50+ शाम पर शायरी - 50+ Sham Par Shayari

बेहतरीन शाम पर शायरी - Sham Par Shayari

दोस्तों आज का यह आर्टिकल Shayari On Topics पर आधारित हैं इस पोस्ट में आप पढ़ सकते हैं शाम पर  शायरी (Sham Par Shayari), Evening Status For Facebook,  Facebook Theme Post Sham Shayari. 

Sham-Par-Shayari
50+ शाम पर शायरी - 50+Sham Par Shayari 


तो आईये दोस्तों शुरुआत करते हैं सबसे हसीन खुबसूरत शाम पर बनी इस पोस्ट की जिसमे हम पढेंगे Evening Status For Facebook (शाम पर  शायरी) के कलेक्शन को जो खास आपके लिए अलग-अलग सोशल मिडिया के माध्यम से संग्रह किया गया हैं जो आपको बेहद पसंद आएगा. 

तो इस पोस्ट की शुरुआत फिल्म "मेरे हमदम मेरे दोस्त" के नगमे से करते हैं जिसे लिखा हैं मजरूह सुल्तानपुरी जी और इस नगमे में अपनी आवाज़ दी हैं "मो.रफ़ी" साहब ने और संगीत से इसे सजाया हैं "लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल" जी द्वारा.


हुई "शाम" उनका ख़याल आ गया, वही ज़िंदगी का सवाल आ गया..

1 
कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए,
तुम्हारे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाए.
...........
Kabhi To Aasama Se Chand Utare Jaam Ho Jaaye,
Tumhare Naam Ki Ek Khubsurat Sham Ho Jaye.

50+ शाम पर शायरी - 50+ Sham Par Shayari 



☆ 2 

शाम से आँख में नमीं सी है,
आज फिर आप की कमी सी है.
"गुलज़ार"

Sham Se Ankhn Me Nami Si Hai
Aaj Fir Aap Ki Kami Si Hai

☆ 3 
हम भी इक शाम बहुत उलझे हुए थे ख़ुद में
एक शाम उस को भी हालात ने मोहलत नहीं दी
"इफ़्तिख़ार आरिफ़"

Ham Bhi Ek Shaam Bahut Uljhe Huye Huye The Khud Me,
Ek Shaam Usko Bhi Haalat Ne Mohalat Nahi Di..


☆ 4 
न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर 
कई साल ब'अद मिले हैं हम तेरे नाम आज की शाम है 
"बशीर बद्र"

Na Udaas Ho Na Malaal Kar Kisi Baat Ka Naa Khyaal Kar,
Kayi Saal B'ad Mile Hai Ham Tere Naam Aaj Ki Sham Hai.

 Evening Status For Facebook

☆ 5 
कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए 
तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाए 
"बशीर बद्र"

Kabhi To Aasamaan Se Chand Utare Jaam Ho Jaaye,
Tumhaare Naam Ki Ek Khubsurat Sham Ho Jaye..

Kabhi-To-Aasamaan-Se-Chand-Utare-Bashir-Badr


☆ 6 
कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते 
किसी की आँख में रह कर सँवर गए होते 
"बशीर बद्र"

Kabhi To Sham Dhale Apane Ghar Gaye Hote
Kisi Ki Ankh Me Rah Kar Sanwar Gaye Hote..

☆ 7 
नई सुब्ह पर नज़र है मगर आज ये भी डर है 
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे 
"शकील बदायुनी"

Nayi Subah Par Nazar Hai Magar Aah Ye Bhi Dar Hai,
Ye Sahar Bhi Rafta-Rafta Kahi Sham Tak Na Pahunche..

☆ 8 
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है 
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया 
"शकील बदायुनी"

Yun To Har Sham Ummido Me Guzar Jati Hai,
Aaj Kuchh Baat Hai Jo Shaam Pe Rona Aaya..

☆ 9 
याद है अब तक तुझ से बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे 
तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल 
"नासिर काज़मी"

Yaad Hai Ab Tak Tujhse Bichhadane Ki Wo Andheri Sham Mujhe
Tu Khamosh Khada Tha Lekin Baate Karata Tha Kajal.

☆ 10 
वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी 
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे 
"परवीन शाकिर"

WoNa Aayega Hame Malum Tha Is Sham Bhi,
Intizaar Us Ka Magar Kuchh Soch Kar Karate Rahe.

