Wednesday, 6 June 2018

मजरूह सुल्तानपुरी शेर ओ शायरी - Majrooh Sultanpuri Shayari

नमस्कार दोस्तो आज आज की पोस्ट मे पढ़ते है जाने मानेमशहुर शायर मजरुह सुल्तानपुरी की एक से बढ़कर एक लाजवाब शायरी जो आपको बेहद पसंद आएगी।

Majrooh-Sultanpuri-Shayari

अगर आपको मजरूह सुल्तानपुरी के इस आर्टिकल मे कोई भी शायरी पसंद आये तो शेयर करना ना भुलियेगा। 

अगर आप इनके जीवन के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारी पिछली पोस्ट जरूर पढ़े।  मजरूह सुल्तान पुरी की जीवनी

तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं लाजवाब शेर-ओ-शायरी के इस संग्रह को। 

 1= Bacha Liya Mujhe Tufan Ki Mauj Ne Warna
    Kinaare Waale Safeena Meea Dubo Dete.

 बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना
 किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते.
 2= Jawfa Ke Jikr Par Tum Kyon Sambhalkar Baith Gaye
 Tumhari Baat Nahin, Baat Hai Zamaane Ki.

 जफा के जिक्र पर तुम क्यों संभलकर बैठ गए,
तुम्हारी बात नहीं, बात है जमाने की.
Shayari of Majrooh Sultanpuri
 3= Shama Bhi, Ujaala Bhi Main Hi Apni Mehafil Ka,
    Main Hi Apni Manjil Ka Rahbar Bhi, Rahi Bhi.

 शमा भी, उजाला भी मैं ही अपनी महफिल का
 मैं ही अपनी मंजिल का राहबर भी, राही भी.

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 4= Mujhe Sahal Ho Gai Manzilein Wo 
   Hawa Ke Rukh Bhi Badal Gaye

   Tira hath, Hath Mein Aa Gaya Ki 
   Chirag Raah Mein Jal Gaye.
 मुझे सहल हो गई मंजिलें वो 
 हवा के रुख भी बदल गये,


 तिरा हाथ, हाथ में आ गया कि
  चिराग राह में जल गये.
 5= Dekh Zinda Ke Pare Joshe Junoon, 
    Joshe Bahaar


    Raqs Karna Hai To Phir Paanv Ki 
    Zanzeer Na Dekh.

 देख ज़िन्‍दां के परे जोशे जुनूं, 
  जोशे बहार,


 रक्‍स करना है तो फिर पांव की 
 ज़ंजीर ना देख.
 6= Ab Sochte Hain Layenge Tujh Sa Kahan Se Ham
   Uthane Ko Uth To Aaye Teere Aastan Se Ham.

  अब सोचते हैं लाएंगे तुझ सा कहाँ से हम,
  उठने को उठ तो आए तीरे आस्ताँ से हम.
2 line shayari of Majrooh Sultanpuri
 7= Sair-E-Sahil Kar Chuke Ae Mauj-E-Sahil Sar Na Mar
Tujh Se Kya Bahalenge Tufanon Ke Bahlaaye Hue.


 सैर-ए-साहिल कर चुके ऐ मौज-ए-साहिल सर ना मार
 तुझ से क्या बहलेंगे तूफानों के बहलाए हुए.
 8= Majrooh Likh Rahe Hain Wo Ahal-E-Wafa Ka Naam,
    Ham Bhi Khade Hue Hain Gunhgaar Ki Tarah.

 मजरूह लिख रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का नाम,
 हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह.
Shayari of Majrooh Sultanpuri
 9= Wafa Ke Naam Pe Tum Kyun 
    Sambhal Ke Baith Gaye,


    Tumhari Baat Nahin Baat Hai Zamane Ki.

 वफ़ा के नाम पे तुम क्यूँ संभल के बैठ गए,
 तुम्हारी बात नहीं बात हैं ज़माने की.
 10= Rehte The Kabhi Jinke Dil Mein, 
     Hum Jaan Se Bhi Pyaron Ki Tarah.

     Baithe Hain Unhi Ke Kunche Mein Hum, 
     Aaj Gunahgaron Ki Tarah.

  रहते थे कभी जिनके दिल में, 
  हम जान से भी प्यारों की तरह.


 बैठे हैं उन्हीं के कूंचे में हम, 
 आज गुनहगारों की तरह.
Majrooh Sultanpuri Shayari 
 11= Main Akela Hi Chala Tha Janibe Manzil Magar,
    Log Aate Gaye Aur Kaarvan Banta Gaya.

 मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर,
 लोग आते गए और कारवां बनता गया.
मजरूह सुल्तानपुरी शेर ओ शायरी
 12= Pehale Sau Baar Idhar Aur Udhar Dekha Hai
   Tab Kahin Dar Ke Tunhen Ek Baar Dekha Hai.

 पहले सौ बार इधर और उधर देखा है,
तब कहीं डर के तुम्हें एक बार देखा है.
 13= Ye Aag Aur Nahin Dil Ki Aag Hai Nadan,
    Chiraag Ho Ke Na Ho, Jal Bujhenge Parwaane.
  
 ये आग और नहीं दिल की आग है नादां
 चिराग हो के न हो, जल बुझेंगे परवाने.
2 line shayari of Majrooh Sultanpuri
 14= Taqdir Ka Sikwa Bemani, 
    jeena Hi Tujhe Manjoor Nahin


    Aap Apna Muqaddarban Na Sake, 
    Itna To Koi Majboor Nahin.

 तकदीर का शिकवा बेमानी, 
 जीना ही तुझे मंजूर नहीं.


 आप अपना मुकद्दर बन न सके, 
 इतना तो कोई मजबूर नहीं.
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 15= Bahane Aur Bhi Hote Jo Zindagi Ke Liye,
   Ham Ek Baar Tiri Aarjoo Bhi Kho Dete.

 बहाने और भी होते जो ज़िन्दगी के लिए,
 हम एक बार तिरी आरजू भी खो देते.
 16= Shabe Intezar Ki Kashmkash Na Punch, 
     Kaise Sahar Hui.
     
     Kabhi Ek Charag Jala Liya, 
    Kabhi Ek Charag Bujha Diya.

 शबे इंतज़ार की कश्‍मकश ना पूछ 
 कैसे सहर हुई,


 कभी एक चराग़ जला लिया, 
 कभी एक चराग़ बुझा दिया.
 17=  Mili Jab Unse Nazar, 
    Bas Raha Tha Ek Jahan

    Hati nigaahe to chaaro taraf the 
    veerane.

 मिली जब उनसे नज़र, 
 बस रहा था एक जहां.


 हटी निगाह तो चारों तरफ थे 
 वीराने.
मजरूह सुल्तानपुरी शेर ओ शायरी
 18= Kya Galat Hai Jo Main Deewana Hua, 
  Sach Kahana..


 Mere Mahbub Ko Tum Ne Bhi 
 Agar Dekha Hai.
 क्या ग़लत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना,
 मेरे महबूब को तुम ने भी अगर देखा है.
 19= Rok Sakta Hame Zindane Bala Kya Majrooh
    Hum To Aawaz Hai Deewaron Se Chhan Jate Hain.

 रोक सकता हमें ज़िन्‍दाने बला क्‍या मजरूह,
 हम तो आवाज़ हैं दीवारों से छन जाते हैं.
मजरूह सुल्तानपुरी शायरी
 20= Gham-E-Hayat Ne Aawara Kar Diya Warna
    Thi Aarjoo Tere Dar Pe Subah-O-Sham Karein.

 ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
 थी आरजू तेरे दर पे सुबह-ओ-शाम करें.

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