Monday, 20 February 2017

मशहूर शायर डॉ॰ बशीर बद्र चुनिन्दा शायरी

Shayari of Bashir Badr

 शायरी की दुनिया में जाना माना नाम जो किसी के  परिचय का मोहताज़  नहीं  जिन्होंने लोगों के दिलों की धड़कानों को अपनी शायरी में उतारा है  तो आज हम बात कर रहे हैं उर्दू शायरी व गज़लों के मशहूर लेखक बशीर बद्र जी की, जिन्हें मैं बचपन से सुनता आ रहा हु । और आज भी उनकी गज़ले और शायरियों सुनता हुउनके द्वारा लिखे हर शब्द बोलते हैं। सच शायरी के दीवाने जानते ही होंगे उनकी कलम का जादू क्या हैं।  और हम सब उनके दीवाने हैं। 
Shayari-of-Bashir-Badr

बताते चले की:- भोपाल से ताल्लुकात रखने वाले  डॉ॰ बशीर बद्र साहब का जन्म जन्म 15 फ़रवरी 1936 में कानपुर में हुआ था।  और इनका  पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर है। जो  आज हिन्दी और उर्दू में देश के सबसे मशहूर शायर के रूप में जाने जाते हैं। भारत ही नहीं न जाने कितने मुल्को में मुशायरे के लिए  शिरकत कर चुके हैं।  उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को एक नया लहजा दिया।
आईये आज डॉ॰ बशीर बद्र साहब द्वारा लिखी कुछ मशहूर शायरी पढ़ते हैं इस ब्लॉग के माध्यम से।

Zindagi Tumane mujhe Kabr Se Kam Di Hain Zami.

ज़िन्दगी तूनें मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फ़ैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है ।


Log Tujh Ko Mera Mahbub Samjhate Honge.

इतनी मिलती है मेरी गज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मेरा महबूब समझते होंगे ।


Log Tut Jate Hain Ek Ghar Banane Me.

लोग टूट जाते हैं एक घर बनानें में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलानें में।


Aankhon Ko Khwab Chhupane Nahi Aate.

पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी,
आँखो को अभी ख्वाब छुपानें नहीं आते ।

Ujaale Apni Yaado Ke Hamare Sath Rahane Do.

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये ।


Jara Fasale Se Mila Karo.

कोई हाथ भी न मिलायेगा, जो गले लगोगे तपाक से
ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो ।

Kya Kare Hausala Nahi Hota.

जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता ।


Zindagi Mujh ko Tera Pata Chahiye. 

एक दिन तुझ से मिलनें ज़रूर आऊँगा
ज़िन्दगी मुझ को तेरा पता चाहिये ।


Magar Us Ne Mujhe Chaha Bahut Hai. 

मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है
मगर उस नें मुझे चाहा बहुत है ।


Dost Ho Jaye To Sharminda  Na Hon.

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों ।


Koi Ajnabi Nahi Mila.

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था.
फ़िर उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला ।

Rahat Indori
Munawwar Rana
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