☆ 11 
शाम महके तेरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके.

Sham Mahake Tere Tasavvur Se
Sham Ke Baad Fir Sahar Mahake.

☆ 12 
शाम होते ही दिल उदास हो जाता है,
सपनों के सिवा ना कुछ खास होता है.
आपको तो बहुत याद करते हैं हम,
यादों का लम्हा मेरे लिए कुछ खास होता है ..

Sham Hote Hi Dil Udas Ho Jata Hai,
Sapano Ke Siwa Na Kuchh Khas Hota Hai.
Aapko To Bahut Yaad Karate Hai Ham,
Yaado Ka Lamha Mere Liye Kuchh Khas Hota Hai..

Sham Par Shayari 

☆ 13 
जिन्दगी की हर सुबह
कुछ शर्ते लेकर आती हैं,
और जिन्दगी की हर शाम
कुछ तजुर्बे देकर जाती हैं.

Zindagi Ki Har Subah
Kuchh Sharte Lekar Aati Hai.
Aur Zindagi Ki Har Sham
Kuchh Tajurbe Dekar Jati Hai..

☆ 14 
अब तो चुप-चाप शाम आती है 
पहले चिड़ियों के शोर होते थे 
"मोहम्मद अल्वी"

Ab To Chup-Chap Shaam Aati Hai,
Pahale Chidiyon Ke Shor Hote the.


☆ 15 
कितनी जल्दी ये शाम आ गयी,
गुड नाईट कहने की बात याद आ गयी,
हम तो बैठे थे सितारों की महफ़िल में,
चाँद को देखा तो आपकी याद आ गयी.

Kitani Jaldi Ye Sham Aa Gayi,
Good Night Kahane Ki Baat Yaad Aa Gayi,
Ham To Baithe The Sitaaro Ki Mahafil Me,
Chand Dekha To Aapki Yaad Aa gayi.

☆ 16 
दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों,
मर जाइये जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों.

Dil Bhi Bujha Ho Sham Ki Parchhayiyan Bhi Ho,
Mar Jaayiye Jo Yese Me Tanhaayiyan Bhi Ho.

☆ 17 
शाम से उन के तसव्वुर का नशा था इतना,
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है.

Sham Se Un Ke Tasvvur Ka Nasha Tha Itana,
Need Aayi Hai To Ankho Ne Bura Maana Hai. 

 शाम पर शायरी 

☆ 18 
कँपकँपाती शाम ने, कल माँग ली चादर मेरी,
और जाते-जाते, जाड़े को इशारा कर दिया.

Kapkapati Sham Ne, Kal Mang Li Chadar Meri,
Aur Jaate-Jate Jade Ko Ishara Kar Diya.

☆ 19 
कई ख्वाब मुस्कुराये सरे-शाम बेखुदी में,
मेरे लब पे आ गया था तेरा नाम बेखुदी में.

Kayi Khwaab Muskuraye Sare-Sham Bekhudi Me,
Mere Lab Pe Aa Gaya Tha Tera Naam Bekhudi Me.

☆ 20 
हम अपनी शाम को जब नज़र-ए-जाम करते हैं
अदब से हमको सितारे सलाम करते है.

Ham Apani Sham Ko Jab Nazar-E-Jaam Karate Hai,
Adab Se Hamko Sitare Salaam Karate Hai.

☆ 21 
कभी कभी शाम ऐसे ढलती है जैसे घूंघट उतर रहा हो,
तुम्हारे सीने से उठता धुआँ हमारे दिल से गुज़र रहा हो.

Kabhi-Kabhi Sham Yese Dhalati Hai Jaise Ghunghat Utar Raha Ho,
Tumhare Seene Se Uthata Dhua Hmare Dil Se Guzar Raha Ho.

☆ 22 
हमने एक शाम चिरागो से सज़ा रखी है,
शर्त लोगो ने हवाओं से लगा रखी है.

Hamane Ek Sham Chirago Se Saza Rakhi Hai,
Shart Logo Ne Hawaon Se Laga Rakhi Hai.

☆ 23 
जिसमें न चमकते हों मोहब्बत के सितारे,
वो शाम अगर है तो मेरी शाम नहीं है.

Jisame N Chamakate Ho Mohabbat Ke Sitare,
Wo Sham Agar Hai To Meri Shaam Nahi. 

