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Friday, 24 March 2017

Top 20 Urdu Sher of Mirza Ghalib in Hindi Collection

सदाबहार मिर्ज़ा ग़ालिब की ये 20 शायरियां 

ग़ालिब का नाम किसने नहीं सुना और कौन नहीं हैं उनसे जो  वाकिफ नहीं. उर्दू ग़ज़लों के वो उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर थे.  इनका जन्म २७ दिसंबर 1797 आगरा  में हुआ  और इनका निधन 15 फ़रवरी, 1869 को  हुआ.
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जैसा की आप सभी जानते हैं की मिर्ज़ा ग़ालिब को  उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है. और आज भी उनका नाम बड़े ही अदब से लिया जाता हैं. उनके द्वारा लिखे गए एक एक शब्द मानो बोल पड़ेंगे. फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको ही दिया जाता है.. इससे पहले के वर्षो में मीर तक़ी "मीर" भी इसी वजह से जाने जाते थे. 
और अधिक जानकारी के लिए wikipedia के लिंक पर Click करे 
  • मुख्य रचनाएँ   
  • 'दीवान-ए-ग़ालिब', 'उर्दू-ए-हिन्दी', '
  • उर्दू-ए-मुअल्ला', 'नाम-ए-ग़ालिब', 
  • 'लतायफे गैबी', 'दुवपशे कावेयानी' आदि
दोस्तों आज पढ़ते हैं उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर ग़ालिब के कुछ ग़ज़ल और शेर. 

20 Most Popular Classical Sher of Mirza Ghalib in Hindi

1

Aqal Walo Ke Muqaddar Men Yah Junun Kahan Galib
Yah Ishk Wale Hain, Jo Har Chiz Luta Dete Hain..

अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब 
यह इश्क़ वाले हैं, जो हर चीज़ लूटा देते हैं..

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2
Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz,
Zaahir hai tera haal sab un par kahe Bagair..

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़ 
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर 


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3
Nadan Ho Jo Kahate Ho Kyo Jeete Hain "Galib"
Kisamat Me Hain Marane Ki Tammanna Koi Din Aur 

नादान हो जो कहते हो क्यों जीते हैं "ग़ालिब"
किस्मत मैं है मरने की तमन्ना कोई दिन और.


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4
Ho Liye Naamabaar Ke Sath-Sath
Ya Rab. Apne Khat Ko Ham Pahunchaye Kya

हो लिए क्यों नामाबर के साथ -साथ 
या रब, अपने खत को हम पहुँचायें क्या.


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5
Laah Ho To Usako Ham Samjhe Lagaav
Jab Naa Ho Kuchh Bhi, To Dhokha Khaye Kya.. 

लाग् हो तो उसको हम समझे लगाव 
जब न हो कुछ भी , तो धोखा खायें क्या..


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6
Dil Diya Jaan Ke Kyu Usako Wafaadar "Asad"
Galati Ki Ke Jo Kaafir Ko Muslamman Samjha.

दिल दिया जान के क्यों उसको वफादार "असद" 
ग़लती की के जो काफिर को मुस्लमान समझा



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7
Thi Khabar Garm Ke "Galib" Ke Udenge Purje,
Dekhane Ham Bhi Gaye The, Par Tamasha Na Hua..

थी खबर गर्म के ग़ालिब के उड़ेंगे पुर्ज़े ,
देखने हम भी गए थे पर तमाशा न हुआ..


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8
Khuda Ke Vaste Prda Na Rukhsaar Se Utha Zaalim
Kahi Yesa Na Ho Jahan Bhi Wahi Kaafir Sanam Nikale.

खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम 
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले..



Top 20  Urdu Sher of Mirza Ghalib in Hindi Collection 

9

Dil Se Teri Nigahe Zigar Tak Utar Gayi
Dono Ko Ek Adaa Men Razamand Kar GAayi
Maara Zamaane Ne "Galib" Tum Ko
Wo Valvale Kaha, Wo Zawani Kidhar Gayi  

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई 
दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई
मारा ज़माने ने ‘ग़ालिब’ तुम को 
वो वलवले कहाँ , वो जवानी किधर गई



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10
Fir Usi Bewafa Pe Marte Hain
Fir Wahi Zindgaani Hamri Hain.
Bekhudi Bebas Nahin "Galib"
Kuchh To Hain Jis Ki Prdadaari Hain..


फिर उसी बेवफा पे मरते हैं 
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है 
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है


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11







Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain 
kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain

Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai 
kabhii ham un ko kabhii apane ghar ko dekhate hain

nazar lage na kahii.n usake dast-o-baazuu ko 
ye log kyon mere zaKhm-e-jigar ko dekhate hain

tere javaahiir-e- tarf-e-kulah ko kyaa dekhein 
ham auj-e-taalaa- e-laal-o- guhar ko dekhate hain


यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं 
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं

वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है 
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को 
ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं

तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें 
हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं



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12
Har ek baat pe kehate ho tum ki tu kya hai
Tumhi kaho ki ye andaaz-e-guftugoo kya hai.

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है.
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13
Ki Humse Wafaa To Gair Usko Jafa Kehte Hain, 
Hoti Aayi Hai, Ki Achchhi Ko Buri Kehte Hain.

की हमसे वफ़ा तो गैर उसको जफा कहते हैं, 
होती आई है की अच्छी को बुरी कहते हैं.


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14
Ghalib bura na maan jo waaiz bura kahe
Aisa bhi koi hai ki sab achha kahein jise

‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइज़* बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे.


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15
Hazaron khwaahishein aisi ki har khwaahish par dam nikale
Bahut nikale mere armaan lekin phir bhi kam nikale.

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले


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16
Ham ko maaloom hai jannat ki hakikat lekin
Dil ko khush rakhne ko ‘Ghalib’ ye khyaal achcha hai

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल को ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है.


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17
Ham wahan hai jahan se ham ko bhi
Kuchh hamari khabar nahin aati.

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती.

Best of Mirza Ghalib Shayari in Hindi Collection 

18
Ham ko un se wafa ki hai ummeed
Jo nahin jaante wafa kya hai

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है.



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19
Ishq Se Tabiyat Ne Zeest Ka Mazaa Paya, 
Dard Ki Dawa Payi Dard Be Dawa Paya. 

इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया, 
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।



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20
Dil-e-nadaan tujhe hua kya hai
Aakhir is dard ki dawa kya hai


दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है.

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