लाज़वाब 90+ जुदाई पर शायरी - Judayi Par Shayari Status


लाज़वाब 90+ जुदाई पर शायरी - Judayi Par Shayari Status

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लाज़वाब 90+ जुदाई पर शायरी - Judayi Par Shayari Status


दोस्तों  इस पोस्ट में जुदाई से जुडी शायरी के कलेक्शन को क्युकी जुदाई इंसान को अंदर से तोड़ देती हैं इंसान ज़िंदा तो रहता हैं पर एक  मुर्दे समान इंसान  सह सकता हैं लेकिन जुदाई सहन नहीं होती। इस जुदाई का दर्द वही समझ सकता हैं जो अपनों से जुदा  हैं. 

लाज़वाब 90+ जुदाई पर शायरी - Judayi Par Shayari Status


तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं Judayi Shayari के इस पोस्ट को जिसे खास आपके लिए बनाया गया हैं अलग-अलग सोशल मिडिया के सबसे अधिक प्रचलित वायरल पोस्ट से.

Judayi Status For Facebook Whatsapp की शुरुआत करने से पहले गुनगुनाते हैं फिल्म दिल ही तो है का नगमा जिसे साहिर लुधियानवी द्वारा लिखा गया और इसमें संगीत दिया हैं रोशन ने और इस नगमे को गाया हैं मुकेश जी ने.  
अब अगर मेल नही है तो जुदाई भी नही, बात तोड़ी भी नही तुमने बनाई भी नही


1
बेताब मै ही नही दर्द-ए-जुदाई की कसम,
रोते तुम भी होंगे करवट बदल बदलकर 

2
मुझे महसूस हुआ दर्द ए जुदाई क्या,
मैने एक फूल जो टहनी से बिछड्ते देखा 

3
जुदा होकर भी जी रहे हैं एक मुद्दत से ,
कभी दोनों ही कहते थे जुदाई मार डालेगी 

4
उसकी जुदाई को लफ़्ज़ों में कैसे बयान करें,
वो रहती दिल में धडकती दर्द में और बहती अश्क में 

जुदाई पर शायरी 

5
तुझे चाहा तो बहुत इजहार न कर सके, 
कट गई उम्र किसी से प्यार न कर सके, 
तूने माँगा भी तो अपनी जुदाई माँगी, 
और हम थे कि तुझे इंकार न कर सके 

6
दिल से हमें पुकारा ना करो, 
यूँ आँखों से इशारा ना करो, 
तुमसे दूर हैं मजबूरी है हमारी, 
तन्हाई में हमें यूँ तड़पाया ना करो 

Judayi Status For Facebook 

7
इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए, 
तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है 

8
बेवफा वक़्त था?  तुम थे
या मुकद्दर था मेरा
बात इतनी ही है कि अंजाम जुदाई निकला 

9
याद में तेरी आँहें भरता है कोई, 
हर सांस के साथ तुझे याद करता है कोई, 
मौत तो सचाई है आनी ही है, 
लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई 

10
अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो, 
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो 
मुनव्वर राना

11
हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे, 
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई 
असद भोपाली

12
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ, 
उस ने सदियों की जुदाई दी है 
गुलज़ार

13
जुदाई की रुतों में सूरतें धुंधलाने लगती हैं, 
सो ऐसे मौसमों में आइना देखा नहीं करते 
हसन अब्बास रज़ा

14
यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना, 
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना 
क़तील शिफ़ाई

15
वादा किया है तो निभाएगे,
सूरज की किरण बनकर तेरी छत पर आएगे.
हम है तो जुदाई का गम कैसा,
तेरी हर सुबह को फूलों से सजाएगे 


16
एक लफ्ज़ है जुदाई,
इसे सह कर तो देखो,
तुम टूट के बिखर ना जाओ तो कहना 

17
जुदाई हो अगर लम्बी तो अपने रूठ जाते हैं,
बहुत ज्यादा परखने से भी रिश्ते टूट जाते हैं 

18
गम-ए-जुदाई में तड़पते उनकी आँखों से पूछा,
 कुछ कहना है❔ उसने झपक झपक के कहा, 
नहीं अब तो बस बहना है  

Judayi Par Shayari 

19
वो कभी हमसे पुछा करते थे जुदाई क्या है,
आज समझ आया है सवाल उनका 

20
इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,
 गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,,
 हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं 

21
ना जाने मेरी मौत कैसी होगी,
पर ये तो तय है, तेरी जुदाई से बेहतर होंगी 

22
जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ,
 उसने सदियों की जुदाई दी है 

