60+ जिस्म शायरी 2 लाइन - जिस्म Status


60+ जिस्म शायरी 2 लाइन - जिस्म Status



दोस्तों हिंदी उर्दू शायरी के इस Post की Topic हैं "जिस्म Shayari" . इसमें आप पढ़ सकते हैं जिस्म शायरी 2 लाइन, जिस्म शायरी in Urdu, जिस्म Statusजिस्म शायरी Hindiजिस्म शायरी 4 लाइन, पर बनी बेजोड़ शानदार शायरी को, मित्रो आशा करता हूँ कि यह पोस्ट आप सभी शायरी के चाहने वालो को बेहद पसंद आएगी.

Jism-Shayari-2-Line
Jism Shayari 2 Line


दोस्तों आज की पोस्ट खास शब्द " जिस्म " को लेकर बनाया गया हैं. इस पोस्ट में आप अपने पसंद की जिस्म पर शायरी को पढ़ सकते हैं क्युकि कहा गया हैं कि.. 

प्यार दो जिस्म का नहीं  रूहों का मिलन हैं.

तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं और दोस्तों को शेयर करते हैं जिस्म शायरी 2 लाइन, जिस्म शायरी in Urdu, जिस्म Status, के इस आर्टिकल को. 

1
तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको
तमाम खेल मोहब्बत में इंतिज़ार का है.

2
रात को वो थकन से लड़ता है
जिस्म दिन भर जेहन से लड़ता है.

3
फ़िकर तेरी भी होती है 
मुझको कभी-कभी,

न जाने किस मोड़ पर तुझको छोड़ जाये 
तेरे जिस्म को चाहने वाले.

4
तमन्ना तेरे जिस्म की होती तो 
छीन लेते दुनिया से,

इश्क तेरी रूह से है 
इसलिए खुदा से मांगते हैं तुझे.

5
अब उसे न सोचू तो जिस्म टूटने सा लगता है,
एक वक़्त गुजरा है उसके नाम का नशा करते-करते.

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न्हे भी पढ़े:-

6
जब यार मेरा हो पास मेरे, 
मैं क्यूँ न हद से गुजर जाऊँ, 

जिस्म बना लूँ उसे मैं अपना, 
या रूह मैं उसकी बन जाऊँ.

7
सिझ रहे हैं अरमान गर्म जिस्म की सिगड़ी में,
सर्द रातों में दिल की आँच एकदम बराबर है.

8
रूह की आड़ में जिस्म तक नोच खाते हैं लोग,
प्यार के नाम पर हवस की आग बुझाते हैं लोग.

9
इन्सान के जिस्म का सबसे 
खुबसूरत हिस्सा दिल है,

और अगर वो ही साफ़ ना हो तो 
मकता चेहरा किसी काम का नही.

10
इंतजार तो प्यार में
वही कर सकता है

जिसमें सिर्फ दिल से
प्यार किया हो जिस्म से नहीं.

 जिस्म शायरी Hindi

11
जो मेरे दिल में है तेरे दिल
में भी वही आरज़ू चाहिए,

मोहब्बत में मुझे सिर्फ
जिस्म नहीं तेरी रूह चाहिए.

12
मै दिल हूँ तुम सांसे, मै जिस्म हुँ,
तुम जान मै चाहत हुँ तुम इबादत, 
मै नशा हुँ तुम आदत.


13
सच पूछो तो एक बात बताऊँ?
अब जिस्म का तमाशा है , 
मोहब्बत मर चुकी है.

14
कौन कहता है कि
तुम दूर हो मुझसे❓
मैं जिस्म हूं तो जान हो  तुम मेरी.

15
महकता हुआ जिस्म तेरा गुलाब जैसा है,
नींद के सफर में तू ख्वाब जैसा है,
दो घूँट पी लेने दे तेरी आँखों की मस्तियाँ.

16
अपनी रूह को तेरे जिस्म में बसा लेंगे,
नजदिकिया होगी तेरे मेरे बिच,

और चुम के तेरे होठो की  
बेकरारी हम बड़ा लेंगे,

फिर करेंगे महसूस आज प्यार को हम,
तुम्हे अपनी जान बना लेंगे.

17
वो अपने हुस्न की ख़ैरात देने वाले हैं 
तमाम जिस्म को कासा बना के चलना है.
अहमद कमाल परवाज़ी

18
रख दी है उस ने खोल के ख़ुद जिस्म की किताब
सादा वरक़ पे ले कोई मंज़र उतार दे.
प्रेम कुमार नज़र

19
किसी के जिस्म को चिथड़ा तक नहीं हासिल,
किसी की खिड़कियों के परदे भी मख़मल के होते हैं.

जिस्म शायरी 4 लाइन

20
जिस्म से उतरे पुराने कोट से ज्यादा नही
भीख में फेंके हुए इक़ नोट से ज्यादा नही,

लड़ रहे सदियों से ये हिन्दू मुसलमां आज भी
है सियासत के लिए एक वोट से ज्यादा नही.

21
इश्क ज़िस्मानी खेल बन के 
रह गया,

पनघट किनारे इंतजार करने के 
ज़माने चले गये.

