Munawwar Rana Ki Ghazal / मुनव्वर राना ग़ज़ल

Betiya Dhaan Ke Paudho Ki Tarah Hoti Hai

मुन्नवर राणा की कलम जैसे जादू से भरी हो. उनके द्वारा लिखी हर लाइन जैसे कागज़ से बाहर आके  बोलती हो .उनके लिखे हर शब्दों में जादू हैं. वेसे तो उनके द्वारा माँ पर बहुत सी बाते लिखी हैं . और उनकी पहचान माँ से ही हैं पर आज इस पोस्ट में  आप को  मुन्नवर राणा की कलम से बेटियों पर लिखी एक ग़ज़ल पेश कर रहा हु इस आर्टिकल के माध्यम से. पुरे विश्वास से कहता हु ये ग़ज़ल आप के दिल को छू जाएगी क्युकि  "बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं" इस ग़ज़ल की सच से भरी ये एक लाइन तो  दिल को छू जाती हैं. 
Betiya-Dhaan-Ke-Paudho-Ki-Tarah-Hoti-Hai

तो आईये चलते हैं और पढ़ते हैं इस पोस्ट के माध्यम से मुन्नवर राणा की कलम से लिखी ये ग़ज़ल और अगर आप को भी बेटियां प्यारी लगती हैं तो शेयर करे इसे फेसबुक और अन्य सोशल मिडिया की साइटों पर "क्युकि बेटी हैं तो कल हैं"


बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं
घर की शाख़ों पे ये चिड़ियों की तरह होती हैं

सहमी-सहमी हुई रहती हैं मकाने दिल में
आरज़ूएँ भी ग़रीबों की तरह होती हैं

टूटकर ये भी बिखर जाती हैं एक लम्हे में
कुछ उम्मीदें भी घरौंदों की तरह होती हैं

आपको देखकर जिस वक़्त पलटती है नज़र
मेरी आँखें , मेरी आँखों की तरह होती हैं

बाप का रुत्बा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन
जितनी माँएँ हैं फ़रिश्तों की तरह होती हैं