Friday, 3 February 2017

Swami Dayanand Saraswati Quotes

Swami Dayanand Saraswati Quotes

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  • सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति समझनी चाहिए..



  • जिसने गर्व किया, उसका पतन अवश्य हुआ है.



  • जिसको परमात्मा और जीवात्मा का यथार्थ ज्ञान, जो आलस्य को छोड़कर सदा उद्योगी, सुखदुःखादि का सहन, धर्म का नित्य सेवन करने वाला, जिसको कोई पदार्थ धर्म से छुड़ा कर अधर्म की ओर न खेंच सके वह पण्डित कहाता है.



  • मानव को अपने पल-पल को 'आत्मचिन्तन' मे लगाना चाहिए, क्योकी हर क्षण हम 'परमेश्वर' द्वार दिया गया 'समय' खो रहे है. 



  • क्रोध का भोजन 'विवेक' है, अतः इससे बचके रहना चाहिए। क्योकी 'विवेक' नष्ट हो जाने पर, सब कुछ नष्ट हो जाता है.



  • काम' मनुष्य के 'विवेक' को भरमा कर उसे पतन के मार्ग पर ले जाता है



  • मानव' जीवन मे 'तृष्णा' और 'लालसा' है, और ये दुखः के मूल कारण है



  • अगर 'मनुष्य' का मन 'शाँन्त' है, 'चित्त' प्रसन्न है, ह्रदय 'हर्षित' है, तो निश्चय ही ये अच्छे कर्मो का 'फल' है. 



  • लोभ वो अवगुण है, जो दिन प्रति दिन तब तक बढता ही जाता है, जब तक मनुष्य का विनाश ना कर दे.



  • हंकार' एक मनुष्य के अन्दर वो स्थित लाती है, जब वह 'आत्मबल' और 'आत्मज्ञान' को खो देता है.



  • क्षमा' करना सबके बस की बात नहीं, क्योंकी ये मनुष्य को बहुत बङा बना देता है.



  • वेदों मे वर्णीत सार का पान करने वाले ही ये जान सकते हैं कि 'जिन्दगी' का मूल बिन्दु क्या है.



  • आत्मा, 'परमात्मा' का एक अंश है, जिसे हम अपने 'कर्मों' से 'गति' प्रदान करते है। फिर 'आत्मा' हमारी 'दशा' तय करती है.

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