23
कह के आ गए उनसे कि जी लेंगे तुम्हारी बिन,
 उनके जुदा होते ही जान पे बन आई है 

24
जुदाई हल नही है मसलों का,
तुम समझते क्यूँ नही बात मेरी 

25
लाएँगे कहाँ से हम, जुदाई का हौसला,
 क्यों इस क़दर मेरे करीब आ रहें हैं आप 

26
तेरी तस्वीर को सीने से लगा लेती हूँ,
 इस तरह जुदाई का गम मिटा लेती हूँ 

27
कितनी सुधर गई है जुदाई में जिंदगी,
 वो बेवफाई करके मुझ पर अहसान कर गया 

28
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम 
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ 
अहमद फ़राज़

29
कभी कभी तो ये दिल में सवाल उठता है, 
कि इस जुदाई में क्या उस ने पा लिया होगा 
अनवर अंजुम

30
जुदा थे हम तो मयस्सर थीं क़ुर्बतें कितनी 
बहम हुए तो पड़ी हैं जुदाइयाँ क्या क्या 
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

31
हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर,
हम उसे अपनी खता कहते हैं,
 वो तो साँसों में बसी है मेरे,
 जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं 

Judayi Par Shayari

32
जुदाई सहने का अंदाज कोई मुझसे सीखे,
 रोते है मगर आँखों में आँसूं नहीं होते 

33
मैं समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले,
तू ने जाकर तो जुदाई मेरी क़िस्मत कर दी 

34
तेरी चाहत में , तेरी मुहब्बत में ,तेरी जुदाई में,
 दिल रोज़ टूटता है पर आवाज नहीं करता 

35
मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमे,
छोड़ गया वो ये सोच कर की हम जुदाई मे भी खुश हैं

36
बिछडते बिछडते पलट कर उसने सौ बार देखा,
 जुदाई की सारी रस्में निभाती गई वो 

37
तुझसे जुदा होने का जहर,
पी लिया यारा मैंने,
 जैसे था मुमकिन बस फिर भी, जी लिया यारा मैंने 

38
एक लफ्ज़ है खुदा,
उसे पुकार कर तो देखो,
सब कुछ पा ना लो तो कहना  

39
धमकियाँ देते हो जुदाई की,
उफ्फ - मुहोब्बत में बदमाशियाँ 

40
कोई वादा नहीं फिर भी प्यार है,
जुदाई के बावजूद, भी तुझपे अधिकार है.
तेरे चेहरे की उदासी दे रही है गवाही,
मुझसे मिलने को तू भी बेक़रार है 


41
किसने माँगी थी इन आँखों से रिहाई,
जाने किस ज़ुर्म की सज़ा है ये जुदाई 

42
ख़ुश्क ख़ुश्क सी पलकें और सूख जाती हैं. 
मैं तिरी जुदाई में इस तरह भी रोता हूँ  
अहमद राही

43
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए, 
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया 
नासिर काज़मी

44
इतना बे-ताब न हो मुझ से बिछड़ने के लिए, 
तुझ को आँखों से नहीं दिल से जुदा करना है 
अंजुम सलीमी

45
इस जुदाई में तुम अंदर से बिखर जाओगे, 
किसी मा'ज़ूर को देखोगे तो याद आऊँगा  
वसी शाह

46
हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई, 
दिल में दर्द है और ज़माने में रुसवाई, 
कटता है हर एक पल सौ बरस के बराबर, 
अब मार ही डालेगी मुझे तेरी जुदाई 

जुदाई पर शायरी

47
यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर, 
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ 

48
हर एक बात पर वक़्त का तकाजा हुआ, 
हर एक याद पर दिल का दर्द ताजा हुआ, 
सुना करते थे ग़ज़लों में जुदाई की बातें, 
खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ 

49
तेरी हर अदा मोहब्बत सी लगती है, 
एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है, 
पहले नही सोचा था अब सोचने लगे है हम,
जिंदगी के हर लम्हों में तेरी ज़रूरत सी लगती है 

"Judayi Par Shayari"

50
जुदा हो कर भी जी रहें हैं एक मुद्दत से,
कभी दोनों कहते थे, जुदाई मार डालेगी 

51
जब मैंने कहा तुम्हारी जुदाई, बर्बाद कर देगी मुझे,
तो उसने बड़े तल्ख़ लहज़े में कहा, बर्बाद हज़ारो है एक तुम भी सही 

52
अगर जुदाई जरुरी है तो "बेशक रुठ जाओ 
तुम "जी" सकते हो, तो मर "मैं भी नहीं जाऊँगा 

53
बेवफ़ा मैं था वक़्त था या मुक़द्दर था,
बात जो भी थी अंजाम जुदाई निकला 


54
मिटा ना पाओगे मेरे निशां दिल से
वस्ल से जुदाई तक बेशुमार हूँ मैं 

55
हमको ये बताओ दूर कैसे तुम रहते हो
कैसे जुदाई का ग़म यारा तुम सहते हो
हम तनहा मर जाएँगे यारा तेरी याद में
देखो गीले है कितने अशको की बरसात में 

