुस्तके लिखी जो लोगो में काफी चर्चित हुयी और लोगो ने उनके द्वारा लिखी पुस्तकों को काफी सराहा
  • द अवेकिंग ऑफ इंडियन वोमेन
  • जापान इट्स विकनेस एंड स्ट्रेन्थ
  • अंकल सैम एम्पायर
  • ‘इन वार-टॉर्न चाइना
  • टुवर्ड्स ए नेशनल थिएटर’

इसी तरह उन्होंने कई  पुस्तकें  लिखीं और इसी के साथ लेखन कार्य में भी अपना महत्वपुर योगदान दिया.

  • सम्मान और पुरस्कार :
#= वर्ष 1955 पद्म भूषण
#1966 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया
#सामुदायिक नेतृत्व के लिए वर्ष  से सम्मानित किया गया था
#संगीत नाटक अकादमी की द्वारा ‘फेलोशिप और रत्न सदस्य’ से सम्मानित किया गया
#वर्ष 1974 में  संगीत नाटक अकादमी के द्वारा  ‘लाइफटाइम अचिवेमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
#वर्ष 1977 में यूनेस्को ने हेंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया.
#वर्ष 1987 पद्म विभूषण
#शान्ति निकेतन ने अपने सर्वोच्च सम्मान ‘देसिकोट्टम’ से सम्मानित किया.

  • अंतिम समय :
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक, नारी आन्दोलन की पथप्रदर्शक कमलादेवी चट्टोपाध्याय का निधन 29 अक्टूबर 1988 में हो गया.

दोस्तों आज के आर्टिकल Biography में आपने जाना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक,  नारी आन्दोलन की पथ प्रदर्शक “कमलादेवी चट्टोपाध्याय की जीवनी” (Kamaladevi Chattopadhyay Biography in Hindi) के बारे में. आशा करता हूँ की आपको  यह ज्ञानवर्धक लेख जरुर पसंद आया होगा.

अगर इसे लिखने में हमसे कोई त्रुटी या भूल हुयी हो तो छमा कीजियेगा इस लेख को सुधारने में हमारी मदद कीजियेगा धन्यवाद आप सभी पाठको का आपका अपना  मनु शर्मा.



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