☆ 24 
बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा 
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई 
अजमल सिराज

Bas Ek Sham Ka Har Sham Intzaar Raha,
Magar Wo Sham Kisi Sham Bhi Nahi Aayi.

☆ 25 
शाम खाली है जाम खाली है,
ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है,
सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा,
मैने तन्हाई मगर बचा ली है.

Sham Khali Hai Jaam Khali Hai,
Zindagi Yun Guzarane Wali Hai.
Sab Lut Liya Tumane Janeja Mera,
Maine Tanhayi Magar Bacha Li Hai.

☆ 26 
उसने पूछा कि कौनसा तोहफा है मनपसंद?
मैंने कहा वो शाम जो अब तक उधार है.

Usane Puchha Ki Kaun Sa Tohafa Hai Manpasand?
Maine Kaha, Sham Jo Ab Tak Udhar Hai..


☆ 27 
ये उदास शाम और तेरी ज़ालिम याद,
खुदा खैर करे अभी तो रात बाकि है.

Ye Udas Sham Aur Teri Zalim Yaad,
Khuda Khair Kare Abhi To Raat Baki Hai..

50+ शाम पर शायरी - 50+ Sham Par Shayari 


☆ 28 
वो रोज़ देखता है डूबते हुए सूरज को "फ़राज़"
काश मैं भी किसी शाम का मँज़र होता.

Wo Roz Dekhata Hai Dubate Huye Suraj Ko "Faraz"
Kash Main Bhi Kisi Sham Ka Manzar Hota..

☆ 29 
साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले 
हम को जाना है कहीं शाम से पहले पहले 
"अहमद फ़राज़"

Sakiya Ek Nazar Jaam Se Pahale-Pahale
Hamko Jaana Hai Kahi Sham Se Pahale-Pahale.

Sakiya-Ek-Nazar-Jaam-Se-Pahale-Ahmad-Faraz


☆ 30 
शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते हैं,
इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं.

Sham Tak Subah Ki Nazaro Se Utar Jate Hai,
Itane Samjhuton Pe Jeete Hai Ki Mar Jate Hai.

☆ 31 
तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा,
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा.

Tumhari Zulf  Ke Saye Me Sham Kar Lunga,
Safar Is Umr Ka Pal Me Tamaam Kar Lunga.

 शाम पर शायरी 

☆ 32 
उधर इस्लाम ख़तरे में,इधर है राम ख़तरे में,
मगर मैं क्या करूँ,है मेरी सुब्हो-शाम ख़तरे में.

Udhar Islaam Khatare Me Idhar Ram Khatare Me,
Magar Main Kya Karu, Hai Meri Subaho Sham Khatare Me.

☆ 33 
भीगी हुई एक शाम की दहलीज़ पे बैठा हूँ, 
मैं दिल के सुलगने का सबब सोच रहा हूँ .
दुनिया की तो आदत है बदल लेती है आंखें ,
में उस के बदलने का सबब सोच रहा हूँ.

Bheegi Huyi Ek Sham Ki Dahaliz Pe Baitha Hun,
Main Dil Ke Sulagane Ka Sabab Soch Raha Hu.
Duniya Ki To Aadat Hai Badal Leti Hai Ankhe,
Mai Us Ke Badalane Ka Sabab Soch Raha Hun..

 Evening Status For Facebook

☆ 34 
उस की आँखों में उतर जाने को जी चाहता है 
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है 
कफ़ील आज़र अमरोहवी

Us Ki Ankho Me Utar Jaane Ko Jee Chahata Hai,
Sham Hoti Hai To Ghar Jaane Ko Jee Chahata Hai.

☆ 35 
मुद्दत से एक रात भी अपनी नहीं हुई
हर शाम कोई आया उठा ले गया मुझे.

Muddat Se Ek Raat Bhi Apani Nahi Huyi,
Har Sham Koi Aaya Utha Le Gaya Mujhe.

☆ 36 
तेरी निगाह उठे तो सुबह हो, पलके झुके तो शाम हो जाये
अगर तू मुस्कुरा भर दे तो कत्ले आम हो जाये.

Teri Nigah Uthe To Subah Ho,
Palake Jhuke To Sham Ho Jaye.
Agar Tu Muskura De To,
Qatle Aam Ho Jaye..

Sham Par Shayari 

☆ 37 
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है,
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया.

Yu To Har Sham Ummido Me Guzar Jati Hai,
Aaj Kuchh Baat Hai, Jo Sham Pe Rona Aaya.