56
कलम में जितना दम है जुदाई की बदौलत हैं
वरना लोग मिलने के बाद लिखना छोड़ देते हैं 

57
हर मुलाकात को याद हम करतें हैं, 
कभी चाहत कभी जुदाई कि आह भरते है, 
यूं तो रोज़ तुम से सपनो मे बात करते हैं पर, 
फिर से अगली मुलाकात का इन्तज़ार करते है 

58
जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल, 
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई 

59
हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, 
हम उसे अपनी खता कहते हैं, 
वो तो साँसों में बसी है मेरे, 
जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं 

60
ऐ चाँद चला जा 
क्यूँ आया है तू मेरी चौखट पर, 
जुदा  गया वो शख्स 
जिस के धोखे मे तुझे देखते थे 

61
हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है, 
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें 
शहरयार

62
इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की 
आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की 
अहमद फ़राज़

63
जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो, 
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो 
नज़ीर अकबराबादी

64
तेरी जुदाई में और तो कुछ ना हो सका,
बस मोहब्बत से नफरत हो गयी 

65
मुझे तुम्हारी जुदाई का कोई रंज़ नहीं,
मेरे खयाल की दुनिया में मेरे पास हो तुम 

जुदाई पर शायरी

66
हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते 
मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते 
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो 
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते 

लाज़वाब 90+ जुदाई पर शायरी - Judayi Par Shayari Status


67
जुदाई मोहब्बत मे जरुरी है,
तभी तो पता चलता  है की कौन  किस के
बिना कब तक जुदा रह पाता है 

68
गज़ल में गीत में दोहे में और रुबाई में 
 कहां कहां नही ढूंढा तुझे जुदाई में 

69
उसको चाहा पर इज़हार करना नहीं आया,
 कट गई उम्र हमें प्यार करना नहीं आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मांगी जुदाई,
और हमें इंकार करना नहीं आया 

70
हर कदम पे आपका एहसास चाहिए,
मुझे आपका साथ अपने पास चाहिए,
रब भी रो पड़े हमारी जुदाई से,
 ऐसा एक रिश्ता ख़ास चाहिए 

71
याद में तेरी आहें भरता है कोई,
हर सांस के साथ तुझे याद करता है कोई.
मौत सच्चाई है एक रोज आनी है,
 लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई 

72
जुदा होकर भी जी रहे हैं एक मुद्दत से,
कभी दोनों ही कहते थे जुदाई मार डालेगी 

73
मोहब्बत और भी बढ़
जाती है जुदाईयोँ से…
तुम सिर्फ मेरे हो हमदम
इस बात का ख्याल रखना 

74
दिल को आता है जब भी ख़याल उनका,
तस्वीर से पूछते हैं फिर हाल उनका 

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75
जुदा होकर भी जुदाई नहीं होती इश्क
उम्र कैद है प्यारे इसमें रिहाई नहीं होती 

76
कोई रूठे अगर तुमसे तो उसे फ़ौरन मना लेना,
 इस हाल में अक्सर जुदाई जीत जाती है 

77
ना मेरी नीयत बुरी थी,  ना उसमे कोई बुराई थी,
 सब मुक़द्दर का खेल था,बस किस्मत में जुदाई थी 

78
तुम क्या जानो,तुम क्या समझो. बात मेरी तन्हाई की,
 जब “अंगड़ाई पे अँगड़ाई लेती है रात जुदाई की 

79
ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी 
देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या  
अख़्तर शीरानी

80
इस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया 
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का 

81
दो घड़ी उस से रहो दूर तो यूँ लगता है 
जिस तरह साया-ए-दीवार से दीवार जुदा 
अहमद फ़राज़

82
किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, 
रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते 

83
उस शख्स को जुदा होने  का सलीका नहीं आता, 
जाते जाते खुद को मेरे पास छोड़ गया 

84
रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे, 
करे तो क़यामत तक जुदा न करे, 
ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में, 
लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में 

85
मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, 
ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, 
देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, 
तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है 

86
ना मेरा दिल बुरा था ना उसमे कोई बुराई थी,
सब मुक़द्दर का खेल है बस किस्मत में जुदाई थी 

87
ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई मे,
ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे 

88
भींगी पलकों से छुप छुप के बिदाई  दी हैं,
उफ् खुदा कैसी तुमने यह जुदाई दी हैं 

89
तूमको ही सहना है गम जुदाई का,
मेरा क्या है मैं तो मर जाऊंगी

90
कहते हैं करम आपके खराब थे जो जुदाई मिली 

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91
काश  तेरी जुदाई की कोई सरहद होती,
पता तो रहता अभी कितना सफर और तय करना है