Ishk Zismaani Khel Ban Ke
Rah Gaya
Panghat Kinaare Intzaar Karane Ke
Zamaane Chale Gaye.

22
जिस्म से होने वाली मोहब्बत का 
इजहार आसान होता है,

रूह से हुई मोहब्बत समझने में 
जिन्दगी गुजर जाती है.

Zism Se Hone Wali Mohabbat Ka 
Izahaar Aasaan Hota Hai,

Rooh Se Huye Mohabbat Samajhane Mein 
Zindagi Gujar Jati Hai.

23
भरोसे के एहसास पर जिंदा रहती है,
मोहब्बत सांसो से तो सिर्फ़ जिस्म चलता हैं.

24
सपना है आँखों  में
मगर नींद कहीं और है,

दिल तो हैं जिस्म में
मगर धड़कन कहीं और है.

25
ना हवस तेरे जिस्म की 
ना शौक तेरी खूबसूरती का,

बेमतलबी सा बन्दा हूँ 
बस तेरी सादगी पे मरता हूँ.

26
जिस्म तो बहुत संवार चुके
रूह का सिंगार कीजिये,

फूल शाख से न तोडिये 
खुशबुओं से प्यार कीजिये.

 जिस्म शायरी Hindi

27
जिस्म से रूह तक जाए तो
 हकीकत है इश्क

और रूह से रूह तक जाए तो
 इबादत है इश्क़.

28
तेरा वजुद दिल मे कुछ इस तरह हैं,
के जिस्म मे खुन के बजाय तेरी यादे बहती हैं.

Tera Vajud Dil Me Kuchh Is tarah Hai,
Ke Zism Me Khun Ke Bajaay Teri Yaade Bahati Hai.

29
किसी का ऐब  तलाश करने वाले मिसाल,
उस मक्खी के जैसी है 

जो सारा खूबसूरत जिस्म छोड 
सिर्फ़ ज़ख्म पर  बैठती है.

Kishi Ka Yab Talash Karne Vale Mishal,
 Ush Makhi Ke Jeshi hai 

Jo Sara Khubsurat Jism Chod 
Sirf  Jakham Par Bethti  Hai.




30
कैसे अशुद्ध हुई वो उन दिनों,
वही लहू उसका तुम्हारे जिस्म में भी तो है.

31
जिस्म बना लूँ उसे मैं अपना, 
या रूह मैं उसकी बन जाऊँ.

लबों से छू लूँ जिस्म तेरा, 
साँसों में साँस जगा जाऊँ.

तू कहे अगर इक बार मुझे, 
मैं खुद ही तुझमें समा जाऊँ..

32
ख़ाक थी और जिस्म ओ जाँ कहते रहे,
चंद ईंटों को मकाँ कहते रहे.

33
जिस्म की दरारों से रूह नज़र आने लगी है,
बहुत अंदर तक तोड़ गया है इश्क़ तुम्हारा.

34
आज जिस्म मे जान है 
तो देखते नही हैं लोग,

जब रूह निकल जाएगी तो 
कफन हटा-हटा कर देखेंगे लोग.


35
किसी से जुदा होना 
इतना आसान होता तो,
रूह को जिस्म से लेने 
फ़रिश्ते नहीं आते. 

जिस्म शायरी in Urdu

30
इश्क़ जिस्म से नही 
रूह से किया जाता है,

जिस्म तो एक लिबास है, 
ये हर जनम बदल जाता है.

31
दर्द गूंज रहा दिल में शहनाई की तरह
जिस्म से मौत की ये सगाई तो नहीं.

32
कुछ इस तरह से बसे हो 
तुम मेरे अहसासों में,

जैसे धड़कन दिल में, 
मछली पानी में, रूह जिस्म में.

33
मेरा वजूद मिट रहा है 
इश्क़ में तेरे,

अब यह ना कहना की 
जिस्म की चाहत है मुझे.

34
तेरे होठों पे मेरे होंठ ,
सरकते रहे सारी रात.

तेरे जिस्म की गरमी से ,
पिघलते रहे सारी रात.

तेरी खुशबू से मेरे ख्वाब ,
महकते रहे सारी रात..

35
मत रख हमसे वफा की उम्मीद,
हमने हर दम बेवफाई पायी है,

मत ढूंढ हमारे जिस्म पे जख्म के निशान,
हमने हर चोट दिल पे खायी है.

Mat Rakh Hamse Wafa Ki Ummid,
Hamne Har dam Bewafai Payi hai,

Mat Dhundh Hamare Jism Par Zakhamo Ke Nishan,
Hamne Har chot Dil Pe Khayi Hai.

जिस्म शायरी 4 लाइन

36
बढती उमर का इश्क 
और ढलती उमर की ख्वाहिश,

खूबसुरत जिस्म नही,

खूबसुरत साथ ढूंढता है.

Badhati Umr Ka Ishk

Aur Dhalati Umr Ki Khwahishe,

Khubsurat Zism Nahi


Khubsurat Sath Dhundhata Hai

37
एक दो ज़ख़्म नहीं जिस्म है सारा छलनी 
दर्द बे-चारा परेशाँ है कहाँ से निकले. 
सय्यद हामिद

38
रूह जिस्म का ठौर ठिकाना चलता रहता है
जीना मरना खोना पाना चलता रहता है.