☆ 38 
कहाँ की शाम और कैसी सहर, जब तुम नही होते,
तड़पता है ये दिल आठो पहर, जब तुम नही होते.

Kanha Ki Sham Aur Kaisi Sahar, Jab Tum Nahi Hote,
Tadapata Hai Ye Dil Aatho Pahar, Jab Tum Nahi Hote,

☆ 39 
ये ढलती शाम किसी अंत की शुरुवात नहीं,
यह एक संगम हैं जो जीवन के हर रूप को दिखाता हैं.

Ye Dhalati Sham Kisi Ant Ki Shuruaat Nahi,
Yah Ek Sangam Hai Jo Jeevan Ke Har Rup Ko Dikhata Hai.

☆ 40 
एक दर्द छुपा हो सीने में तो मुस्कान अधूरी लगती है,
जाने क्यों बिन तेरे मुझको हर शाम अधूरी लगती है..

Ek Dard Chhup[a Ho Seene Me To Muskaan Adhuri Lagati Hai,
Jaane Kyu Bin Tere Mujhko Har Shar Sham Adhuri Lagati Hai.

☆ 41 
शामें किसी को माँगती हैं आज भी 'फ़िराक़' 
गो ज़िंदगी में यूँ मुझे कोई कमी नहीं 
"फ़िराक़ गोरखपुरी"

Shame Kisi Ko Mangati Hai Aaj Bhi "Firaq"
Go Zindagi Me Yun Mujhe Koi Kami Nahi.

☆ 42 
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास 
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं 
"फ़िराक़ गोरखपुरी"

Sham Bhi Thi Dhua Dhua Bhi Tha Udas-Udas
Dil Ko Kayi Kahaniyan Yaad Si Aake Rah Gayi.

☆ 43 
दर्द की शाम है, आँखों में नमी है,
हर सांस कह रही है, फिर तेरी कमी है.

Dard Ki Sham Hai, Ankho Me Nami Hai,
Har Sans Kah Rahi Hai, Fir Teri Kami Hai..

☆ 44 
शाम सूरज को ढलना सिखाती है, 
शमा परवाने को जलना सिखाती है .
गिरने वाले को होती तो है तकलीफ ,
पर ठोकर इंसान को चलना सिखाती है.

Sham Suraj Ko Dhalana Sikhati Hai,
Shama Parwane Ko Jalana Sikhati Hai.
Girane Wale Ko Hoti Hai To Hai Taklif,
Par Thokar Insaan Ko Chalana Sikhati Hai.

☆ 45 
शाम को आओगे तुम अच्छा अभी होती है शाम 
गेसुओं को खोल दो सूरज छुपाने के लिए 
क़मर जलालवी

Sham Ko Aaoge Tum,
Achchha Abhi Hoti Hai Sham.
Gesuo Ko Khol Do Suraj Chhupane Ke Liye.

☆ 46 
शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो,
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं.

Shayar Kahakar Badanaam Na Karana Mujhe Dosto,
Main To Roz Sham Ko Dinbhar Ka Hisab Likhata Hun.

 शाम पर शायरी 

☆ 47 
शाम ढले ये सोच के बैठे हम तेरी तस्वीर के पास,
सारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने-अपने मीर के पास
"साग़र आज़मी"

Sham Dhale Ye Soch Ke Baithe Ham Teri Tasveer Ke Paas,
Sari Raat Baithi Hogi Gazal Apane-Apane Meer Ke Paas.

☆ 48 
भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे 
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं 
"शकेब जलाली"

Bheegi Huyi Ek Sham Ki Dahaliz Pe Baithe,
Ham Dil Ke Sulagane Ka Sabab Soch Rahe Rahe Hai.

☆ 49 
ये इंतजार ग़लत है की शाम हो जाए
जो हो सके तो अभी दौर-ऐ-जाम हो जाए
"नरेश कुमार "शाद"

Ye Intzaar Galat Hai Ki Sham Ho Jaye,
Jo Ho Sake To Abhi Daur-E-Jaam Ho Jaye..



दोस्तों ये हसीन शाम पर पोस्ट की 50+ शाम पर शायरी - Sham Par Shayari का यह कलेक्शन आपको पसंद आये तो इसे शेयर करना ना भूले अपने दोस्तों को सोशल मिडिया पर.. 

इन्हें भी पढ़े:-




1 comment: