Monday, 30 April 2018

राम मनोहर लोहिया की जीवनी – Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

राम मनोहर लोहिया की जीवनी – Ram Manohar Lohia Biography

दोस्तों आज के आर्टिकल (Biography) में जानते हैं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता  “राम मनोहर लोहिया का जीवन परिचय” (Ram Manohar Lohia Biography in Hindi) के बारे में. तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं राम मनोहर लोहिया की बायोग्राफी को.

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राम मनोहर लोहिया की जीवनी – Ram Manohar Lohia Biography

एक झलक राम मनोहर लोहिया के बारे में: 
भारत एक अजेय योद्धा और महान् विचारक के रूप में जाने जाते थे राम मनोहर लोहिया जी , जो भारतीय  स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी तथा प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता थे. उन्होंने सत्य का अनुकरण किया और आजादी की लड़ाई में अपनी अहम् भूमिका निभाई जिन्होंने अपने दम पर राजनीति का रुख़ बदल दिया. 



अपनी प्रखर देशभक्ति और बेलौस तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण डॉ. लोहिया ने अपने विरोधियों के ह्रदय में भी अपनी जगह बनायीं रक्खी. वे स्वभाव  के सरल लेकिन निडर अवधूत राजनीतिज्ञ थे. विश्व की रचना और विकास के बारे में उनकी अनोखी व अद्वितीय दृष्टि थी. उन्होंने सदा ही विश्व-नागरिकता का सपना देखा था.

राम मनोहर लोहिया की प्रारभिक जीवनी:
डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में स्थित तमसा नदी के किनारे बसे कस्बे अकबरपुर में 23 मार्च, 1910 को हुआ. उनके पिताश्री का नाम हीरालाल था जो की अध्यापक थे और राष्ट्रभक्त भी  थे साथ ही गाँधी जी के अनुयायी थे. और उनकी माता जी का नाम श्रीमती चन्दा देवी था वो भी एक शिक्षिका थीं.
शिक्षा: 
जब लोहिया जी ढाई वर्ष  के हुए तभी उनकी माताजी का निधन हो गया. तब उन्हें दादी और सरयूदेई ने मिल कर पाला. और उन्होंने अपनी प्रारभिक शिक्षा  टंडन पाठशाला से ली  और उसके बाद विश्वेश्वरनाथ हाईस्कूल में अपना दाखिला लिया. पढाई में वे हमेशा आगे रहते थे. और इस कारण अपने अध्यापकों के चहेते थे. आखिर में उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में इण्टर  की पढाई की.

गाँधी जी से मुलाकात: 
लोहिया जी के पिता अध्यापक के साथ साथ राष्ट्रभक्त भी थे.  साथ ही गाँधी जी के अनुयायी भी थे.  जब कभी गाँधी जी से मिलने वो जाते थे तब  Ram Manohar Lohia जी को भी अपने साथ ले जाते थे. इस  कारण गाँधी जी के व्यक्तित्व का उन पर गहरा असर था. तथा जीवनपर्यन्त गाँधी जी के आदर्शों का समर्थन किया.

कांग्रेस अधिवेशन:
जीवन में नया मोड़ तब आया, जब एक  बार सन 1918  में पहली बार अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में  अपने पिताजी के साथ शामिल हुए. और उन्हें वही से देश के लिए कुछ करने नयी दिशा मिली.

कई भाषाओँ के जानकार थे:
कलकत्ता विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई सन 1929 में की. और वहा से पढाई करने के बाद जर्मनी, चले गए और जर्मन में रह कर  उन्होंने पीएच.डी. की, और जर्मन भाषा को सीखा, लोहिया  जी कई भाषाओँ के जानकार थे.



डाक्टरेट की उपाधि:
जर्मनी से अपनी पढाई के दौरान "धरती का नमक" शीर्षक से शोध प्रबन्ध  लिखने लगे, और 4 साल के बाद डॉ की उपाधि लेकर भारत आ गए. बताते चले की लोहिया जी अर्थशास्त्र से पी.एच.डी. करके लौटे थे.

राम मनोहर लोहिया की विचारधारा:
हिंदी भाषा को अंग्रेजी भाषा से अधिक महत्व देते थे, उनका मानना था की अंग्रेजी भाषा, पढे-लिखे और अनपढ़ों के बीच दीवार खीच देती हैं, उनमे दूरियां लाती हैं वही Hindi हर वर्ग के लोगो के बीच प्रेम बढाती हैं, 

एकता और भाई-चारे की भावना भावना पैदा करती हैं, एक नए राष्ट्र के निर्माण की सीढ़ी  हिंदी हैं.  राष्ट्र के निर्माण सम्बन्धित विचारो में हिंदी से बढ़ावा मिलता हैं.
जात-पात का विरोध:
लोहिया जी जात-पात का विरोध करते थे. और इस विषय पर अपना सुझाव भी दिया करते थे. और कहते थे  हम सब को  इस जात-पात से ऊपर उठ कर एक दुसरे के साथ मिल जुल कर रहना चाहिए. एक साथ मिल जुल कर खाना पीना और रहना चाहिए एक दुसरे के हितो की बात करनी चाहिए, कोई भी वर्ग छोटा बड़ा नहीं होना चाहिए, ये तभी संभव हैं जब हम सब "रोटी और बेटी” के माध्यम से इसे समाप्त करने की कोशिश में एक साथ आगे बढ़ेंगे.

यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी चुनाव: 
जात-पात में भेदभाव ना रखने वाले लोहिया जी "यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी" के अन्दर उच्च पदों के लिए होने वाले चुनाव में निम्न जाति के उम्मीदवारों को ही टिकट  दिया, साथ ही उनको अपना प्रोत्साहन भी दिया.

 सरकारी स्कूलों की स्थापना:
वे हमेशा चाहते थे की शिक्षा का स्तर बढे सरकारी स्कूलों की स्थापना हो, जो सभी समुदाय वर्गों को एक सामान शिक्षा प्रदान करे. और भारत को शिक्षित करे.


राम मनोहर लोहिया की जीवनी – Ram Manohar Lohia Biography


असोसिएशन ऑफ़ यूरोपियन इंडियंस:
भारती की आज़ादी के लिए वो यूरोप में अपनी पढाई के दौरान ही असोसिएशन ऑफ़ यूरोपियन इंडियंस नामक एक क्लब की स्थापना की. इस क्लब का एक ही मकसद था, यूरोप में रहने वाले भारतीय नागरिको के ह्रदय में राष्ट्र प्रेम भरना था. और देश के प्रति प्रति जागरूकता पैदा करनी थी.



लीग ऑफ नेशन्स’ की सभा का विरोध: 
जिनेवा में बीकानेर के महाराजा भारत का प्रतिनिधित्व  करते हुए ब्रिटिश राज्य के एक सहयोगी  बनकर लीग ऑफ नेशन्स की सभा को आयोजित किया, जो  ब्रिटिश राज्य के हित में था, इस सभा में लोहिया जी भी मौजूद थे और उन्होंने इस सभा का विरोध वही खड़े हो कर किया

बाद में इस सभा में किये गए उनके द्वारा विरोध का कारण उन्होंने  कई नामचीन अखबार और पत्रिकाओं के संपादको को   बताई और पत्रों के माध्यम से उन सभी को जानकारी दी.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल:
विरोध की इस घटना की लोगो को अखबार और पत्रिकाओं के माध्यम से जानकारी लगते ही, भारत में उन्हें सब जानने लगे. जब वो भारत लौटे तब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अपनी सदस्यता ली.

राम मनोहर लोहिया की जीवनी – Ram Manohar Lohia Biography

समाजवादी पार्टी की स्थापना का निर्णय:
पटना में स्थित समाजवादी अंजुमन-ए-इस्लामिया के हॉल में 17 मई 1934 को आचार्य नरेन्द्र देव की अध्यक्षता में देश के समाजवादियों की एक सभा रक्खी गयी.  और उसमे समाजवाद को बढ़ावा देने के लिए समाजवादी पार्टी की स्थापना का निर्णय लिया गया.  और इस सभा में समाजवादी आंदोलन की एक रूपरेखा प्रस्तुत की,

कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना: 
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और वर्ष 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की आधारशिला रखी.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पहले सचिव:
नेहरू जी ने वर्ष 1936 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पहले सचिव के रूप में  लोहियाजी को नियुक्ति किया.

पहली बार गिरफ्तार:
अंग्रेजो के खिलाफ़ देशवाशियों के सामने भड़काऊ शब्द बोलने तथा सरकारी संस्थाओं का बहिष्कार करने के जुर्म में उनको पहली बार अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार किया था.  लेकिन  उन्हें दुसरे ही दिन छोड़ दिया गया क्युकी युवाओं द्वारा  विद्रोह करने का  डर अंग्रेजो को सताने लगा.

दो वर्षों का कारावास:
उन्होंने सन 1940 में एक लेख लिखा सत्याग्रह नाउ के नाम से, और इस लेख को लिखने के आरोप में उन्हें दुबारा गिरफ्तार कर लिया गया, और  2 वर्ष के लिए उन्हें जेल भेज दिया गया. और उन्हें बाद में सन 1941 में रिहा  कर दिया गया.

फिर भारत छोड़ो आंदोलन में अपनी सक्रीय भूमिका निभाते रहे. उसी दौरान  सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के कारण अंग्रेजों ने महात्मा गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और वल्लभभाई पटेल जैसे बड़े स्तर के स्वतन्त्रता सैनानियों के साथ उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया.

देश विभाजन का विरोध:
आखिरकार वो समय करीब आने लगा भारत की आज़ादी का तब एक अलग सी लहर उठी हुयी थी आंधी  की तरह देश विभाजन को लेकर, लेकिन लोहिया जी  इस विभाजन के खिलाफ़ थे और  इस विभाजन हिंसा के खिलाफ़ अपने द्वारा लिखे गए लेखो और भाषणों से इसका जोरदार विरोध किया.