60+ जिस्म शायरी 2 लाइन - जिस्म Status


39
और क्या कहूँ तुझको मैं 
खुद भी किसी लायक नहीँ,

बस मुझे अपना समझ लेना
जब तुझे किसी लायक न छोड़ जाये 
तेरे जिस्म को कुतरने वाले.

40
मुझे तलाश है एक रूह की 
जो मुझे दिल से प्यार करे,

वरना जिस्म तो पैसो से भी 
मिल जाया करते है.

41
जिस्म पर जो निसान है जनाब,
वो तो सारे बचपन के है,
बाद के तो सारे दिल पर लगे है.

42
जख्म ही देना था तो 
पूरा जिस्म तेरे हवाले था,

लेकिन कम्बख़त ने जब भी वार किया, 
दिल पर ही किया.

जिस्म शायरी in Urdu

43
माना तेरे जिस्म की प्यास बुझा दे 
वो बात नहीं मेरे हुश्न में,

मग़र तेरे हवस के बाज़ार में बिक जाऊं 
इतनी तो सस्ती नहीं मैं.


44
हवश की भी हद हो गई "ज़नाब" ?
लोग जिस्म पाने के लिये भी,
मोहब्बत का नाम लेते हैं.

45
उसे छुआ तो दिसम्बर में प्यास लगने लगी 
 कि उसके ज़िस्म का मौसम तो जून जैसा है.

Use Chhuwa To December  Me Pyaas Lagane Lagi
Ki Usake Zism Ka Mausam To June Jaisa Hai.

46
मेरे जिस्म से उसकी खुशबु आज भी आती है,
मैंने फुरसत में कभी सीने से लगाया था उसे.

47
मोहब्बत को छोड़कर 
क्या नही मिलता बाजार में,

हुस्न जिस्म चुंबन वादा अदा, 
जो मन करे खरीद लो.

Mohabbat Ko Chhodkar 
Kya Nahi Milata Bazaar Me,

Husn, Zism, Chumban, Wada Aada, 
Jo Man Kare Kharid  Lo.


48
बारिश और मोहब्बत" दोनो ही
य़ादगार होते है.

फर्क सिर्फ़ इतना होता है.
बारिश  से ज़िस्मं भीगता है
और मोहब्बत से आँखे.

Barish Aur Mohabbat Dono Hi 
Yaadgaar Hote Hai.

 Fark Itana Hota Hai,
 Barish Se Zism Bhigata Hai,  
Aur Mohabbat Se Ankhen.

49
अब के बरसात की रुत और भी भड़कीली है,
जिस्म से आग निकलती है, क़बा गीली है.

50
पीते पीते ज़हर-ए-ग़म 
अब जिस्म नीला पड़ गया,

कुछ दिनों में देखना हम 
आसमां होने को हैं.

51

ज़हर भी है एक दवा भी है इश्क़,
तुझसे और तुझ तक मेरी रज़ा है इश्क़.

जिस्म छू कर तो हर कोई एहसास पा जाए,
रूह तक महसूस हो  वो नशा है इश्क़..

52
रूहानी इश्क़ होता है जब , 
जिस्म की प्यास नहीं होती,  

हवा का रंग नहीं होता, 
इश्क़ की जात नहीं होती.

Ruhani Ishq Hota Hai Hai 
Jab Zism Ki Pyaas Nahi Hoti,

Hawa Ka Rang Nahi Hota 
Ishq Ki Jaat Nahi Hoti.

53
अगर मोहब्बत का शौक रखते हो तो दिल से रखो,
जिस्म के दीवाने तो यहाँ जानवर भी होते है.

54
हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आए,  "फ़राज़"
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था.

Hum Apni Ruh Tere Zism Mein Chhod Aaye,
Tujhe Gale Se Lagana To Ek Bahaana  Tha.

55
किया था वादा दोनों ने जीना मरना हैं  एक साथ 
मेरा जिस्म नीला पड़ा और उनके हुए पीले हाथ.

Kiya Tha Waada Dono Ne Jeena Marana Hain Ek Sath
Mera Zism Neela Pada Unake Huye Peele Hath.

56
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख ज़ुस्तज़ु क्या है.

57
जिस्म को जिस्म की ही तलाश है
इसे इश्क न कहो ये महज प्यास है.

58
मौत की शह दे कर तुमने 
समझा अब तो मात हुई,

मैंने जिस्म का ख़ोल उतार क़े 
सौंप दिया,और रूह बचा ली.
गुलज़ार 

59
ओझल हुआ मैं उनकी नज़र से तो यूँ लगा,
जैसे जिस्म से जान जुदा हो गयी.

60
मैं सोचती हूँ कि इक जिस्म के पुजारी को
मेरी वफ़ा ने वफ़ा का सुहाग क्यूँ समझा.
नरेश कुमार शाद

Main Sochati Hun Ki Ek Zism Ke Pujaari Ko
Meri Wafa Ne Wafa Ka Suhaag Kyu Samjha.

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