देश विभाजन का शोक:
जब अंग्रेजो द्वारा  15 अगस्त, 1947 को देश आज़ाद हुआ तब उस समय सभी नेता दिल्ली में एक जुट नज़र आये लेकिन देश के बटवारे के गम से पीड़ित लोहिया जी अपने  गुरु महात्मा गाँधी जी  के साथ दिल्ली से बाहर चले गए.

स्वतंत्रता के बाद:
राष्ट्र की आजादी के बाद भी लगातार देश की सेवा में समर्पित रहे आम जनता को जागरूक करने में जुट गए और उन्हें राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए प्रेरित करते रहे. और लोगो से निवेदन करते थे  कि वे कुओं, नहरों और सड़कों का निर्माण करके देश के निर्माण कार्य में भागीदार बने.

 प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का विरोध: 
राम मनोहर लोहिया जी  ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी का उस समय विरोध किया जब रोजाना तीन आना, पन्द्रह आना की कमाई लोगो की होती थी, तब जवाहर लाल नेहरू का अपना खर्च था 25000 रुपए रोजाना था. और इस खर्चे के विरोध में लोहिया जी ने आवाज़ उठाई थी, जो आज भी लोगो के बीच चर्चित हैं.

लोहिया जी हमेशा देश की सफलता में बाधा उत्पन्न करने वालो मुद्दों को उठाया और उसका विरोध किया अपने भाषण और लेखन के जरिये. देश की आम जनता तक उन मुद्दों को पहुचाया. और आम जनता को जागरूक किया.

Ram Manohar Lohia अमीर-गरीब, जात-पात, तथा स्त्री-पुरुष असमानताओं को  लोगो के बीच से दूर करने का तथा उन्हें इस विषय पर जागरूक करने का भी कार्य किया.

हिन्द किसान पंचायत का गठन:
कृषि क्षेत्र में उत्पन्न समस्यायों के समाधान तथा उसके निस्तारण के लिए "हिन्द किसान पंचायत" का गठन भी किया. लोहिया जी केवल चिन्तक ही नहीं, एक कर्मवीर भी थे, उन्होने अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आन्दोलनों का नेतृत्व किया.

सात क्रांतियों का आह्वान:
लोहिया जी अनेक सिद्धान्तों, कार्यक्रमों और क्रांतियों के जनक थे. उनकी ये सात  क्रान्तियां जिसका उन्होंने आह्वान किया था.
  1.  नर-नारी की समानता के लिए क्रान्ति.
  2.  चमड़ी के रंग पर रची राजकीय, आर्थिक और दिमागी असमानता के खिलाफ क्रान्ति,
  3.  संस्कारगत, जन्मजात जातिप्रथा के खिलाफ और पिछड़ों को विशेष अवसर के लिए क्रान्ति,
  4.  परदेसी गुलामी के खिलाफ और स्वतन्त्रता तथा विश्व लोक-राज के लिए क्रान्ति,
  5.  निजी पूँजी की विषमताओं के खिलाफ और आर्थिक समानता के लिए तथा योजना द्वारा पैदावार बढ़ाने के लिए क्रान्ति,
  6. निजी जीवन में अन्यायी हस्तक्षेप के खिलाफ और लोकतंत्री पद्धति के लिए क्रान्ति,
  7. अस्त्र-शस्त्र के खिलाफ और सत्याग्रह के लिये क्रान्ति.
डॉ राममनोहर लोहिया की प्रकाशित पुस्तके: 
डॉ राममनोहर लोहिया जी स्वतंत्रा सेनानी, समाज सुधारक के साथ साथ एक अच्छे विचारक लेखक व् रचनाकार भी थे, उन्होंने बहुत सी पुस्तकों को लिखा हैं उनमे से कुछ पुसताके इस प्रकार से हैं .
  • अंग्रेजी हटाओ
  • इतिहास चक्र
  • देश, विदेश नीति-कुछ पहलू
  • धर्म पर एक दृष्टि
  • भारतीय शिल्प
  • भारत विभाजन के गुनहगार
  • मार्क्सवाद और समाजवाद
  • राग, जिम्मेदारी की भावना, अनुपात की समझ
  • समलक्ष्य, समबोध
  • समदृष्टि
  • सच, कर्म, प्रतिकार और चरित्र निर्माण आह्‌वान
  • समाजवादी चिंतन
  • संसदीय आचरण
  • संपूर्ण और संभव बराबरी और दूसरे भाषण
  • हिंदू बनाम हिंदू
अंतिम यात्रा: 
राम मनोहर लोहिया जी  का निधन नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल में 57 वर्ष की आयु में 12 अक्टूबर, 1967 को हुआ था. उन्हें अस्पताल में  पौरूष ग्रंथि के आपरेशन के लिए भर्ती किया गया था. नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल वर्तमान में लोहिया अस्पताल के नाम से जाना जाता हैं.

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धन्यवाद आप सभी मित्रों का जो आपने अपना कीमती समय इस Wahh Blog को दिया.

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